Tax Saving Tips: नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होते ही हर शख्स सोचता है कि इस बार ज्यादा टैक्स बचाना है. लेकिन, ITR भरने का वक्त जैसे-जैसे करीब आता है तो पता चलता है कि टैक्स बचाना तो दूर, पूरे साल कटने के बाद और टैक्स चुकाने की नौबत आ सकती है. ऐसे में क्या करें कि टैक्स सेविंग्स ज्यादा हो और रिटर्न फाइल करते हुए हमारा रिफंड भी बन सके. इसके लिए जरूरी है कि अपनी सैलरी में कुछ कंपोनेंट्स को ऐड करा लीजिए. टैक्स बचाने के लिए अलाउंस का बड़ा रोल होता है. आप HR से फाइनेंशियल ईयर शुरू होते ही अपनी सैलरी में चेंज की रिक्वेस्ट कर सकते हैं. सैलरी में ज्यादा अलाउंस शामिल करवाएं. आइए जानते हैं कौन से अलाउंस शामिल कराने से आपको टैक्स सेविंग में मदद मिल सकती है. ऐसा करने पर खुद HR भी पूछेगा ये फॉर्मूला कहां से लाए हो.
1/10न्यूजपेपर, मैगजीन या किताबें पढ़ने का शौक रखते हैं तो ये अलाउंस जरूर शामिल कराएं. एम्प्लॉयर एक तय लिमिट तक अलाउंस देती हैं. इससे टैक्स लायबिलिटी कम करने में मदद मिलेगी.
2/10अपने बच्चा की उम्र और योग्यता के हिसाब से एजुकेशन या हॉस्टल अलाउंस भी ले सकते हैं. इसके लिए HR से संपर्क करें. वो आपको बताएंगे कि इस अलाउंस का फायदा मिलेगा या नहीं या फिर कैसे उठा सकते हैं.
3/10ज्यादातर कंपनियां ये अलाउंस भी देती हैं. इसे भी सैलरी में शामिल करवा सकते हैं. ये अलाउंस यूनीफॉर्म यानि कपड़े, जूते का खर्च मेंटेन करने के लिए मिलता है, जिन पर कोई टैक्स नहीं लगता है.
4/10कंपनियां में कार मेंटेनेंस अलाउंस भी मिलता है. कार के मेंटेनेंस, पेट्रोल-डीजल बिल और ड्राइवर की सैलरी पर भी अलाउंस मिलता है. HR से बात करके इससे भी शामिल कराएं. इस पर अच्छी टैक्स छूट मिलेगी.
5/10इस अलाउंस में मोबाइल फोन और इंटरनेट बिल का रीइम्बर्समेंट होता है. हालांकि, इसकी भी एक तय सीमा होती है, जो टैक्स फ्री रहती है. इससे भी टैक्स कम करने में मदद मिलती है.
6/10लगभग सभी कंपनियों में ये अलाउंस मिलता है. इसमें आपको घूमने के लिए अलाउंस दिया जाता है. 4 साल में 2 बार लंबे टूर का खर्च लीव ट्रैवल अलाउंस में रीइम्बर्स होता है. आपकी सैलरी में LTA शामिल नहीं है तो इसे करवाएं और टैक्स बचाएं.
7/10फूड कूपन या मील वाउचर या सोडेक्सो कूपन से भी टैक्स बचाया जाता है. इसे एंटरटेनमेंट अलाउंस भी कहते हैं. हर महीने 2500-5000 रुपए तक का एंटरटेनमेंट अलाउंस मिलता है. सिर्फ फूड बिल से इसे रीइम्बर्स करा सकते हैं. इससे भी टैक्स छूट का फायदा मिलता है.
8/10कुछ कंपनियां ही मेडिकल अलाउंस भी देती हैं. इसमें कर्मचारी अपने या परिवार के मेडिकल खर्चों को रीइम्बर्स करा सकता है. अगर सैलरी में ये अलाउंस नहीं है तो इसे भी रख सकते हैं. इससे टैक्स भी बचेगा और हेल्थ का ख्याल रहेगा.
9/10ट्रैवल भत्ता या कन्वेंस अलाउंस ऑफिस और घर के बीच आने-जाने का खर्चा कवर करता है. ज्यादातर कंपनियां कर्मचारियों को सैलरी में ये अलाउंस देती हैं, लेकिन अगर आपके स्ट्रक्चर में शामिल नहीं है तो ये भी अच्छा ऑप्शन है. टैक्स बचाने में मदद मिलेगी.
10/10सभी कंपनियों में HRA यानि मकान किराया भत्ते (हाउस रेंट अलाउंस) का ऑप्शन होता ही है. ये एक मेजर कंपोनेंट है. बेसिक सैलरी का 40 या 50 फीसदी तक इसे रख सकते हैं. इसमें भी टैक्स छूट मिलती है.