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अब सिर्फ बैंकिंग सेक्टर ही नहीं, बल्कि इंश्योरेंस सेक्टर भी क्रेडिट स्कोर से जुड़ने की तैयारी में है. जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया ने बीमा सेक्टर को भी CIBIL जैसी स्कोरिंग प्रणाली से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यानी इंश्योरेंस सेक्टर में भी अब सिबिल जैसा एक स्कोर होगा, जिसके आधार पर आपके इंश्योरेंस का प्रीमियम तय होगा.
मतलब साफ है कि अगर आपने कभी इंश्योरेंस में फ्रॉड किया है, तो अगली पॉलिसी मिलना मुश्किल हो सकता है या प्रीमियम ज़्यादा देना पड़ सकता है. साथ ही आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन लेना भी महंगा साबित हो सकता है. इंश्योरेंस सेक्टर में सिबिल जैसी व्यवस्था शुरू होने से बड़ी पारदर्शिता आ सकती है.
बैंकिंग क्षेत्र में CIBIL स्कोर के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कोई व्यक्ति अगर लोन लेता है तो उसे चुकता करने की कितनी क्षमता रखता है. इसी तरह, बीमा कंपनियां भी एक ऐसा सिस्टम चाहती हैं जिससे यह पता चले कि कौन-कौन लोग बार-बार फर्जी बीमा दावे कर रहे हैं. ताकि न सिर्फ उनका फर्जी क्लेम पकड़ा जाये बल्कि उनका प्रीमियम बढाने जैसी सजा दी जाये.
हर साल बीमा कंपनियों को ₹12,000-15,000 करोड़ का नुकसान फर्जी दावों की वजह से होता है. कुल बीमा दावों में से 10-15% में धोखाधड़ी पाई जाती है. इसकी वजह से ईमानदार ग्राहकों का प्रीमियम 18-22% तक बढ़ जाता है. बीमा कंपनियां अपने स्तर पर फर्जी दावों को रोकने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बिना किसी संगठित और पारदर्शी सिस्टम के यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
बीमा सिर्फ एक वित्तीय उत्पाद नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत और सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत साधन है.
अगर बीमा क्षेत्र में CIBIL जैसी प्रणाली लागू होती है, तो इससे न केवल फर्जी दावों पर रोक लगेगी, बल्कि सही ग्राहकों को भी फायदा मिलेगा. इससे बीमा उद्योग अधिक पारदर्शी बनेगा और भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी. सही दावों का भुगतान जल्द होगा, जिससे लोग बीमा को अपनी वित्तीय योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाएंगे.