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आज भी जब कोई करोड़ शब्द सुनता है तो उनकी आंखों में अलग ही चमक आ जाती है.असल में बचपन से फिल्मों, खबरों और आस-पास बुनने वाले सपनों में "1 करोड़" एक जादुई टारगेट हमेशा घूमता रहता है.वैसे बहुत से लोग रिटायरमेंट की प्लानिंग को बनाते टाइम मानते हैं कि अगर 60 की उम्र तक 1 करोड़ रुपए जमा हो जाए, तो आगे की लाइफ आराम से निकल जाएगी. लेकिन असल तस्वीर आज के समय में बिल्कुल अलग है, क्योंकि पैसा एक जगह स्थिर नहीं रहता, उसकी वैल्यू टाइम के साथ बदलती है और इसे बदलने वाला सबसे बड़ा कारण है महंगाई (Inflation).
असल में महंगाई एक ऐसा चुपचाप चलने वाला प्रोसेस है, जो हर साल आपके पैसों की हकीकत कीमत को कम कर देती है.वैसे तो इसका असर एक–दो साल में नहीं दिखता है, लेकिन 10 से 20 साल बाद यह आपके लाइफस्टाइल, प्लानिंग को पूरी तरह बदल सकता है.
जैसे कि एक उदाहरण के रूप में समझ लेते हैं कि अगर सरकार द्वारा पेश किए औसत आंकड़ों के मुताबिक भारत में महंगाई दर सालाना करीब-करीब 5% मान ली जाए, तो आज का ₹1,00,00,000 (1 करोड़) आने वाले 10 साल बाद केवल ₹61,37,000 के बराबर ही रहेगा. यानी कि जितना आपको आज 1 करोड़ से आराम महसूस होता है, वही राहत फ्यूचर में आपको करीब 61 लाख से भी नहीं मिलेगी.वहीं, दूसरी तरफ, जो चीज आज 1 करोड़ में मिलती है-वही चीज 10 साल बाद करीब ₹1.62 करोड़ में मिल जाएगी. यह अंतर बताता है कि पैसा कागज पर भले बढ़े, लेकिन असली वैल्यू तो कम होता जा रही है.
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जैसे की 10 साल पहले, बड़े शहरों में 1 करोड़ में 4BHK फ्लैट मिल जाता था.लेकिन आज वही फ्लैट 2 करोड़ रुपए से अधिक में बिक रहा है.इससे ना आपका घर बड़ा हुआ, ना लोकेशन बदली बस बदली तो केवल आपके पैसे की वैल्यू.तो यही महंगाई का असर है जो चुपचाप, धीरे-धीरे आपकी जेब पर बोझ बढ़ाता है.
तो सोचिए अगर आप 50 साल के हैं और 60 पर रिटायर होने वाले हैं,तो आज आपको लगता है कि 1 करोड़ से:
मेडिकल खर्च
बच्चों की शिक्षा,शादी
घर का मेंटेनेंस
दवाइयां और बीमा
रोजमर्रा की जिंदगी सब कुछ चल जाएगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि 10 साल बाद-
दवाइयाँ और अस्पताल बिल दोगुने हो सकते हैं.
कॉलेज फीस हर साल बढ़ ही रही है.
घरेलू खर्च, इंश्योरेंस प्रीमियम, बिजली,पानी,किराया सब लगातार बढ़ते जाएंगे.
साफ है कि अगर आपने रिटायरमेंट प्लान में महंगाई का असर शामिल नहीं किया, तो आपके सपने आधे रास्ते में रुक सकते हैं.
बहुत से लोग अभी भी ये सोचते हैं कि FD करा लो, पैसे सुरक्षित रहेंगे.लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर बैंक FDs केवल करीब 5–7% रिटर्न देती हैं, जबकि महंगाई औसतन 5% तक रहती है.तो साफ है कि आपका पैसा बस नाममात्र बढ़ता है,असल में उसके पैसे की ताकत घटती जाती है.तो इसलिए केवल सेविंग्स काफी नहीं है. आपके लिए ऐसा इन्वेस्टमेंट जरूरी है जो महंगाई के मुकाबले तेजी से बढ़े और आपकी असल क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाए.
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भारत में लंबे समय में कुछ इन्वेस्टमेंट ऑप्शन ऐसे साबित हुए हैं जो बेहतर रिटर्न दे सकते हैं:
साफ है कि इन्वेस्टमेंट का मंत्र यही है कि रिस्क से भागना नहीं है, बल्कि समझदारी से लॉन्ग–टर्म जोखिम लेना है ताकि आपका पैसा महंगाई को पीछे छोड़ सके.
सबसे बड़ी गलती यह है कि केवल राशि का टारगेट बनाना. असल में "1 करोड़" सुनने में अच्छा लगता है लेकिन मायने यह रखता है कि फ्यूचर में यह आपको क्या दिला पाएगा. हम महंगाई को तो रोक नहीं सकते हैं लेकिन असर को कम कर सकते हैं, अगर निवेश महंगाई से तेज दौड़ सके. ऐसे में जितनी जल्दी आप अपने फाइनेंशियल टारगेट तो महंगाई के साथ शामिल करेंगे उतनी ही बेहतर सुरक्षा, सम्मान और जीवनस्तर आप आने वाले सालों में महसूस करेंगे.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)
खबर से जुड़े FAQs-महंगाई और 1 करोड़ की भविष्य कीमत से जुड़े आम सवाल
Q1. क्या 1 करोड़ रुपए रिटायरमेंट के लिए आज की तारीख में पर्याप्त हैं?
A: वर्तमान में यह रकम बड़ी लग सकती है, लेकिन महंगाई के चलते 10 साल बाद इसकी वास्तविक कीमत लगभग 61 लाख के बराबर रह जाएगी.
Q2. 10 साल बाद 1 करोड़ रुपए की कीमत कैसे घट जाती है?
A: महंगाई (Inflation) हर साल पैसों की क्रय-शक्ति घटाती है. औसत 5% महंगाई मानें, तो पैसे की वैल्यू धीरे-धीरे गिरती है और 10 साल बाद 1 करोड़ की असली कीमत लगभग 61 लाख रह जाती है.
Q3. महंगाई को हराने के लिए किन निवेश विकल्पों का चुनाव करना चाहिए?
A: इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, NPS, हाइब्रिड फंड्स और गोल्ड जैसे विकल्प लंबे समय में महंगाई से तेज़ रिटर्न देते हैं और वास्तविक संपत्ति बढ़ाने में मदद करते हैं.
Q4. क्या सेविंग अकाउंट और FD रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित विकल्प हैं?
A: ये विकल्प सुरक्षित तो हैं, लेकिन अक्सर 5–7% ब्याज ही देते हैं, जो महंगाई के बराबर या उससे कम होता है.तो केवल FD और बचत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता.
Q5. क्या रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय महंगाई को शामिल करना जरूरी है?
A: हां, यह सबसे महत्वपूर्ण है. अगर निवेश महंगाई की दर से तेज़ नहीं बढ़ रहा, तो भविष्य में आपकी जीवनशैली और आर्थिक सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
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