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हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस सेक्टर से बड़ी खबर आ रही है. कई प्रमुख बीमा कंपनियों ने Policybazaar जैसी ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म्स के कमीशन में कटौती करने का फैसला लिया है. नया कमीशन स्ट्रक्चर 1 दिसंबर 2025 से लागू किया जा सकता है. यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब GST रिफॉर्म्स के बाद बीमा कंपनियों की लागत 10–12% बढ़ चुकी है, और IRDAI की 30% खर्च सीमा (Expense of Management Cap) ने कंपनियों को खर्च घटाने पर मजबूर कर दिया है.
इंश्योरेंस इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई बड़े इंश्योरर जैसे ICICI Lombard, Care Health, Niva Bupa और Aditya Birla Health Insurance ने Policybazaar समेत अन्य ऑनलाइन चैनलों को दिए जाने वाले कमीशन में कटौती करने का निर्णय लिया है. अभी तक Policybazaar को इन कंपनियों से 15–18% तक कमीशन मिलता था, जो अब घटकर 12–14% तक जा सकता है. इस कदम से Policybazaar की रेवेन्यू ग्रोथ पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि इसकी पेरेंट कंपनी PB Fintech की कुल आय का करीब 60% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस से आता है.
कई बीमा कंपनियों ने अपने एजेंटों, बैंकिंग पार्टनर्स और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स को सूचित कर दिया है कि 1 दिसंबर से नया कमीशन फॉर्मूला लागू होगा. इससे पहले बीमाकर्ताओं ने ऑफलाइन चैनलों (जैसे बैंक और एजेंट नेटवर्क) के पेआउट घटाए थे. अब वही रणनीति डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भी लागू की जा रही है.
EoM यानी Expense of Management वह लिमिट है जिसे भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने तय किया है. इस नियम के अनुसार, कोई भी बीमा कंपनी अपने कुल प्रीमियम का 30% से अधिक खर्च नहीं कर सकती, जिसमें मार्केटिंग, ऑपरेशन, सैलरी और कमीशन सभी शामिल हैं. लेकिन 2025 के GST रिफॉर्म्स के बाद बीमा कंपनियों को Input Tax Credit (ITC) का फायदा नहीं मिल रहा.
पहले कंपनियां एजेंट कमीशन और ऑपरेशनल खर्चों पर जीएसटी का क्रेडिट ले पाती थीं, लेकिन अब यह सुविधा खत्म हो गई है. उनकी कुल लागत 10–12% बढ़ गई, और अब उन्हें उसी 30% सीमा में रहकर सबकुछ मैनेज करना पड़ रहा है. कई बीमाकर्ताओं ने सैलरी और अन्य ऑपरेशनल खर्च घटाए हैं, जबकि कुछ ने सीधे कमीशन में कटौती कर दी है.
कमीशन कटौती का सबसे बड़ा असर Policybazaar (PB Fintech) पर पड़ेगा. कंपनी का करीब 60% रेवेन्यू हेल्थ इंश्योरेंस से आता है, और यही सेगमेंट अब सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर औसतन 15–18% की कमीशन गिरावट आती है, तो Policybazaar को सालाना ₹250–₹300 करोड़ का नुकसान हो सकता है. कंपनी ने FY27 तक ₹1,000 करोड़ मुनाफे का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब यह टारगेट हासिल करना मुश्किल दिख रहा है.
कमीशन घटने से बीमा प्रोडक्ट्स की कीमतों या प्रीमियम पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन लॉन्ग टर्म में इसका असर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और मार्केट पहुंच पर पड़ सकता है. एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक अगर कमीशन बहुत नीचे चला गया, तो छोटे डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंट मार्केट से बाहर हो जाएंगे. इससे ग्राहक विकल्पों की कमी महसूस करेंगे.
बीमा कंपनियां दावा करती हैं कि उन्होंने यह निर्णय नफे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नियमों और खर्च सीमा के भीतर रहने के लिए लिया है. कई कंपनियों के मुताबिक, वे अब भी अपने लॉस रेश्यो (Loss Ratio) और अंडरराइटिंग प्रॉफिट से जूझ रही हैं. ऐसे में हर प्रतिशत लागत बचत उनके लिए महत्वपूर्ण है.
FAQs
1. बीमा कंपनियों ने कमीशन क्यों घटाया?
GST रिफॉर्म्स के बाद उनकी लागत बढ़ी और IRDAI की EoM लिमिट के अंदर रहना जरूरी था.
2. कब से लागू होगा नया कमीशन रूल?
1 दिसंबर 2025 से.
3. कौन-कौन सी कंपनियां प्रभावित होंगी?
Policybazaar, बैंकिंग चैनल्स और ऑफलाइन एजेंट्स सभी पर असर पड़ेगा.
4. Policybazaar पर कितना असर पड़ेगा?
कुल रेवेन्यू में 60% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस का है, जिससे कंपनी की कमाई पर 15–20% तक की मार पड़ सकती है.
5. क्या ग्राहकों के लिए बीमा महंगा होगा?
फिलहाल नहीं, लेकिन आगे चलकर बीमा कंपनियां प्रीमियम एडजस्ट कर सकती हैं.
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हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस सेक्टर से बड़ी खबर आ रही है. कई प्रमुख बीमा कंपनियों ने Policybazaar जैसी ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म्स के कमीशन में कटौती करने का फैसला लिया है. नया कमीशन स्ट्रक्चर 1 दिसंबर 2025 से लागू किया जा सकता है. यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब GST रिफॉर्म्स के बाद बीमा कंपनियों की लागत 10-12% बढ़ चुकी है, और IRDAI की 30% खर्च सीमा (Expense of Management Cap) ने कंपनियों को खर्च घटाने पर मजबूर कर दिया है.
इंश्योरेंस इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई बड़े इंश्योरर जैसे ICICI Lombard, Care Health, Niva Bupa और Aditya Birla Health Insurance ने Policybazaar समेत अन्य ऑनलाइन चैनलों को दिए जाने वाले कमीशन में कटौती करने का निर्णय लिया है. अभी तक Policybazaar को इन कंपनियों से 15-18% तक कमीशन मिलता था, जो अब घटकर 12-14% तक जा सकता है. इस कदम से Policybazaar की रेवेन्यू ग्रोथ पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि इसकी पेरेंट कंपनी PB Fintech की कुल आय का करीब 60% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस से आता है.
कई बीमा कंपनियों ने अपने एजेंटों, बैंकिंग पार्टनर्स और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स को सूचित कर दिया है कि 1 दिसंबर से नया कमीशन फॉर्मूला लागू होगा. इससे पहले बीमाकर्ताओं ने ऑफलाइन चैनलों (जैसे बैंक और एजेंट नेटवर्क) के पेआउट घटाए थे. अब वही रणनीति डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भी लागू की जा रही है.
EoM यानी Expense of Management वह लिमिट है जिसे भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने तय किया है. इस नियम के अनुसार, कोई भी बीमा कंपनी अपने कुल प्रीमियम का 30% से अधिक खर्च नहीं कर सकती, जिसमें मार्केटिंग, ऑपरेशन, सैलरी और कमीशन सभी शामिल हैं. लेकिन 2025 के GST रिफॉर्म्स के बाद बीमा कंपनियों को Input Tax Credit (ITC) का फायदा नहीं मिल रहा.
पहले कंपनियां एजेंट कमीशन और ऑपरेशनल खर्चों पर जीएसटी का क्रेडिट ले पाती थीं, लेकिन अब यह सुविधा खत्म हो गई है. उनकी कुल लागत 10-12% बढ़ गई, और अब उन्हें उसी 30% सीमा में रहकर सबकुछ मैनेज करना पड़ रहा है. कई बीमाकर्ताओं ने सैलरी और अन्य ऑपरेशनल खर्च घटाए हैं, जबकि कुछ ने सीधे कमीशन में कटौती कर दी है.
कमीशन कटौती का सबसे बड़ा असर Policybazaar (PB Fintech) पर पड़ेगा. कंपनी का करीब 60% रेवेन्यू हेल्थ इंश्योरेंस से आता है, और यही सेगमेंट अब सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर औसतन 15-18% की कमीशन गिरावट आती है, तो Policybazaar को सालाना ₹250–₹300 करोड़ का नुकसान हो सकता है. कंपनी ने FY27 तक ₹1,000 करोड़ मुनाफे का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब यह टारगेट हासिल करना मुश्किल दिख रहा है.
कमीशन घटने से बीमा प्रोडक्ट्स की कीमतों या प्रीमियम पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन लॉन्ग टर्म में इसका असर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और मार्केट पहुंच पर पड़ सकता है. एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक अगर कमीशन बहुत नीचे चला गया, तो छोटे डिस्ट्रीब्यूटर्स और एजेंट मार्केट से बाहर हो जाएंगे. इससे ग्राहक विकल्पों की कमी महसूस करेंगे.
बीमा कंपनियां दावा करती हैं कि उन्होंने यह निर्णय नफे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नियमों और खर्च सीमा के भीतर रहने के लिए लिया है. कई कंपनियों के मुताबिक, वे अब भी अपने लॉस रेश्यो (Loss Ratio) और अंडरराइटिंग प्रॉफिट से जूझ रही हैं. ऐसे में हर प्रतिशत लागत बचत उनके लिए महत्वपूर्ण है.
GST रिफॉर्म्स के बाद उनकी लागत बढ़ी और IRDAI की EoM लिमिट के अंदर रहना जरूरी था.
1 दिसंबर 2025 से.
Policybazaar, बैंकिंग चैनल्स और ऑफलाइन एजेंट्स सभी पर असर पड़ेगा.
कुल रेवेन्यू में 60% हिस्सा हेल्थ इंश्योरेंस का है, जिससे कंपनी की कमाई पर 15–20% तक की मार पड़ सकती है.
फिलहाल नहीं, लेकिन आगे चलकर बीमा कंपनियां प्रीमियम एडजस्ट कर सकती हैं.
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