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इंश्योरेंस (Insurance) आज के समय में बेहद खास मायने रखता है. भविष्य में खुद की और परिजनों की आर्थिक सुरक्षा देने में यह काफी मददगार होता है. कई बार किसी वजह से समय पर प्रीमियम नहीं चुकाने से इंश्योरेंस पॉलिसी (Insurance Policy) लैप्स भी हो जाती है. प्रीमियम चुकाने के कई ऑप्शन हैं. इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम पेमेंट के लिए सालाना, छमाही और तिमाही आधार पर भी ऑप्शन देती हैं. हालांकि अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी अलग हो सकती है. इंश्योरेंस पॉलिसी में समय पर प्रीमियम पेमेंट करना खास मायने रखता है.
उठाना पड़ता है यह नुकसान
कब होती है पॉलिसी लैप्स
कंपनियां प्रीमियम चुकाने के लिए 30 दिनों का एक्स्ट्रा समय देती हैं. आपको निश्चित तारीख पर या अतिरिक्त समय के अन्दर तय प्रीमियम राशि चुका देनी होती है. अगर किसी वजह से आप इस समयसीमा से चूक जाते हैं तो आपकी पॉलिसी लैप्स मानी जाती है. यूलिप (यूनिक लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) में अगर आप पहले पांच साल तक या लॉक इन पीरियड में प्रीमियम नहीं चुकाते हैं तो पॉलिसी लैप्स मानी जाएगी. इससे आप इंश्योरेंस का फायदा नहीं ले पाएंगे.
नई और रिवाइव्ड पॉलिसी
इंश्योरेंस पॉलिसी को रिवाइव करने के आप्शन भी मिलते हैं. लेकिन नई और रिवाइव्ड इंश्योरेंस पॉलिसी की लागत में अंतर आ जाता है. उदाहरण के लिए अगर कोई 25 साल का इंसान एक टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदता है और सालाना 6,000 रुपए प्रीमियम दो साल तक देता है.
यानी वह दो साल में 12,000 रुपए देता है. लेकिन अगले दो साल बाद अगर उसकी पॉलिसी प्रीमियम न चुकाने से लैप्स हो जाती है और अब वह दो साल बाद उसे रिवाइव कराना चाहता है तो इंश्योरेंस कंपनी उससे रिन्युअल फीस, लेट फीस और ब्याज लेगी और यह राशि करीब 18,000 रुपए हो जाएगी.
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वहीं इंसान जो अब 29 साल का है और वह किसी दूसरी इंश्योरेंस कंपनी से नई पॉलिसी खरीदना चाहता है तो उसे यह महंगा पड़ेगा. अब नई पॉलिसी का सालाना प्रीमियम करीब 8,000 रुपये है. ऐसे में वह पुरानी पॉलिसी के एवज में चुका रहे प्रीमियम की तुलना में 2000 रुपए ज्यादा चुका रहा होगा. यानी पॉलिसी लैप्स होने से उसपर प्रीमियम का भार ज्यादा हो जाएगा.