&format=webp&quality=medium)
Income Tax: क्या आपने कभी सोचा है कि दो पड़ोसियों की कुल घरेलू आय (Household Income) एक समान होने के बावजूद, एक परिवार भारी टैक्स भरता है और दूसरा जीरो? हाल ही में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इसी समस्या को खत्म करने के लिए संसद में 'ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न' का मुद्दा उठाया.
भारत में फिलहाल 'ज्वाइंट आईटीआर' की व्यवस्था नहीं है, लेकिन अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों में यह सालों से लागू है. आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह क्या है और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.
सांसद राघव चड्ढा ने एक बहुत ही सरल उदाहरण से बताया कि मौजूदा सिस्टम परिवारों के साथ कैसा भेदभाव करता है:
परिवार A (दोनों कमाने वाले): पति और पत्नी दोनों ₹10-10 लाख कमाते हैं. कुल घरेलू आय ₹20 लाख हुई. चूंकि दोनों अलग-अलग रिटर्न भरते हैं, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट के बाद उनका कुल टैक्स ₹0 हो जाता है, क्योंकि ऐसे में 12.75 लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री हो जाती है.
परिवार B (एक कमाने वाला): यहां केवल पति ₹20 लाख कमाता है और पत्नी घर संभालती है. कुल घरेलू आय यहां भी ₹20 लाख है. लेकिन चूंकि टैक्स सिस्टम इन्हें 'परिवार' नहीं बल्कि 'अकेला व्यक्ति' देखता है, इसलिए इस परिवार को ₹1.92 लाख का टैक्स भरना पड़ता है.
चड्ढा का तर्क: "एक छत, एक रसोई, एक बजट. लेकिन टैक्स के समय परिवार गायब हो जाता है और पति-पत्नी अजनबी बन जाते हैं." ज्वाइंट आईटीआर आने पर परिवार B का टैक्स भी शून्य हो सकता है.
ज्वाइंट आईटीआर का मतलब है कि पति और पत्नी अपनी अलग-अलग आय को जोड़कर एक ही टैक्स रिटर्न फाइल करें.
इनकम पूलिंग (Income Pooling): दोनों की आय को जोड़कर उसे दो हिस्सों में बांट दिया जाता है. इससे हाई-टैक्स स्लैब में आने वाली आय कम हो जाती है.
हायर एग्जेंप्शन लिमिट: ज्वाइंट फाइलिंग में छूट की सीमा (Exemption Limit) व्यक्तिगत सीमा से लगभग दोगुनी हो सकती है.
डिडक्शन का लाभ: होम लोन ब्याज (Section 24b) या 80C जैसे निवेशों का फायदा दोनों मिलकर बेहतर तरीके से उठा सकते हैं.
समानता (Equity): यह उन महिलाओं के आर्थिक योगदान को पहचान देता है जो घर पर रहकर बच्चों की परवरिश करती हैं और अपनी कमाई छोड़ देती हैं.
सरलता (Simplicity): दो की जगह एक ही रिटर्न भरना होगा, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी.
गेम-चेंजर: यह 'इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिस' है जो भारतीय परिवारों की वित्तीय स्थिरता बढ़ाएगी.
ये भी पढ़ें- आप तो बस ये Rules याद कर लें, Rental Income को परिवार में बांटकर बचा लेंगे Tax, आयकर विभाग भी कुछ नहीं कहेगा!
| विवरण | व्यक्तिगत फाइलिंग (Single Earner) | ज्वाइंट फाइलिंग (प्रस्तावित) |
|---|---|---|
| कुल आय (पति+पत्नी) | ₹20,00,000 | ₹20,00,000 |
| टैक्स यूनिट | केवल पति (1 व्यक्ति) | परिवार (2 व्यक्ति) |
| टैक्स की दर | हाई स्लैब (High Slab) | लो स्लैब (Low Slab - आय बंटने के कारण) |
| संभावित टैक्स | ₹1,92,000 | ₹0 (या बहुत कम) |
वैसे तो इसके फायदे बहुत हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:
इनकम का दुरुपयोग: कुछ लोग टैक्स बचाने के लिए फर्जी आय दिखा सकते हैं.
दोहरे आय वाले परिवार: अगर पति-पत्नी दोनों बहुत ज्यादा कमाते हैं, तो ज्वाइंट फाइलिंग से उनकी आय जुड़कर और भी ऊंचे टैक्स स्लैब में जा सकती है. इसीलिए इसे 'वैकल्पिक' रखने का सुझाव दिया गया है.
ये भी पढ़ें- Share Market की कमाई पर कैसे लगेगा Tax? कौन चुकाएगा.. कौन नहीं? क्या ₹12 लाख तक टैक्स छूट वाला फायदा मिलेगा?
ज्वाइंट आईटीआर का प्रस्ताव भारतीय मध्यम वर्ग, विशेषकर मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है. अगर सरकार इसे वैकल्पिक रूप से लागू करती है, तो लाखों परिवार अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स में जाने से बचा सकेंगे.
1- क्या भारत में अभी ज्वाइंट आईटीआर भरा जा सकता है?
नहीं, वर्तमान नियमों के अनुसार पति और पत्नी को अपनी आय का अलग-अलग रिटर्न भरना अनिवार्य है.
2- ज्वाइंट आईटीआर का सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
उन परिवारों को जहां केवल एक सदस्य कमाता है या जहां एक की आय बहुत ज्यादा और दूसरे की बहुत कम है.
3- क्या यह अनिवार्य (Mandatory) होगा?
नहीं, राघव चड्ढा और एक्सपर्ट्स ने इसे 'वैकल्पिक' रखने का सुझाव दिया है, ताकि लोग खुद चुन सकें कि उन्हें किसमें फायदा है.
4- क्या इसके लिए दोनों के पास पैन (PAN) होना जरूरी है?
हां, ज्वाइंट फाइलिंग के लिए पति और पत्नी दोनों के पास वैध पैन कार्ड होना अनिवार्य होगा.
5- किन देशों में यह व्यवस्था पहले से है?
अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में विवाहित जोड़ों को ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग की सुविधा मिलती है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)