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इन्वेस्टमेंट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी मुनाफा होता है तो कभी नुकसान. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्वेस्टमेंट में हुए इस नुकसान का इस्तेमाल आप अपनी टैक्स देनदारी कम करने के लिए कर सकते हैं? जी हां, इसे 'टैक्स हार्वेस्टिंग' (Tax Harvesting) कहते हैं. ये एक स्मार्ट फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी है, जिसकी मदद से आप अपने लॉस को टैक्स सेविंग का हथियार बना सकते हैं. आइए, जानते हैं इसके बारे में.
टैक्स हार्वेस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आप जानबूझकर अपने उन इन्वेस्टमेंट (घाटे वाले शेयर या म्यूचुअल फंड) को बेचते हैं जिनमें आपको नुकसान हो रहा है, ताकि उस नुकसान को कैपिटल गेन (Capital Gain) से एडजस्ट किया जा सके. इससे आपकी कुल टैक्स देनदारी कम हो जाती है और कुल मिलाकर नेट टैक्सेबल इनकम घट जाती है. एक बार जब आप उन इन्वेस्टमेंट को बेच देते हैं, तो आप तुरंत या कुछ समय बाद उन्हें वापस खरीद सकते हैं, बशर्ते मार्केट सेंटीमेंट अच्छा हो. ये पूरी तरह से लीगल और इनकम टैक्स नियमों के तहत आता है.
मान लीजिए कि आपने कुछ शेयरों में निवेश किया था. आपने एक स्टॉक A में ₹1,00,000 लगाया था, लेकिन अब उसकी वैल्यू ₹80,000 रह गई यानी आपको ₹20,000 का नुकसान (Capital Loss) हो गया. उसी वर्ष आपने स्टॉक B को बेचकर ₹30,000 का लाभ प्राप्त किया. अब, अगर आप उन घाटे वाले शेयरों को बेच देते हैं, तो ये ₹20,000 का लॉस आपके ₹30,000 के गेन से सेट-ऑफ हो जाएगा. इससे आपकी टैक्स देनदारी घट जाएगी और आपको टैक्स सिर्फ ₹10,000 पर देना पड़ेगा.
भारत में, कैपिटल गेन को दो कैटेगरी में बांटा गया है:
टैक्स हार्वेस्टिंग में आप अपने कैपिटल लॉस का इस्तेमाल कैपिटल गेन को ऑफसेट करने के लिए करते हैं. नियम ये हैं:
अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में आपका पूरा लॉस ऑफसेट नहीं हो पाता, तो बचे हुए लॉस को आप अगले 8 फाइनेंशियल ईयर तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं.
टैक्स हार्वेस्टिंग हमेशा फायदेमंद हो, ये जरूरी नहीं है. कई बार निवेशक केवल टैक्स बचाने के लिए अच्छे शेयर बेच देते हैं, जिससे लॉन्ग टर्म में नुकसान हो सकता है. इसलिए, इसे सोच-समझकर अपनाना चाहिए.