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इस वित्त वर्ष की शुरुआत में सरकार ने ₹25.20 लाख करोड़ डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का टारगेट रखा है. अब तक कुल टारगेट का 22.34% ही जुटाया गया है. टैक्स रिफंड्स की तेज प्रक्रिया, टैक्स राहत और कॉर्पोरेट खर्च बढ़ने से टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ा है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में 10 जुलाई तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 1.34% घटकर ₹5.63 लाख करोड़ रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹5.70 लाख करोड़ था. यह गिरावट मुख्य रूप से टैक्स रिफंड में तेज़ वृद्धि की वजह से आई है.
नेट कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 3.67% गिरकर ₹2 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹2.07 लाख करोड़ था. वहीं गैर-कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह (जिसमें व्यक्ति, HUF और फर्म शामिल हैं) ₹3.45 लाख करोड़ पर स्थिर रहा. Securities Transaction Tax (STT) से अब तक ₹17,874 करोड़ का संग्रह हुआ है.
इस बार सरकार ने ₹1.02 लाख करोड़ के टैक्स रिफंड जारी किए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 38% अधिक हैं. इस बढ़े हुए रिफंड का प्रभाव कुल कलेक्शन पर पड़ा है. हालांकि, ग्रॉस टैक्स कलेक्शन (रिफंड से पहले) में 3.17% की वृद्धि हुई है, जो अब ₹6.65 लाख करोड़ पर पहुंच गया है.
EY India के टैक्स पार्टनर समीर कनाबर के अनुसार, दो मुख्य कारणों से नेट कलेक्शन घटा है. व्यक्तिगत टैक्स के मोर्चे पर, नई टैक्स स्लैब से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को राहत मिल रही है, जिससे कुल टैक्स देनदारी घट रही है. कॉर्पोरेट टैक्स के मामले में, कंपनियों द्वारा किए गए पूंजीगत खर्च की वजह से डिप्रिसिएशन क्लेम बढ़े हैं, जिससे टैक्स पेमेंट में देरी हो रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने ₹25.20 लाख करोड़ डायरेक्ट टैक्स इकट्ठा करने का टारगेट रखा है, जो पिछले साल से 12.7% अधिक है. अब तक इस टारगेट का 22.34% ही हासिल हुआ है. STT से कुल ₹78,000 करोड़ जुटाने का अनुमान है.