Capital Gain Tax को कितना समझते हैं आप, बिजनेस इनकम और कैपिटल गेन्‍स में क्‍या है फर्क? जानिए इसकी ABCD

आप जब अपनी संपत्ति जैसे जमीन, मकान, गोल्‍ड, शेयर, बॉन्‍ड्स, बैंक एफडी आदि को बेचते हैं तो उस पर मुनाफा प्राप्‍त करते हैं. इस मुनाफे पर लगने वाले टैक्‍स को कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स कहा जाता है.
Capital Gain Tax को कितना समझते हैं आप, बिजनेस इनकम और कैपिटल गेन्‍स में क्‍या है फर्क? जानिए इसकी ABCD

Capital Gain Tax को कितना समझते हैं आप, बिजनेस इनकम और कैपिटल गेन्‍स में क्‍या है फर्क? जानिए इसकी ABCD

कैपिटल गेन टैक्‍स (Capital Gain Tax) इस शब्‍द के बारे में आपने कई बार सुना होगा. दरअसल सरकार निवेशकों पर कई तरह के टैक्‍स लगाती है, कैपिटल गेन टैक्‍स भी उसी का हिस्‍सा है. ये एक ऐसा टैक्‍स होता है जो किसी पूंजी की बिक्री पर होने वाले मुनाफे पर वसूला जाता है क्‍योंकि इस मुनाफे को सरकार आय का ही एक हिस्सा मानती है. सामान्‍य शब्‍दों में समझें तो आप जब अपनी संपत्ति जैसे जमीन, मकान, गोल्‍ड, शेयर, बॉन्‍ड्स आदि को बेचते हैं तो उस पर मुनाफा प्राप्‍त करते हैं यानी आपको बेचने पर जो रकम मिलती है, वो आमतौर पर खरीद की रकम से ज्‍यादा होती है. इस लाभ को कैपिटल गेन्‍स कहा जाता है और आपके कैपिटल गेन्‍स पर जो टैक्‍स आप चुकाते हैं, उसे कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स कहते हैं.

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपने कोई जमीन 10 लाख में खरीदी और उसे दो साल बाद जब बेचा तो वो 14 लाख में बिकी. ऐसे में आपको अपनी कैपिटल पर 4 लाख का फायदा हुआ. इस मुनाफे पर जो टैक्‍स दिया जाएगा, उसे कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स कहा जाता है. यहां जानिए CA राहुल अग्रवाल से कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स से जुड़ी जरूरी जानकारी.

कैपिटल गेन्‍स और बिजनेस इनकम का फर्क

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अगर आप प्रॉपर्टी की खरीद और बिक्री का कारोबार करते हैं यानी एक साल के अंदर कई बार प्रॉपर्टी को खरीदते और बेचते हैं, तो इस पर होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन्‍स नहीं माना जाता. इसे बिजनेस इनकम माना जाता है. कैपिटल गेन्‍स उस एसेट को माना जाता है जिसे आप निवेश या अपने उपयोग के तौर पर खरीदते हैं, तो इसे आपकी कैपिटल माना जाता है और इसकी बिक्री पर होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन्‍स कहा जाता है.

दो तरह का होता है कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स

Short Term Capital Gains Tax: सीए राहुल कहते हैं कि कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स भी दो तरह का होता है. अगर आपने कोई अचल संपत्ति खरीदकर 2 साल के पहले बेचा तो उसमें मिला फायदा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्‍स (Short Term Capital Gains) कहा जाता है. वहीं लिस्‍टेड शेयर्स के मामले में 1 साल के अंदर बेचे गए शेयर से प्राप्‍त मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्‍स माना जाता है. लेकिन मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सेल करके एसटीटी पेमेंट होने पर 15% टैक्स देना होता है. बाकी अन्‍य सभी पर टैक्‍स वसूलने के लिए सरकार कोई अलग दर घोषित नहीं करती है. आपकी अन्‍य इनकम की तरह ही इसे भी आपकी कुल आमदनी में जोड़ दिया जाता है और उसके बाद टैक्‍स स्‍लैब के अनुसार आपकी जितनी आमदनी टैक्‍स देने योग्‍य होती है, उस पर आपको टैक्‍स देना होता है.


Long Term Capital Gains Tax: लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स को तय करने के मामले में अलग-अलग चीजों के लिए अलग-अलग अवधि तय की गई है. इसमें अगर आप कोई जमीन, मकान वगैरह को दो साल बाद बेचते हैं तो इस पर होने वाले मुनाफे को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स माना जाता है. जूलरी, बॉन्‍ड्स और म्‍यूचुअल फंड्स के मामले में ये अवधि 3 साल निर्धारित है. जबकि शेयर्स के मामले में अगर आप इसे एक साल के बाद बेचते हैं तो इसके मुनाफे को Long Term Capital Gains माना जाता है; आमतौर पर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स पर Indexation के साथ 20 प्रतिशत टैक्‍स देना होता है और बिना Indexation के 10 प्रतिशत टैक्‍स देना होता है.

ऐसे बचा सकते हैं टैक्‍स

अगर आपने प्रॉपर्टी में किसी तरह का रेनोवेशन या सुधार करवाया था तो इस पर हुए खर्चे की इंडेक्स कॉस्ट निकाल कर इनकम टैक्स में छूट हासिल की जा सकती है. जिससे आप कैपिटल गेन टैक्स का बोझ थोड़ा कम कर पाएंगे. इसके अलावा आप ITR की धारा 54 के तहत आप मुनाफे की राशि को किसी दूसरे मकान में लगाकर भी टैक्स में बचत कर सकते हैं. लेकिन ये छूट मकान बेचने के 2 साल के अन्दर ही दूसरा रेडी टू मूव मकान खरीदने पर ही मान्य होती है.

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