New Tax Regime: नए फाइनेंशियल ईयर में नई टैक्स प्लानिंग (Tax Planning) करनी है तो न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में शिफ्ट हो जाएं. पहला फायदा 12 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं. दूसरा फायदा अगर NPS है तो कॉरपोरेट अकाउंट के जरिए डिडक्शन ले सकते हैं. स्टैंडर्ड डिडक्शन भी ज्यादा है. साथ ही फ्लैक्सी पे कंपोनेंट्स के साथ ज्यादा सैलरी टैक्स के दायरे में जाने से बचा सकते हैं. ऐसे में न्यू टैक्स रिजीम में ज्यादा फायदा मिल रहा है. और तो और अब न्यू टैक्स रिजीम में होम लोन के ब्याज में भी छूट मिलेगी. लेकिन, इसके लिए इनकम टैक्स के एक नियम को फॉलो करना होगा. सीधे तौर पर ये छूट नहीं मिलेगी. आइये समझते हैं पूरा गणित.
1/15नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो गया है. इन्वेस्टमेंट डेक्लेरेशन का समय है, लेकिन कन्फ्यूजन है कि पुरानी टैक्स रिजीम में रहें या नई अपनाएं?
2/15नई टैक्स रिजीम (NTR) में ज्यादातर टैक्स डिडक्शन क्लेम नहीं कर सकते. ऐसे में सवाल उठता है कि फायदा किसमें है - Old या New?
3/15एक नजरिया यह है कि New Tax Regime में फायदा है, क्योंकि ₹12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री हो सकती है (शायद स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट मिलाकर), जबकि ओल्ड में डिडक्शन के बाद भी ₹10 लाख तक ही टैक्स फ्री कर पाते हैं.
4/15New Tax Regime में एक और जबरदस्त फायदा बताया जा रहा है - होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट, लेकिन ये सीधी छूट नहीं है, इसके लिए एक खास नियम मानना होगा.
5/15सरकार ने 2020 में New Tax Regime शुरू किया. इसमें होम लोन ब्याज पर छूट मिल सकती है, पर सिर्फ तभी जब प्रॉपर्टी 'लेट आउट' (Let out property) यानी किराए पर दी गई हो. सेल्फ-ऑक्यूपाइड पर नहीं.
6/15रिजीम चुनने से पहले ये समझना जरूरी है कि दोनों रिजीम में कौन सी छूट मिलती है और कौन सी नहीं. स्टैंडर्ड डिडक्शन दोनों में है, लेकिन फायदा अलग-अलग है. वहीं, डिडक्शंस न्यू टैक्स रिजीम में नहीं हैं.
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9/15सीधा जवाब है Self-Occupied पर 24(b) छूट नहीं, New Tax Regime में सेक्शन 24(b) के तहत सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के ब्याज पर कोई सीधी कटौती नहीं मिलती. सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन, NPS एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन आदि ही मान्य हैं.
10/15अगर आपने होम लोन वाला घर किराए (Let-Out) पर दिया है, तो आप 'इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी' की गणना करते समय ब्याज के कारण हुए नेट लॉस को एडजस्ट कर सकते हैं.
11/15होम लोन का पूरा ब्याज और किराए से होने वाली आय के बीच के अंतर को लॉस कहा जाता है. इसे आप अपनी दूसरी इनकम से घटाकर (Set-off) सकते हैं.
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13/15घर खुद इस्तेमाल किया (Self-Occupied) → ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं (New Tax Regime में). घर किराए पर है (Let-Out) → रेंटल इनकम के लॉस को दूसरी आय से Set-off किया जा सकता है.
14/15ध्यान दें! आप एक साल में हाउस प्रॉपर्टी से हुए लॉस को दूसरी इनकम से अधिकतम ₹2 लाख तक ही Set-off कर सकते हैं, भले ही आपका वास्तविक लॉस (ब्याज के कारण) इससे ज्यादा क्यों न हो.
15/15New Tax Regime में होम लोन ब्याज पर सीधी छूट नहीं है, पर लेट-आउट प्रॉपर्टी पर लॉस सेट-ऑफ का अप्रत्यक्ष फायदा है. यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नियम है. कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें.