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सोने की चमक ने बदला कर्ज का बाजार.
भारत में जब भी किसी को अचानक पैसे की जरूरत पड़ती है, तो सबसे पहले घर में रखे सोने की याद आती है. लेकिन अब यह सिर्फ मजबूरी का सौदा नहीं रह गया है, बल्कि एक बहुत ही समझदारी वाला फैसला बन चुका है. ट्रांसयूनियन सिबिल की ताजा रिपोर्ट ने इस बात पर पक्की मुहर लगा दी है. साल 2026 की शुरुआत में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे वाकई हैरान करने वाले हैं. आज भारत के रिटेल क्रेडिट मार्केट यानी कर्ज के बाजार में गोल्ड लोन सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है.
आंकड़ों की बात करें तो कुल लोन की संख्या यानी वॉल्यूम में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 56 परसेंट तक पहुंच गई है, जबकि कुल रकम यानी वैल्यू के हिसाब से यह करीब 40 परसेंट है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक हर कोई सोने के बदले पैसा लेने को तैयार है? इसकी सबसे बड़ी वजह है सोने की लगातार बढ़ती कीमतें और लोगों का सुरक्षित कर्ज यानी 'सिक्योर्ड बॉरोइंग' की तरफ बढ़ता भरोसा. लोग अब समझ गए हैं कि लॉकर में रखे सोने की वैल्यू को निकालकर अपनी जरूरतों को पूरा करना कितना आसान और फायदेमंद है.
इस रिपोर्ट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब लोग पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ी रकम का लोन ले रहे हैं. पिछले दो सालों में गोल्ड लोन के एवरेज टिकट साइज यानी औसत लोन की रकम में भारी बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर 2025 वाली तिमाही तक आते-आते औसतन एक गोल्ड लोन करीब 1.9 लाख रुपये का हो गया है.
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इसका सीधा सा मतलब यह है कि लोग अब सिर्फ छोटी-मोटी जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि बिजनेस बढ़ाने या किसी बड़े पर्सनल काम के लिए भी अपने सोने का इस्तेमाल कर रहे हैं. सोने की आसमान छूती कीमतों ने ग्राहकों को यह भरोसा दिया है कि वे अपनी पुरानी होल्डिंग से अच्छी खासी रकम निकाल सकते हैं. यही वजह है कि लोन की डिमांड और उसे बांटने यानी डिस्बर्समेंट की रफ्तार लगातार बढ़ रही है.
किसी भी देश की इकोनॉमी कैसी चल रही है, उसे नापने का एक बड़ा पैमाना होता है कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर यानी CMI. यह एक तरह का मीटर है जो बताता है कि कर्ज के बाजार की सेहत कैसी है. दिसंबर 2025 की तिमाही में यह इंडिकेटर 102 पर पहुंच गया है. अगर पिछले साल से तुलना करें तो यह 97 पर था और पिछली सितंबर वाली तिमाही में 100 पर था.
| Parameter | ताजा आंकड़े (Dec 2025 Quarter) | पिछले साल की तुलना (YoY) |
| रिटेल क्रेडिट में हिस्सेदारी (संख्या) | 56% | भारी बढ़त |
| रिटेल क्रेडिट में हिस्सेदारी (रकम) | 40% | मजबूत स्थिति |
| औसत लोन की राशि (Avg Ticket Size) | ₹1.9 लाख | बड़ी बढ़ोतरी |
| क्रेडिट मार्केट हेल्थ (CMI Score) | 102 | 97 से सुधार |
| छोटे शहरों की हिस्सेदारी (Non-Metro) | 54% | 3% का इजाफा |
| नए ग्राहकों की एंट्री (New-to-Credit) | 15% | बढ़ता भरोसा |
यह लगातार तीसरी तिमाही है जब बाजार की हालत में सुधार देखा गया है. इससे यह साफ होता है कि भारतीय उपभोक्ता अब कर्ज लेने और उसे सही समय पर चुकाने को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और सक्षम हुए हैं.
पुराने समय में माना जाता था कि गोल्ड लोन सिर्फ दक्षिण भारत का खेल है. वहां घर-घर में ढेर सारा सोना रखने और उसके बदले कर्ज लेने की एक लंबी परंपरा रही है. लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है. रिपोर्ट बताती है कि अब गोल्ड लोन का विस्तार उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों में बहुत तेजी से हो रहा है.
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गोल्ड लोन की डिमांड ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है. अब यह सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भारत का एक मुख्य प्रोडक्ट बन गया है. दिलचस्प बात यह है कि अब आधे से ज्यादा लोन लेने वाले ग्राहक वो हैं जिनका क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा है (प्राइम और उससे ऊपर की कैटेगरी). यानी पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से मजबूत लोग भी अब गोल्ड लोन को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पैसे की भूख बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-मेट्रो शहरों की कुल कर्ज लेने वालों में हिस्सेदारी 54 परसेंट हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले तीन परसेंट ज्यादा है. सबसे अच्छी खबर यह है कि 'न्यू-टू-क्रेडिट' यानी पहली बार बैंक से कर्ज लेने वाले ग्राहकों की संख्या भी बढ़कर 15 परसेंट हो गई है.
त्योहारी सीजन के बाद सप्लाई में थोड़ी नरमी जरूर आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कोई मंदी नहीं बल्कि एक सामान्य बदलाव है. वहीं, अगर कार लोन (ऑटो लोन) की बात करें तो वहां भी स्थिति स्थिर बनी हुई है. मिड-सेगमेंट की सस्ती कारों की डिमांड की वजह से ऑटो लोन के बाजार में रौनक बनी हुई है.
Q. भारत के रिटेल क्रेडिट बाजार में गोल्ड लोन की कितनी हिस्सेदारी है?
संख्या यानी वॉल्यूम के हिसाब से गोल्ड लोन 56 परसेंट और कुल रकम यानी वैल्यू के हिसाब से लगभग 40 परसेंट हिस्सेदारी रखता है.
Q. एक औसत गोल्ड लोन की रकम अब कितनी हो गई है?
दिसंबर 2025 की तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, एक औसत गोल्ड लोन की राशि अब बढ़कर करीब 1.9 लाख रुपये हो गई है.
Q. गोल्ड लोन की डिमांड किन नए राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ रही है?
अब दक्षिण भारत के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गोल्ड लोन की मांग में बहुत तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है.
Q. कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर (CMI) का ताजा स्कोर क्या है और यह क्या बताता है?
दिसंबर 2025 की तिमाही में CMI बढ़कर 102 पर पहुंच गया है. यह स्कोर बताता है कि भारत के कर्ज बाजार की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है.
Q. क्या पहली बार कर्ज लेने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ी है?
जी हां, रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार कर्ज लेने वाले यानी 'न्यू-टू-क्रेडिट' ग्राहकों की हिस्सेदारी बढ़कर अब 15 परसेंट हो गई है.