ITR New Rules 2026: क्या ITR फॉर्म में अब देने होंगे दो पते और दो मोबाइल नंबर? जान लीजिए क्या हैं नए नियम

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म नोटिफाई कर दिए हैं. इन नए फॉर्म्स (ITR 1 से 7) में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा. सबसे बड़ा बदलाव संपर्क जानकारी और पते को लेकर है, जहां अब प्राइमरी और सेकंडरी जानकारी देने का विकल्प मिलेगा.
ITR New Rules 2026: क्या ITR फॉर्म में अब देने होंगे दो पते और दो मोबाइल नंबर? जान लीजिए क्या हैं नए नियम

अगर आप भी हर साल समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. सरकार ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स फॉर्म जारी कर दिए हैं. पिछले हफ्ते आए इन फॉर्म्स में कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनके बारे में जानकर आपकी उलझनें कम हो जाएंगी.

अक्सर जब टैक्स की बात आती है, तो लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि पता नहीं इस बार क्या नया झमेला होगा. लेकिन इस बार के बदलावों को देखकर लग रहा है कि विभाग टैक्स भरने की प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और सरल बनाने की कोशिश कर रहा है. चलिए, एक-एक करके समझते हैं कि आखिर इस बार फॉर्म में क्या-क्या नया है और आपको किन बातों का ध्यान रखना है.

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क्या अब देने होंगे दो पते और दो मोबाइल नंबर?

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या अब हमें दो पते और दो मोबाइल नंबर देने होंगे. दरअसल, नए नोटिफाई किए गए सभी फॉर्म (ITR 1 से ITR 7) के 'पार्ट-A' में एक बड़ा बदलाव हुआ है. यह वह हिस्सा होता है जहां आप अपनी निजी जानकारी जैसे नाम, पैन कार्ड और आधार की जानकारी भरते हैं.

अब तक के नियमों के मुताबिक, आपको केवल एक स्थायी पता और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर देना होता था. लेकिन अब टैक्स विभाग ने इसमें प्राइमरी (Primary) और सेकंडरी (Secondary) का कॉन्सेप्ट जोड़ दिया है.

पते का नया कॉलम: अब फॉर्म में मुख्य पते के साथ-साथ एक 'सेकंडरी एड्रेस' देने का विकल्प भी दिया गया है. यह उन लोगों के लिए बहुत काम का है जो काम के सिलसिले में एक शहर से दूसरे शहर आते-जाते रहते हैं. साथ ही जो लोग किराए पर रहते हैं और वह अपना कोई स्थाई पता भी देना चाहते हैं, उनके लिए भी यह फायदे का है.

संपर्क की जानकारी: इसी तरह मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के लिए भी अब दो कॉलम होंगे. एक आपका प्राइमरी नंबर होगा (जिस पर विभाग के जरूरी मैसेज आएंगे) और दूसरा सेकंडरी, जो इमरजेंसी या बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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प्रतिनिधियों के लिए बड़ी राहत

कई बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति खुद अपना टैक्स रिटर्न नहीं भर पाता. ऐसी स्थिति में उनकी जगह कोई और व्यक्ति (जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंट या परिवार का कोई सदस्य) रिटर्न भरता है. कानून की भाषा में इसे 'प्रतिनिधि' कहा जाता है.

पुराने फॉर्म में प्रतिनिधियों को अपनी पूरी कुंडली देनी पड़ती थी. उनका नाम, पैन, आधार, पूरा पता और उनकी क्षमता (कैपेसिटी) जैसी लंबी-चौड़ी जानकारी भरनी होती थी. लेकिन नए नियमों ने इसे बहुत छोटा कर दिया है. अब प्रतिनिधि को केवल 3 चीजें बतानी होंगी:

  • प्रतिनिधि का नाम.
  • उनका मोबाइल नंबर.
  • उनकी ईमेल आईडी.

इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और रिटर्न भरने वाले प्रोफेशनल का समय भी बचेगा.

कैपिटल गेन की रिपोर्टिंग अब हुई आसान

अगर आप शेयर बाजार या प्रॉपर्टी से कमाई करते हैं, तो आपके लिए एक बहुत अच्छी खबर है. नए ITR फॉर्म में 'डुअल रिपोर्टिंग' यानी दोहरी जानकारी देने की झंझट को खत्म कर दिया गया है.

पिछले सालों में टैक्स की दरों में बीच-बीच में बदलाव हुए थे, जिसकी वजह से टैक्सपेयर्स को यह बताना पड़ता था कि उन्होंने किस तारीख को एसेट बेचा और उस वक्त क्या दर थी. लेकिन असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ऐसा कोई झमेला नहीं है क्योंकि इस दौरान टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है. अब आपको ट्रांसफर की तारीख के आधार पर अलग-अलग हिसाब देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे रिपोर्टिंग का ढांचा बहुत सरल हो गया है.

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असेसमेंट ईयर और फाइनेंशियल ईयर का गणित

टैक्स की दुनिया में साल का गणित थोड़ा अलग होता है. इसे समझना बहुत जरूरी है.

फाइनेंशियल ईयर (FY): यह वह साल होता है जिसमें आप पैसे कमाते हैं. अभी हम जिस फॉर्म की बात कर रहे हैं, वह वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई के लिए है.

असेसमेंट ईयर (AY): यह वह साल होता है जिसमें आपकी पिछले साल की कमाई का हिसाब-किताब (Assessment) होता है. इसलिए 2025-26 की कमाई के लिए असेसमेंट ईयर 2026-27 कहलाएगा.

असेसमेंट ईयर (AY): 1 अप्रैल 2026 से फाइनेंशियल ईयर को टैक्स ईयर कहा जाएगा और असेसमेंट ईयर का कॉन्सेप्ट खत्म कर दिया गया है.

आपको यह रिटर्न 31 जुलाई 2026 तक भरना होगा. ध्यान रहे कि अभी पुराने टैक्स नियमों का ही पालन किया जा रहा है, इसलिए टैक्स की गणना में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, सिर्फ फॉर्म के फॉर्मेट में बदलाव हुआ है.

नए बदलावों का क्या होगा असर?

इन बदलावों का सबसे बड़ा असर यह होगा कि डेटा की शुद्धता बढ़ेगी. दो मोबाइल नंबर और ईमेल होने से विभाग को टैक्सपेयर से संपर्क करने में आसानी होगी. अक्सर ऐसा होता था कि पुराना नंबर बंद हो जाने के कारण लोगों को इनकम टैक्स के नोटिस या रिफंड की जानकारी नहीं मिल पाती थी. अब सेकंडरी जानकारी होने से यह समस्या खत्म हो जाएगी.

साथ ही, पते की जानकारी को अपडेट करने का विकल्प मिलने से उन लोगों को फायदा होगा जिनके पास अपना घर नहीं है और वे किराए पर रहते हैं. वे अपना एक परमानेंट एड्रेस और एक करंट एड्रेस दोनों दर्ज कर पाएंगे.

Conclusion

कुल मिलाकर, नए ITR फॉर्म का मकसद टैक्सपेयर के अनुभव को बेहतर बनाना है. दो पते और दो मोबाइल नंबर का विकल्प आपको और अधिक सुरक्षित बनाता है कि विभाग की कोई भी सूचना आप तक पहुंचने से नहीं चूकेगी. वहीं, प्रतिनिधियों के लिए नियमों को सरल बनाना और कैपिटल गेन की रिपोर्टिंग को आसान करना स्वागत योग्य कदम है. अगर आप 2026 में अपना रिटर्न भरने वाले हैं, तो इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों को अभी से नोट कर लें ताकि ऐन वक्त पर कोई परेशानी न हो.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या अब दो मोबाइल नंबर देना अनिवार्य है?

नहीं, यह एक विकल्प (Option) है ताकि संपर्क की जानकारी और पुख्ता हो सके.

Q2 यह नया फॉर्म किस साल की कमाई के लिए है?

यह फॉर्म वित्त वर्ष 2025-26 में की गई कमाई का रिटर्न भरने के लिए है.

Q3 असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख क्या है?

सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए इसकी आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है.

Q4 प्रतिनिधि को अब कौन सी जानकारी देनी होगी?

अब प्रतिनिधि को केवल नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी देनी होगी.

Q5 क्या टैक्स की दरों में भी कोई बदलाव हुआ है?

नहीं, इन नए फॉर्म्स में सिर्फ जानकारी देने के तरीके (Format) में बदलाव हुआ है, टैक्स रेट्स पुराने ही रहेंगे.

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