हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले हर व्यक्ति के लिए जरूरी है ये खबर! प्रीमियम भरने से पहले इसे नहीं जाना तो हो जाएगा भारी नुकसान

सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना काफी नहीं है. कई गंभीर और जानलेवा बीमारियां सामान्य हेल्थ प्लान में कवर नहीं होतीं. ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस भी लेना बेहद जरूरी है, जो आपको आर्थिक सुरक्षा का मजबूत कवच देता है.
हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले हर व्यक्ति के लिए जरूरी है ये खबर! प्रीमियम भरने से पहले इसे नहीं जाना तो हो जाएगा भारी नुकसान

हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले हर व्यक्ति के लिए जरूरी है ये खबर!

अगर आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है या आप लेने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. आज के दौर में तेज़ी से बढ़ते मेडिकल खर्च और गंभीर बीमारियों के इलाज में लगने वाली बड़ी रकम कई बार आपकी आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकती है.

ऐसे में जब भी आप हेल्थ इंश्योरेंस लें तो इस बात का खास ख्याल रखें कि उसमें क्रिटिकल इलनेस भी कवर हो. चलिए, अब समझते हैं कि आखिर आम हेल्थ इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में क्या अंतर होता है.

हेल्थ इंश्योरेंस की अहमियत

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बेहद जरूरी हो गया है. बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और लगातार महंगे होते मेडिकल खर्चों के बीच यह आपकी आर्थिक सुरक्षा का मजबूत साधन है. अस्पताल में भर्ती से लेकर ओपीडी तक के खर्चों को हेल्थ इंश्योरेंस कवर करता है.

क्यों नहीं काफी सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी सभी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कवरेज दे. कई बार लंबे समय तक चलने वाले इलाज का खर्च सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस से पूरा नहीं हो पाता. ऐसे में सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना आपके लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है.

क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस की जरूरत

क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस उन गंभीर बीमारियों को कवर करता है, जो आपकी कमाई और जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं. इसमें बीमार पड़ने पर आपको एकमुश्त (लंपसम) राशि मिलती है, जिसे अस्पताल खर्च, घर के खर्च, लोन चुकाने या किसी भी जरूरत के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. खासतौर से कैंसर, स्ट्रोक, एंड-स्टेज किडनी फेल्योर और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों के लिए यह पॉलिसी बेहद जरूरी है.

कवरेज और प्रीमियम में फर्क

हेल्थ इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में कई बड़े अंतर हैं. हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम अधिक होता है और इसमें आप कई बार क्लेम कर सकते हैं. वहीं, क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस का प्रीमियम अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसमें जीवन भर केवल एक बार ही दावा किया जा सकता है.

नॉन-मेडिकल खर्चों का कवरेज

हेल्थ इंश्योरेंस केवल अस्पताल और इलाज से जुड़े खर्चों को कवर करता है. इसके विपरीत, क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस की एकमुश्त राशि नॉन-मेडिकल जरूरतों जैसे घर का खर्च या कर्ज चुकाने में भी काम आ सकती है. गंभीर बीमारी की वजह से अगर आपकी आमदनी प्रभावित हो जाए तो यह रकम आपके लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है.

दोनों पॉलिसियों का होना है जरूरी

हेल्थ इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस दोनों ही अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं. जहां हेल्थ इंश्योरेंस आपको अस्पताल के खर्च से बचाता है, वहीं क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी गंभीर बीमारियों से होने वाले भारी आर्थिक बोझ को कम करती है. वित्तीय सुरक्षा और भविष्य की मजबूती के लिए दोनों पॉलिसियों का होना बेहद जरूरी है.

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