Income Tax Department Scrutiny: सेविंग्स अकाउंट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. इसी से हम पैसे ट्रांसफर करते हैं, बिल भरते हैं, डिपॉजिट या कैश निकालते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी साधारण सी बैंक ट्रांजैक्शन भी आयकर विभाग (Income Tax Department) के रडार में आ सकती है? टैक्स एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि कई बार हम अनजाने में ऐसे लेन-देन कर बैठते हैं, जो इनकम टैक्स की नज़र में ‘संदिग्ध’ माने जाते हैं.
1/11अगर आप एक वित्तीय वर्ष में अपने सभी सेविंग्स अकाउंट में कुल 10 लाख रुपए या उससे अधिक कैश जमा करते हैं, तो बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को भेज देता है. यह गैरकानूनी नहीं है, लेकिन आपको उस पैसे का स्रोत साबित करना पड़ सकता है. इसलिए अगर आपने किसी प्रॉपर्टी की बिक्री, गिफ्ट या पुराने सेविंग्स से पैसा जमा किया है, तो उसके सबूत जैसे रसीदें या डीड्स संभालकर रखें.
2/11अगर आप 1 लाख रुपए से अधिक कैश में या कुल 10 लाख रुपए से अधिक (ऑनलाइन या चेक से) अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरते हैं, तो बैंक और कार्ड कंपनियां इसका डेटा टैक्स विभाग को भेजती हैं. इससे टैक्स विभाग आपके खर्च और घोषित आय (declared income) की तुलना करता है. अगर खर्च आपकी आय से बहुत ज्यादा दिखा, तो नोटिस आ सकता है.
3/11यदि आप बार-बार या असामान्य रूप से बड़ी रकम कैश में निकालते हैं, और आपकी घोषित इनकम उसके मुताबिक नहीं है, तो यह भी संदेह का कारण बन सकता है. ऐसी निकासी के पीछे का रिकॉर्ड जैसे बिजनेस पेमेंट या खरीद की रसीदें जरूर रखें.
4/11यदि आप कोई प्रॉपर्टी 30 लाख रुपए या उससे अधिक मूल्य की खरीदते या बेचते हैं, तो रजिस्ट्री ऑफिस (Sub-Registrar) इसकी जानकारी स्वतः आयकर विभाग को भेज देता है. विभाग फिर खरीदार और विक्रेता दोनों की इनकम टैक्स रिटर्न से डेटा मिलान करता है कि पैसा कहां से आया.
5/11अगर कोई अकाउंट जो लंबे समय से बंद या निष्क्रिय था, अचानक बड़े लेन-देन दिखाने लगता है, तो बैंक इसे “असामान्य गतिविधि” मान सकता है. ऐसे मामलों में आपको उचित स्पष्टीकरण और डॉक्युमेंटेशन तैयार रखना चाहिए, जैसे कि व्यापार शुरू करने के लिए अकाउंट फिर से खोला गया हो या कोई विरासत में मिली राशि जमा हुई हो.
6/11अगर आप किसी वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपए या उससे अधिक विदेशी मुद्रा (foreign exchange) खर्च या प्राप्त करते हैं (जैसे अंतरराष्ट्रीय ट्रिप, फॉरेक्स कार्ड, या इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन के जरिए), तो अधिकृत डीलर और मनी चेंजर इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजते हैं. अगर आपकी विदेशी खर्चे आपकी इनकम के अनुपात में बहुत अधिक हैं, तो जांच की संभावना बढ़ जाती है.
7/11अगर आपकी सेविंग्स अकाउंट से मिला ब्याज (interest) Form 26AS या AIS में दिखाए गए ब्याज से मेल नहीं खाता, तो यह भी इनकम टैक्स नोटिस का कारण बन सकता है. इसलिए हर साल अपनी ITR में सभी बैंक अकाउंट्स का ब्याज सही-सही जोड़कर दिखाएं.
8/11बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और एनबीएफसी सभी आपके ब्याज, डिविडेंड और कैपिटल गेन की जानकारी विभाग को भेजते हैं. अगर आपके Annual Information Statement (AIS) और ITR के बीच अंतर है, तो सिस्टम ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन के लिए अलर्ट भेज देता है. भले ही आपका सेविंग्स अकाउंट ब्याज ₹10,000 से कम हो, फिर भी उसे रिपोर्ट करना ज़रूरी है.
9/11कई लोग अलग-अलग बैंकों में कई सेविंग्स अकाउंट रखते हैं, लेकिन हर अकाउंट से मिलने वाला ब्याज ITR में शामिल नहीं करते. यह एक आम गलती है, और टैक्स विभाग की ऑटोमैटिक सिस्टम्स इसे तुरंत पकड़ लेते हैं. इसलिए हर अकाउंट का ब्याज जोड़कर एक साथ रिपोर्ट करें.
10/11त्योहारों के दौरान लोग डिस्काउंट पाने के लिए अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग कर लेते हैं और बाद में उन्हें कैश देकर पैसा लौटा देते हैं. ऐसा करना टैक्स सिस्टम में गड़बड़ी पैदा कर सकता है. क्योंकि अगर वह कैश ट्रांजैक्शन बड़ा है या रिपोर्टिंग थ्रेशोल्ड पार कर गया, तो वह Statement of Financial Transactions (SFT) में कैप्चर हो सकता है और दोनों पक्षों को स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है.
11/11ऐसे में टैक्सपेयर्स को अपनी Annual Information Statement (AIS) नियमित रूप से इनकम टैक्स पोर्टल पर जांचनी चाहिए. अपने ब्याज, निवेश, प्रॉपर्टी या फॉरेक्स ट्रांजैक्शन के सभी एंट्रीज का मिलान ITR में सही-सही करें. अगर आपकी ट्रांजैक्शन वैध हैं और डॉक्युमेंटेशन सही है, तो डरने की कोई जरूरत नहीं.