जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने किया AHPI का विरोध- 'कैशलेस क्लेम ना देने का फैसला लें वापस, मरीजों को होगी दिक्कत'

काउंसिल ने याद दिलाया कि 2023-24 में बीमाकर्ताओं ने 87,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम सेटल किए हैं और AHPI से अपील की है कि वह अपना फैसला तुरंत वापस ले ताकि सभी पॉलिसीधारकों को कैशलेस सुविधा मिलती रहे.
जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने किया AHPI का विरोध- 'कैशलेस क्लेम ना देने का फैसला लें वापस, मरीजों को होगी दिक्कत'

Association of Healthcare Providers of India यानी AHPI ने ऐलान किया है कि वह Bajaj Allianz और Care Health Insurance की पॉलिसियों पर कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन सुविधा को रोक रहा है. इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कैशलेस सुविधा न होने पर मरीजों को इलाज के वक्त भारी रकम अपनी जेब से चुकानी पड़ सकती है.

इस फैसले का जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) ने कड़ा विरोध किया है. काउंसिल का कहना है कि नागरिकों के हित सबसे अहम हैं और कैशलेस सेवा बाधित होने से मरीजों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ और जोखिम बढ़ेगा. काउंसिल ने याद दिलाया कि 2023-24 में बीमाकर्ताओं ने 87,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम सेटल किए हैं और AHPI से अपील की है कि वह अपना फैसला तुरंत वापस ले ताकि सभी पॉलिसीधारकों को कैशलेस सुविधा मिलती रहे.

क्यों उठाया गया यह कदम?

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AHPI के डायरेक्टर जनरल डॉ. गिर्धर ग्यानी के मुताबिक, भारत में मेडिकल इंफ्लेशन हर साल 7-8% के बीच रहता है. इसमें स्टाफ सैलरी, दवाइयां, मेडिकल उपकरण, बिजली-पानी और अन्य खर्च शामिल हैं. लेकिन Bajaj Allianz जैसे इंश्योरर पुराने टैरिफ रेट्स पर अड़े हुए हैं और हर दो साल पर रिव्यू की मांग को भी खारिज कर रहे हैं. इससे अस्पतालों का कहना है कि मरीजों की बेहतर सेवा प्रभावित हो सकती है.

अस्पतालों की शिकायतें

AHPI के सदस्य अस्पतालों ने इंश्योरेंस कंपनियों पर कई आरोप लगाए हैं:

  • पुराने टैरिफ पर भुगतान का दबाव
  • क्लेम सेटलमेंट में देरी
  • डिस्चार्ज अप्रूवल में लंबा इंतजार
  • लगातार टैरिफ कटौती की मांग

Bajaj Allianz की प्रतिक्रिया

Bajaj Allianz ने कहा- हमने हमेशा देश के नागरिकों के भले के लिए काम किया है और किसी भी तरह का दबाव हमें झुका नहीं सकता. हमारे किसी भी ग्राहक को नुकसान नहीं होगा. अभी तक हमें कैशलेस इलाज से मना किए जाने का एक भी मामला नहीं मिला है, लेकिन अगर ऐसा होता भी है तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राहक को अस्पताल को पैसा देने से पहले ही उसके अकाउंट में रकम पहुंचा दी जाए.

इसके अलावा, एलायंज के सूत्रों का कहना है कि यह वही कीमत है जो हमें चुकानी पड़ रही है क्योंकि तपन, जो काउंसिल के हेड हैं, अस्पतालों में प्राइसिंग को नियमित करने की कोशिश कर रहे हैं. बातचीत की अगली बैठक 28 तारीख को होने वाली है.

CARE Health की स्थिति

CARE Health Insurance के COO मनीष दोदेजा ने कहा कि उन्हें 22 अगस्त को AHPI का ईमेल मिला, लेकिन उसमें न तो किसी खास अस्पताल का नाम था और न ही क्लेम से जुड़ी कोई डिटेल. CARE का कहना है कि उनके नेटवर्क अस्पतालों ने ऐसी कोई बड़ी शिकायत दर्ज नहीं कराई है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब CARE विवादों में है. फरवरी 2025 में CARE ने दिल्ली-एनसीआर के Max Hospitals में कैशलेस सुविधा बंद कर दी थी, जो अब तक बहाल नहीं हुई है.

उत्तर भारत में असर कितना बड़ा?

AHPI का नेटवर्क उत्तर भारत में काफी बड़ा है. केवल उत्तर भारत में ही 2,500 से ज्यादा अस्पताल इस फैसले से प्रभावित होंगे. दिल्ली-एनसीआर में इसके 615 अस्पताल, पंजाब में 511 अस्पताल, उत्तराखंड में 242 अस्पताल और यूपी में 1220 अस्पताल हैं.

क्लेम सेटलमेंट का डेटा क्या कहता है?

IRDAI की 2023-24 रिपोर्ट के मुताबिक Bajaj Allianz का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो 95.99% है और CARE Health का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो 92.77% है. यानी दोनों कंपनियां ज्यादातर क्लेम का भुगतान करती हैं, लेकिन फिर भी अस्पतालों के साथ विवाद बना हुआ है.

मरीजों पर क्या असर होगा?

अगर यह फैसला लागू होता है तो Bajaj Allianz और CARE Health पॉलिसीधारकों को अस्पताल में भर्ती होने पर पूरा खर्च अपनी जेब से देना होगा. बाद में इंश्योरेंस कंपनी से रीइम्बर्समेंट लेना पड़ेगा, जिसमें समय भी लग सकता है.

इस हफ्ते होगी अहम बैठक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हफ्ते AHPI की CARE Health और Bajaj Allianz के साथ अलग-अलग मीटिंग्स तय हैं.

  • बुधवार को CARE Health के साथ बैठक
  • गुरुवार को Bajaj Allianz के साथ बातचीत
  • 28 अगस्त को भी एक नेगोशिएशन मीटिंग रखी गई है, जिसमें समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है.

Conclusion

यह मामला सिर्फ अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने हेल्थ पॉलिसी खरीदी है. कैशलेस सुविधा बंद होना मरीजों की सबसे बड़ी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि इमरजेंसी में तुरंत जेब से पैसा निकालना सबके लिए संभव नहीं होता. अब नजर इस बात पर है कि 28 अगस्त की बैठक में क्या कोई रास्ता निकल पाता है या नहीं.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या 1 सितंबर से Bajaj Allianz का कैशलेस इलाज पूरी तरह बंद हो जाएगा?

अगर बातचीत विफल रही तो हां, AHPI नेटवर्क में कैशलेस सुविधा बंद हो जाएगी.

2. CARE Health के ग्राहकों पर असर होगा या नहीं?

अगर CARE जवाब नहीं देती तो उनके ग्राहकों के लिए भी कैशलेस सुविधा बंद हो सकती है.

3. मरीज को क्या करना होगा अगर कैशलेस सुविधा बंद हो गई?

मरीज को जेब से बिल चुकाना होगा और बाद में रीइम्बर्समेंट के लिए क्लेम फाइल करना होगा.

4. क्या सभी अस्पतालों में यह लागू होगा?

सिर्फ AHPI से जुड़े अस्पतालों में, जो उत्तर भारत में 2,500 से ज्यादा हैं.

5. क्या सरकार इसमें दखल दे सकती है?

फिलहाल यह निजी संस्थाओं का मामला है, लेकिन IRDAI जैसी नियामक संस्था इसमें मध्यस्थता कर सकती है.

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