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भारत एक ऐसा देश है जहां हमेशा से सीनियर सिटीजन को परिवार की नींव माना जाता है. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ सेहत का ख्याल रखना अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है.यह कारण है कि टाइम रहते सीनियर सिटीजन्स के लिए एक सही हेल्थ इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी होता है. असल में उनके लिए 'हेल्थ इंश्योरेंस' महज एक पॉलिसी नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच होता है.
कछ टाइम पहले बीमा नियामक IRDAI ने सीनियर सिटीजन के लिए नया तोहफा पेश किया जिसने हेल्थ इंश्योरेंस की तस्वीर को बदलने का का किया है.असल में अब 65 साल के बाद भी आप नई पॉलिसी ले सकते हैं. तो आइए समझते हैं सीनियर सिटीजन के लिए इंश्योरेंस कैसे लिए जाए.
एक टाइम ऐसा था जब 65 साल की उम्र पार करने के बाद नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना लगभग नामुमकिन था. लेकिन अब IRDAI ने प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा को हटा दिया है.ऐसे में अब किसी भी उम्र का व्यक्ति अपने लिए नया हेल्थ कवर खरीद सकता है.जी हां एक बार पॉलिसी लेने के बाद आप इसे पूरी लाइफ रिन्यू करा सकते हैं.इसके लिए बैंक या बीमा कंपनी अब आपको मना नहीं कर सकती.
सीनियर सिटीजन के लिए सबसे बड़ी टेंशन 'वेटिंग पीरियड' होती थी. यानी कि पहले से मौजूद बीमारियों (जैसे बीपी, शुगर) के लिए 4-5 साल तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब किसी भी बीमारी के लिए वेटिंग पीरियड अधिकतम 36 महीने (3 साल) तक सीमित कर दिया गया है.लेकिन कुछ कंपनियां तो अब केवल 12 महीने के वेटिंग पीरियड पर भी पॉलिसी दे रही हैं, हालांकि इसके लिए आपको थोड़ा ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है.
आजकल घर के बहुत से बुजुर्ग एलोपैथी की जगह आयुर्वेद, यूनानी या होम्योपैथी (AYUSH) पर ज्यादा भरोसा करते हैं.तो अब आपकी बीमा पॉलिसी में इन सभी ऑप्शन इलाजों का खर्च भी कवर हो सकता है. असल में आपको अस्पताल के चक्कर काटने की जरूरत नहीं, अगर आप रजिस्टर्ड आयुष केंद्र में इलाज कराते हैं, तो बीमा कंपनी उसका भुगतान करेगी.
अगर आप अपने माता-पिता या खुद के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रहे हैं, तो इन पॉइंट्स को कभी ना भूलें-
प्री-मेडिकल टेस्ट: बीमा कंपनी पॉलिसी देने से पहले मेडिकल चेकअप करावाएं कोई बीमारी है तो कभी न छुपाएं. अपनी मेडिकल हिस्ट्री पूरी तरह सच बताएं ताकि क्लेम के समय कोई परेशानी ना आए.
मॉड्यूलर प्लान: आजकल ऐसी योजनाएं हैं जहां आप अपनी जरूरत के हिसाब से कोई भी कवर चुन सकते हैं. यानी कि आपको केवल उसी बीमारी के कवर के लिए पैसे देने हैं जिसका रिस्क आपको ज्यादा है. जी हां इससे प्रीमियम भी कम हो जाता है.
हेल्थ इन्फ्लेशन: अस्पताल के खर्च हर साल करीब 10-15% बढ़ रहे हैं. तो आप ऐसी पॉलिसी चुनें जो हर साल आपकी बीमा राशि (Sum Insured) को थोड़ा बढ़ा दे (इसे नो क्लेम बोनस या टॉप-अप भी कहते हैं).

सीनियर सिटीजन के लिए प्रीमियम अक्सर थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन इसे स्मार्ट तरीके से कम किया जा सकता है-
को-पेमेंट (Co-payment): जी हां आप कंपनी के साथ डील कर सकते हैं कि बिल का करीब 10% या 20% हिस्सा आप खुद देंगे. इससे आपका सालाना प्रीमियम काफी गिर जाता है.
डिडक्टिबल: एक लिमिट तय कर लें कि शुरुआती ₹20,000 या ₹50,000 आप देंगे, उसके ऊपर का सारा खर्च कंपनी उठाएगी. यह ऑप्शन भी प्रीमियम बचाने में मदद करता है.
हेल्थ बीमा केवल बीमारी का खर्च नहीं उठाता है, बल्कि मुश्किल समय में आपके परिवार को फाइनेंशियल टेंशन से भी बचाता है. IRDAI के नियम अब ग्राहकों को पहले से कहीं ज्यादा मजबूती देते हैं. अगर आपके घर में बुजुर्ग हैं, तो आज ही उनकी पॉलिसी के डाक्यूमेंट्स चेक करें या एक नया 'कस्टमर-फ्रेंडली' प्लान लें. आप याद रखिए, सही समय पर लिया गया बीमा बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा होता है.(नोट:नोट खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी इंश्योरेंस कंपनी या एजेंट से संपर्क करें)

खबर से जुड़े FAQs
Q1. क्या 65 साल के बाद भी नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली जा सकती है?
हाँ। IRDAI ने एंट्री एज लिमिट हटा दी है, अब किसी भी उम्र में नई पॉलिसी खरीदी जा सकती है.
Q2. सीनियर सिटीजन के लिए वेटिंग पीरियड कितना होता है?
अब अधिकतम 36 महीने। कुछ कंपनियां 12 महीने का ऑप्शन भी देती हैं.
Q3. क्या आयुर्वेद और होम्योपैथी इलाज बीमा में कवर होता है?
हाँ। IRDAI के नियमों के तहत AYUSH इलाज भी हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल है.
Q4. सीनियर सिटीजन प्रीमियम कैसे कम कर सकते हैं?
को-पेमेंट और डिडक्टिबल चुनकर प्रीमियम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
Q5. पॉलिसी लेते समय सबसे जरूरी बात क्या है?
मेडिकल हिस्ट्री पूरी तरह सही बताना, ताकि क्लेम के समय कोई परेशानी न आए.
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