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नौकरीपेशा और पेंशनधारकों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की लास्ट डेट 16 सितंबर निकल चुकी है. अब फोकस उन लोगों पर है जिन्हें टैक्स ऑडिट (Tax Audit) करवाना जरूरी है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आयकर विभाग ने टैक्स ऑडिट की डेडलाइन 30 सितंबर 2025 तय की है.
जिन लोगों के अकाउंट्स को ऑडिट करवाना जरूरी है, उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing) 31 अक्टूबर 2025 तक जमा करना होगा. अभी तक सरकार ने टैक्स ऑडिट की तारीख बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया है. हालांकि, बार-बार सरकार से लास्ट डेट बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है.
टैक्स ऑडिट का मतलब है कि किसी बिजनेस (Business) या प्रोफेशन (Profession) की बही-खातों की जांच करना. इसमें देखा जाता है कि इनकम, खर्च और कटौतियों को सही तरीके से दिखाया गया है या नहीं. टैक्स ऑडिट का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि टैक्स कैलकुलेशन (Tax Calculation) और टैक्स भुगतान सही तरीके से हो रहा है.
हर किसी को टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं होती. यह सिर्फ उन्हीं पर लागू होता है जिनका बिजनेस टर्नओवर (Turnover) या ग्रॉस रिसीप्ट (Gross Receipt) ज्यादा है. अगर किसी का बिजनेस टर्नओवर सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो टैक्स ऑडिट जरूरी है.
वहीं अगर कैश ट्रांजेक्शन (Cash Transaction) कुल लेन-देन का 5% से कम है तो लिमिट 10 करोड़ रुपये हो जाती है. इसके अलावा प्रोफेशनल्स (Professionals) जैसे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, सीए आदि के लिए यह लिमिट 50 लाख रुपये है.
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इनकम टैक्स पोर्टल (Income Tax Portal) पर जमा की जाती है. इसके लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant - CA) की मदद लेनी पड़ती है. सीए लॉगिन करके रिपोर्ट अपलोड करता है और फिर टैक्सपेयर को इसे अप्रूव करना होता है.
अगर कोई टैक्सपेयर समय पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट नहीं भरता है तो आयकर अधिनियम की धारा 44AB (Section 44AB) और धारा 271B (Section 271B) के तहत पेनल्टी लग सकती है.
पेनल्टी कुल सेल्स, टर्नओवर या ग्रॉस रिसीप्ट का 0.5% होगी. लेकिन यह पेनल्टी अधिकतम 1,50,000 रुपये तक ही लगाई जाएगी. वहीं अगर टैक्सपेयर ये साबित कर दे कि रिपोर्ट न भरने की वजह वाजिब थी, तो पेनल्टी से राहत मिल सकती है.
सेक्शन 44AB यह बताता है कि किन लोगों को टैक्स ऑडिट करवाना अनिवार्य है. सेक्शन 271B यह बताता है कि समय पर रिपोर्ट न भरने पर क्या जुर्माना लगेगा.
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट से विभाग को यह समझने में मदद मिलती है कि किस टैक्सपेयर ने अपनी इनकम और खर्च सही दिखाए हैं या नहीं. इससे टैक्स चोरी (Tax Evasion) रोकने में मदद मिलती है और पारदर्शिता (Transparency) बनी रहती है.
टैक्स ऑडिट सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह टैक्स सिस्टम का अहम हिस्सा है. इससे न सिर्फ टैक्स विभाग बल्कि टैक्सपेयर को भी फायदा होता है. समय पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना बेहद जरूरी है ताकि पेनल्टी से बचा जा सके और आगे किसी कानूनी समस्या का सामना न करना पड़े.
ITR यानी इनकम टैक्स रिटर्न, जिसमें आप अपनी आय और टैक्स की जानकारी सरकार को देते हैं.
PAN कार्ड सभी वित्तीय लेन-देन और टैक्स से जुड़ी पहचान के लिए जरूरी है.
TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स, जहां पेमेंट करने वाला ही टैक्स काटकर सरकार को जमा करता है.
GST सामान और सेवाओं पर लगता है जबकि इनकम टैक्स आय पर लगता है.
टैक्स प्लानिंग से आप समय पर और सही टैक्स देकर पेनल्टी और कानूनी दिक्कतों से बच सकते हैं.
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