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हेल्थ इंश्योरेंस आज की जरूरत है, लेकिन इसे खरीदते समय सबसे ज्यादातर लोग सबसे पहले ये देखते हैं कि कौन सी पॉलिसी सस्ती है. लेकिन कम प्रीमियम देखकर जो पॉलिसी आपको बढ़िया डील लग रही होती है, वो क्लेम के समय बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकती है. वजह है पॉलिसी के अंदर छुपे हुए क्लॉज, जिन्हें पढ़ना लोग भूल जाते हैं. अगर आप चाहते हैं कि जरूरत के समय पॉलिसी आपकी जेब पर भार न डाले, तो इन 5 क्लॉज को समझना बेहद जरूरी है. ये क्लॉज बताते हैं कि वास्तव में आपकी पॉलिसी कितनी दमदार है.
वेटिंग पीरियड वो समय होता है जिसके दौरान आप कुछ बीमारियों के लिए क्लेम नहीं कर सकते. कई लोग सोचते हैं कि पॉलिसी खरीदते ही कवरेज स्टार्ट हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है.
ज्यादातर पॉलिसियों में 30 से 90 दिन का वेटिंग पीरियड होता है. इस दौरान सिर्फ एक्सीडेंट की कंडीशन में ही क्लेम मिलता है. बाकी किसी बीमारी के मामले में क्लेम नहीं किया जा सकता.
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थायराइड आदि, तो उसका कवरेज आमतौर पर 2 से 4 साल बाद शुरू होता है.
मोतियाबिंद, हर्निया, घुटना प्रत्यारोपण जैसी बीमारियों पर भी 1–2 साल का वेटिंग पीरियड हो सकता है.
जब भी पॉलिसी खरीदें तो वेटिंग पीरियड के क्लॉज को बहुत ध्यान से पढ़ें और हमेशा कम वेटिंग पीरियड वाली पॉलिसी चुनें और अपने PED के बारे में कंपनी को ईमानदारी से बताएं.
सब-लिमिट उन खर्चों पर लगाई जाने वाली सीमा है जहां कंपनी तय करती है कि वो कितना भुगतान करेगी, बाकी आपको अपनी जेब से देना होगा.
आपकी पॉलिसी का कवरेज 5 लाख है. लेकिन मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए सब-लिमिट सिर्फ ₹30,000 है. अगर ऑपरेशन के बाद बिल ₹50,000 आता है, तो ₹20,000 आपको देना पड़ेगा.
पॉलिसी खरीदते समय इस क्लॉज को गलती से भी इग्नोर न करें क्योंकि ये सीधे आपकी जेब पर असर डालती है. ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें सब-लिमिट न हो या फिर काफी कम हो.
हेल्थ पॉलिसी का ये क्लॉज बताता है कि क्लेम की राशि में से कितना प्रतिशत आपको भरना है और कितना कंपनी भरेगी. जैसे मान लीजिए कि अगर आपकी पॉलिसी में 10% को-पेमेंट तय है और आपका हॉस्पिटल बिल ₹1,00,000 है, तो कंपनी आपको सिर्फ 90,000 रुपए देगी, बाकी 10,000 आपको अपनी जेब से भरने होंगे.
बिना को-पेमेंट वाली पॉलिसी चुनने की या फिर बहुत मिनिमम को-पेमेंट वाली पॉलिसी चुनने की कोशिश करें.
बहुत लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इससे क्लेम की आसानी तय होती है. अगर कंपनी के नेटवर्क में हॉस्पिटल कम हैं, तो आपको कैशलैस सुविधा नहीं मिलेगी और जेब से पैसा देना पड़ सकता है. अगर आपका शहर छोटा है या आपके आसपास चुनिंदा अस्पताल हैं, तो नेटवर्क का मजबूत होना बहुत जरूरी है. अक्सर कम प्रीमियम वाली पॉलिसियों का नेटवर्क छोटा होता है, जिससे कैशलेस सुविधा नहीं मिल पाती और जेब ढीली करनी पड़ती है.
अपने घर और ऑफिस के आसपास के नेटवर्क हॉस्पिटल्स की लिस्ट जरूर चेक करें.
हर पॉलिसी में कुछ चीजें शुरुआत से ही कवर नहीं होतीं. इन्हें समझना बेहद जरूरी है.
कुछ चीजें स्थायी रूप से बाहर होती हैं जैसे कॉस्मेटिक सर्जरी, जानबूझकर खुद को पहुंचाई गई चोट, एड्स, युद्ध या परमाणु हमले से हुई बीमारियां आदि.
इसमें वेटिंग पीरियड वाली बीमारियां शामिल होती हैं. इसके अलावा, वैकल्पिक उपचार जैसे एक्यूप्रेशर, नेचुरोपैथी आदि भी ज्यादातर पॉलिसियों में कवर नहीं होते हैं.
पॉलिसी डॉक्यूमेंट में एक्सक्लूजन की लिस्ट को ध्यान से पढ़ें. इससे आपको पता रहेगा कि किन चीजों के लिए आपको क्लेम नहीं मिलेगा.
जरूरी नहीं कि हर सस्ती पॉलिसी खराब हो, लेकिन कम प्रीमियम में सब-लिमिट, को-पेमेंट और ज्यादा वेटिंग पीरियड छुपा होता है.
वेटिंग पीरियड और सब-लिमिट सबसे जरूरी हैं.
कुछ पॉलिसियों में एक्स्ट्रा प्रीमियम देकर हटाया जा सकता है, लेकिन हर पॉलिसी में नहीं.
हां, PED छिपाना क्लेम रिजेक्शन का सबसे बड़ा कारण है.