हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में होगी LIC की एंट्री, मार्च अंत के पहले हो सकता है बड़ा ऐलान

LIC health insurance: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 25) के अंत तक एक स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बना रही है.
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में होगी LIC की एंट्री, मार्च अंत के पहले हो सकता है बड़ा ऐलान

LIC health insurance: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 25) के अंत तक एक स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बना रही है. कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्धार्थ मोहंती ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी. हालांकि, उन्होंने उस कंपनी का नाम नहीं बताया जिसमें एलआईसी निवेश करना चाहती है. मोहंती ने कहा कि चर्चा अंतिम चरण में है.

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में प्रवेश की योजना

मुंबई में ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ एक्चुअरीज में अपने भाषण में मोहंती ने कहा, "हमारे पास योजना है. चर्चा अंतिम चरण में है. LIC के लिए हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में प्रवेश करना एक स्वाभाविक विकल्प है."

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उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी के अप्रूवल में समय लगता है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष के भीतर, 31 मार्च से पहले निर्णय लिया जाएगा.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि LIC की ओर से कंपनी में अधिकतम हिस्सेदारी हासिल नहीं की जाएगी.

हेल्थ इंश्योरेंस के बिजनेस में रुचि

LIC ने पहले हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस में अपनी रुचि का संकेत दिया था और वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में कहा था कि वह एक स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस फर्म में निवेश करना चाहती है.

ये कंपनियां हैं पहले से मौजूद

वर्तमान में, भारत में ऐसी सात कंपनियां मौजूद हैं, जिनमें स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस, निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस, केयर हेल्थ इंश्योरेंस, आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस, मणिपाल सिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस, नारायण हेल्थ इंश्योरेंस और गैलेक्सी हेल्थ इंश्योरेंस शामिल है.

लॉन्ग टर्म बॉन्ड का भी अनुरोध

इसके अलावा, LIC ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अतिरिक्त दीर्घकालिक बॉन्ड जारी करने का भी अनुरोध किया है. बीमा दिग्गज ने पहले 40 साल के बॉन्ड मांगे थे, जिसे RBI ने मंजूरी दे दी. अब, LIC 50 साल और 100 साल के बॉन्ड के लिए चर्चा कर रही है.

मोहंती ने कहा, "हम दीर्घकालिक निवेशक हैं. अनुबंध के अनुसार भुगतान करने के लिए हमारे पास अनुबंध संबंधी दायित्व हैं. इसलिए, मुझे निवेश और परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन (Asset-Liability Management) को ठीक से प्रबंधित करना होगा."

बीमा और पेंशन फंड की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आरबीआई ने पहले ही 50 साल के बॉन्ड पेश कर दिए हैं.

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