प्रीमियम भरा, पर क्लेम के वक्त मिला 'धोखा'! आपकी ये 5 गलतियां बीमा कंपनी को देती हैं पैसा लूटने का मौका

बीमा क्लेम रिजेक्शन से बचना चाहते हैं? तो जानिए वो आम कारण जिनकी अनदेखी करने से कंपनियां क्लेम खारिज कर देती हैं. सही जानकारी और सावधानी से आप अपना क्लेम आसानी से पास करवा सकते हैं.
प्रीमियम भरा, पर क्लेम के वक्त मिला 'धोखा'! आपकी ये 5 गलतियां बीमा कंपनी को देती हैं पैसा लूटने का मौका

बीमा पॉलिसी लेना अपने और अपने परिवार की फाइनेंशियल सेफ्टी के लिए एक अहम कदम है. चाहे वह हेल्थ बीमा हो, जीवन बीमा हो या कार बीमा, हम एक प्रीमियम का पेमेंट इस भरोसे के साथ करते हैं कि जरूरत पड़ने पर हमें कवरेज मिलेगा. लेकिन, कई बार ऐसा भी होता है कि मुश्किल के समय में हमारा क्लेम खारिज हो जाता है, जिससे हमें भारी फाइनेंशियल नुकसान उठाना पड़ता है.असल में अधिकांश क्लेम खारिज होने के पीछे कुछ आम कारण होते हैं, जिनसे आसानी से बचा जा सकता है. तो आइए जानते हैं बीमा क्लेम खारिज होने के प्रमुख कारण क्या हैं और उनसे बचने के आसान तरीके.

बीमा क्लेम खारिज होने के 5 प्रमुख कारण:

1. गलत या अधूरी जानकारी देना

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क्या होता है: गलत या अधूरी जानकारी देना क्लेम रिजेक्शन का सबसे आम कारण है. हमेशा पॉलिसी खरीदते समय लोग अक्सर अपनी उम्र, आय, पेशे, या स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारी (जैसे धूम्रपान या शराब पीने की आदत) को गलत बताते हैं या छिपा लेते हैं.

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क्यों खारिज होता है: असल में बीमा कंपनियां आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही आपके लिए प्रीमियम और रिस्क का आकलन करती हैं. अगर बाद में जांच में यह पाया जाता है कि आपने कोई जानकारी छिपाई थी या गलत दी थी, तो कंपनी इसे 'गलत बयानी' मानकर क्लेम खारिज कर सकती है.

2. पहले से मौजूद बीमारी का खुलासा न करना

क्या होता है: असल में हमेशा पॉलिसी लेते समय यदि आपको पहले से ही कोई बीमारी है (जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड), तो उसे बीमा आवेदन फॉर्म में बताना जरूरी होता है. कई लोग प्रीमियम बढ़ने के डर से इसका खुलासा नहीं करते हैं.
क्यों खारिज होता है: तो अगर आप बाद में उसी बीमारी के इलाज के लिए क्लेम करेंगे, तो बीमा कंपनी इसे आसानी से पता लगा लेती है और क्लेम को सीधे तौर पर खारिज कर सकती है. कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में पहले से मौजूद बीमारियों के लिए एक वेटिंग पीरियड होती है, जिसके बाद ही कवरेज मिलता है.

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3. पॉलिसी नवीनीकरण में देरी

क्या होता है: अगर आप टाइम पर अपनी पॉलिसी का प्रीमियम नहीं भरते हैं, तो फिर पॉलिसी लैप्स (बंद) हो जाती है. असल में बीमा कंपनियां आमतौर पर प्रीमियम भरने के लिए एक ग्रेस पीरियड यानी कुछ एक्स्ट्रा दिन देती हैं.
क्यों खारिज होता है: अगर पॉलिसीधारक की डेथ या कोई मेडिकल इमरजेंसी ग्रेस पीरियड के बाद होती है और पॉलिसी लैप्स हो चुकी है, तो बीमा कंपनी क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर देती है.

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4. क्लेम की सूचना देने में देरी


क्या होता है: बीमा पॉलिसी में क्लेम की घटना होने पर (जैसे अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु के मामले में) बीमा कंपनी को एक तय समय-सीमा के अंदर सूचित करना जरूरी होता है. यह समय सीमा आमतौर पर 24 से 48 घंटे होती है.
क्यों खारिज होता है: यदि आप बिना किसी वैध कारण के बीमा कंपनी को समय पर सूचना नहीं देते हैं, तो कंपनी आपके क्लेम को खारिज कर सकती है क्योंकि इससे उसे जांच करने और जरूरी कार्रवाई करने में देरी होती है.

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5. पॉलिसी की शर्तों को न समझना


क्या होता है: बहुत से लोग पॉलिसी खरीदते समय पूरे डाक्यूमेंट्स को नहीं पढ़ते हैं. वे अक्सर एजेंट पर निर्भर रहते हैं और पॉलिसी के नियमों व शर्तों से अनजान रहते हैं.
क्यों खारिज होता है: हर पॉलिसी में कुछ खास चीजें शामिल नहीं होतीं . जैसे कि, कॉस्मेटिक सर्जरी, युद्ध से जुड़ी चोटें, या कुछ खास बीमारियों के लिए एक खास वेटिग पीरियड हो सकती है. यदि आप ऐसे समय के लिए क्लेम करते हैं जो आपकी पॉलिसी में कवर नहीं है, तो वह खारिज हो जाएगा.

क्लेम रिजेक्शन से बचने के आसान तरीके

1. फॉर्म ध्यान से भरें: हमेशा अपने पॉलिसी आवेदन फॉर्म को खुद भरें और सभी जानकारी (उम्र, स्वास्थ्य इतिहास, जीवनशैली की आदतें) पूरी ईमानदारी और सही देना चाहिए.

2. पॉलिसी डॉक्यूमेंट पढ़ें: पॉलिसी खरीदते ही उसके डाक्यूटमेंट्स को ध्यान से पढ़ें. कवरेज, एक्सक्लूज़न , वेटिंग पीरियड और क्लेम प्रोसेस के बारे में पूरी जानकारी लें.

3. समय पर प्रीमियम भरें: अपनी पॉलिसी को लैप्स होने से बचाने के लिए प्रीमियम का भुगतान टाइम पर करना चाहिए. इसके लिए आप ऑटोमैटिक पेमेंट या रिमाइंडर सेट कर सकते हैं.

4. सभी डाक्यूमेंट्स संभाल कर रखें: अस्पताल में भर्ती होने पर या किसी दुर्घटना के मामले में सभी मेडिकल बिल, रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और डिस्चार्ज समरी जैसे डाक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखें, क्योंकि क्लेम फाइल करते समय इनकी जरूरत होती है.

5. समय पर सूचना दें: क्लेम की घटना होते ही, बीमा कंपनी या उनके थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचित करें.

तो यह साफ है कि बीमा क्लेम खारिज होने के अधिकतर मामलों को सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से टाला जा सकता है. तो हमेशा एक जिम्मेदार पॉलिसीधारक बनकर, आप न केवल अपने प्रीमियम का सही मूल्य प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि मुश्किल के समय में खुद और अपने परिवार के लिए फाइनेंशियल सेफ्टी भी तय कर सकते हैं.(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)

FAQ

1. बीमा क्लेम रिजेक्ट क्यों हो जाता है?
जवाब: बीमा क्लेम आमतौर पर गलत जानकारी, डॉक्यूमेंटेशन की कमी, समय पर क्लेम न करना या पॉलिसी की शर्तों की अनदेखी के कारण रिजेक्ट हो सकता है.

2. हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
जवाब: पहले से मौजूद बीमारी (pre-existing condition) की जानकारी न देना या नेटवर्क अस्पताल में इलाज न कराना बड़ी वजह होती है.

3. बीमा क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचा जा सकता है?
जवाब: सही जानकारी देना, पॉलिसी की शर्तें पढ़ना, समय पर डॉक्यूमेंट सबमिट करना और क्लेम प्रक्रिया को ठीक से समझना जरूरी है.

4. क्या सभी प्रकार के बीमा में क्लेम रिजेक्शन के कारण एक जैसे होते हैं?
जवाब: नहीं, हेल्थ, लाइफ और वाहन बीमा में अलग-अलग क्लेम प्रक्रिया और नियम होते हैं, लेकिन गलत जानकारी देना सभी में आम कारण है.

5. क्या बीमा क्लेम रिजेक्ट होने पर दोबारा अपील की जा सकती है?
जवाब: हां, आप बीमा कंपनी में री-एवैल्यूएशन की रिक्वेस्ट कर सकते हैं और यदि जरूरी हो तो बीमा लोकपाल या उपभोक्ता फोरम में शिकायत भी कर सकते हैं.

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