New Tax Regime 2026: ₹4 लाख से ₹24 लाख कमाने वाले कितना भरेंगे रिटर्न! जानें किस सैलरी पर कितना टैक्स, कहां मिलेगी राहत

FY 2026-27 के लिए इनकम टैक्स स्लैब और नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) की पूरी जानकारी। जानें ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स छूट (Section 87A) कैसे पाएं और ₹16 लाख से ₹24 लाख की सैलरी पर कितना टैक्स लगेगा. पुरानी vs नई टैक्स व्यवस्था की तुलना और बेहतर टैक्स प्लानिंग के स्मार्ट टिप्स यहां पढ़ें.
New Tax Regime 2026: ₹4 लाख से ₹24 लाख कमाने वाले कितना भरेंगे रिटर्न! जानें किस सैलरी पर कितना टैक्स, कहां मिलेगी राहत

सैलरी ₹7 लाख से ₹12 लाख के बीच है, तो नई व्यवस्था बेस्ट हो सकती है (फोटो: एआई)

वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही लाखों नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और फ्रीलांसरों के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि क्या इस बार इनकम टैक्स स्लैब बदल गए हैं? क्या ₹12 लाख तक इनकम वालों को राहत जारी रहेगी? और ₹16 लाख, ₹20 लाख या ₹24 लाख कमाने वालों पर कितना टैक्स बनेगा?

तो सीधा जवाब है New Tax Regime में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं हुआ है. यानी कि जो टैक्स स्लैब पहले लागू थे, वही फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में भी लागू रहेंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ समझना आसान है. तो इसलिए सही कैलकुलेशन जानना जरूरी है, वरना टैक्स प्लानिंग में गलती महंगी पड़ सकती है

पहले समझ लें पूरी बात

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  • नई कर व्यवस्था के स्लैब में कोई बदलाव नहीं
  • ₹4 लाख तक आय पर टैक्स शून्य
  • ₹12 लाख तक पात्र लोगों को रिबेट से राहत संभव
  • ₹16 लाख, ₹20 लाख, ₹24 लाख पर बढ़ता टैक्स असर
  • सही टैक्स व्यवस्था चुनना अभी भी जरूरी

यह खबर आपके लिए इतनी जरूरी क्यों है?

क्योंकि बहुत से लोग मान लेते हैं कि जितनी आय बढ़ी, उतना टैक्स एक ही दर से लगेगा. जबकि सच यह है कि टैक्स स्लैब सिस्टम से लगता है. अगर आप सही गणित नहीं समझते, तो गलत टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं.यानी सवाल सिर्फ टैक्स भरने का नहीं है, कम टैक्स और सही टैक्स भरने का है.

नई कर व्यवस्था 2026 के टैक्स स्लैब क्या हैं?

सालाना आय (CTC)स्टैंडर्ड डिडक्शनटैक्स योग्य आयप्रभावी टैक्स (Rebate के साथ)
₹12 लाख तक₹75,000₹11.25 लाखzero (0)
₹16 लाख तक₹75,000₹15.25 लाख₹1.38 लाख
₹20 लाख तक₹75,000₹19.25 लाख₹2.22 लाख
₹24 लाख₹75,000₹23.25 लाख₹3.30 लाख
₹24 लाख+₹75,000-30% स्लैब लागू

₹12 लाख तक वालों को राहत कैसे मिलेगी?

नई कर व्यवस्था चुनने वाले पात्र करदाताओं को धारा 87A के तहत अधिकतम ₹60,000 तक कर छूट मिल सकती है

इसका मतलब:

  • ₹12 लाख तक टैक्स योग्य आय वालों को बड़ी राहत मिल सकती है
  • कई मामलों में प्रभावी टैक्स शून्य तक हो सकता है और शर्तें लागू होंगी
  • यानी ₹12 लाख क्लब वालों के लिए यह सबसे अहम पॉइंट है

₹16 लाख, ₹20 लाख और ₹24 लाख वालों पर क्या असर?

  • अगर आपकी आय ₹12 लाख से ऊपर है, तो अगले स्लैब लागू होंगे
  • ₹16 लाख तक वालों पर 15% स्लैब का हिस्सा
  • ₹20 lakh तक वालों पर 20% स्लैब
  • ₹24 lakh तक वालों पर 25% स्लैब
  • उससे ऊपर 30%

सीधी बात: इनकम बढ़ेगी तो टैक्स भी बढ़ेगा, लेकिन धीरे-धीरे स्लैब के हिसाब से

किसे नई व्यवस्था में फायदा हो सकता है?

  • सबसे ज्यादा फायदा इन लोगों को हो सकता है
  • वेतनभोगी कर्मचारी
  • जिनके पास कम निवेश कटौतियाँ हैं
  • जिनका HRA या होम लोन क्लेम कम है
  • आसान रिटर्न भरना चाहते हैं
  • यंग प्रोफेशनल्स

पुरानी vs नई कर व्यवस्था: फर्क क्या है?

पुरानी व्यवस्था

  • 80C कटौती
  • HRA
  • होम लोन ब्याज
  • मेडिकल बीमा छूट
  • ज्यादा deductions

नई व्यवस्था

  • कम टैक्स दरें
  • कम कागजी झंझट
  • सीमित छूट
  • आसान कैलकुलेशन
  • तो साफ है कि फैसला आपकी इनकम और इन्वेस्टमेंट पर निर्भर करेगा

आपके लिए क्या मायने होंगे?

  • सैलरी ₹7 लाख से ₹12 लाख के बीच है, तो नई व्यवस्था बेस्ट हो सकती है
  • PF, LIC, ELSS, होम लोन में इन्वेस्टमेंट है, तो पुरानी व्यवस्था बेस्ट हो सकती है
  • यानी कि हर किसी के लिए एक जैसा जवाब नहीं है
tax

अभी क्या करें?

1. अपनी सालाना इनकम निकालें

  • CTC नहीं, टैक्स योग्य आय समझें

2. दोनों व्यवस्था का तुलना करें

  • पुरानी बनाम नई कैलकुलेशन करें

3. निवेश देखें

  • अगर deduction ज्यादा है तो पुरानी व्यवस्था देखें

4. समय रहते टैक्स प्लान करें

  • मार्च तक इंतजार न करें

5. जरूरत हो तो सलाह लें

  • CA या टैक्स विशेषज्ञ से बात करें

आपके काम की बात

आपको बता दें कि नई कर व्यवस्था 2026 में ₹4 लाख से ₹24 लाख तक कमाने वालों के लिए नियम पहले जैसे ही हैं, राहत भी है और बढ़ता टैक्स भी.तो फर्क सिर्फ इतना है कि जो समझदार प्लान करेगा, वही बचत करेगा. इसलिए कमाई जितनी बढ़ेगी, टैक्स प्लानिंग उतनी जरूरी होगी.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)

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