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इन कार्ड्स में मिलने वाला पैसा आपकी सैलरी का हिस्सा तो होता है, लेकिन इस पर आपको टैक्स नहीं देना पड़ता.
Income Tax: अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आपने सोडेक्सो (Sodexo), प्लक्सी (Pluxee) या जैगल (Zaggle) जैसे मील कार्ड या वाउचर का नाम जरूर सुना होगा. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को खाने-पीने के लिए ये कार्ड देती हैं. मजेदार बात यह है कि इन कार्ड्स में मिलने वाला पैसा आपकी सैलरी का हिस्सा तो होता है, लेकिन इस पर आपको टैक्स नहीं देना पड़ता. इसे 'परक्विजिट' (Perquisite) या अतिरिक्त सुविधा माना जाता है.
इसे लेकर एक बड़ी उलझन यह रहती है कि जो लोग 'न्यू टैक्स रिजीम' (नई कर व्यवस्था) चुनते हैं, उन्हें यह फायदा मिलेगा या नहीं. दरअसल, यह फायदा दोनों ही टैक्स रिजीम में मिलता है. देखा जाए तो यह अतिरिक्त सुविधा आपकी कमाई में जुड़ती ही नहीं है, बल्कि मील कार्ड या रीइम्बर्समेंट की तरह आपको दी जाती है. इसे सरकार ने एक झटके में 4 गुना बढ़ा दिया है.
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पुराने नियमों के हिसाब से, एक कर्मचारी को एक बार के खाने (Meal) पर सिर्फ ₹50 तक की टैक्स छूट मिलती थी. महंगाई के इस दौर में ₹50 में भरपेट खाना मिलना मुश्किल है, इसलिए सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹200 प्रति मील कर दिया है.
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इसे एक छोटे से कैलकुलेशन से समझते हैं:
पुराना नियम: अगर आप महीने में 22 दिन काम करते हैं और दिन में दो बार खाना खाते हैं, तो आपको सालाना करीब ₹26,400 तक पर टैक्स छूट मिलती थी.
नया नियम (2026): अब ₹200 प्रति मील के हिसाब से इसी कैलकुलेशन पर आपकी सालाना टैक्स-फ्री बचत ₹1,05,600 तक जा सकती है.
यानी आपकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा अब टैक्स के दायरे से बाहर रह सकता है.

अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि न्यू टैक्स रिजीम में तो निवेश (जैसे 80C) पर छूट नहीं मिलती, तो मील कार्ड पर कैसे मिलेगी? यहां समझना जरूरी है कि मील कार्ड कोई 'डिडक्शन' (Deduction) या 'एग्जेंप्शन' (Exemption) नहीं है.
इनकम टैक्स की नजर में यह एक 'सुविधा' (Perquisite) है. नियम यह कहता है कि अगर कंपनी आपको खाना खिलाती है या उसके वाउचर देती है, तो उसे आपकी कमाई नहीं माना जाएगा, बशर्ते वह तय सीमा (₹200) के अंदर हो. चूंकि यह आपकी 'टोटल इनकम' में जुड़ता ही नहीं है, इसलिए न्यू टैक्स रिजीम की पाबंदियां इस पर लागू नहीं होतीं.
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भले ही यह स्कीम बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसे इस्तेमाल करने के कुछ नियम हैं:
सिर्फ खाने की जगहों पर इस्तेमाल: ये वाउचर या कार्ड सिर्फ ऐसी जगहों पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो खाने-पीने का सामान बेचते हैं (जैसे रेस्टोरेंट या ईटिंग जॉइंट्स).
नॉन-ट्रांसफरेबल: आप अपना मील कार्ड किसी और को नहीं दे सकते. यह सिर्फ कर्मचारी के इस्तेमाल के लिए है.
शराब वर्जित: इन वाउचर का इस्तेमाल शराब या नशीले पदार्थों के लिए नहीं किया जा सकता. सिर्फ खाना और बिना अल्कोहल वाले पेय पदार्थ (जैसे जूस, कोल्ड ड्रिंक) ही इसमें शामिल हैं.
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अगर आपकी कंपनी मील कार्ड की सुविधा देती है, तो तुरंत अपने HR विभाग से बात करें और अपनी सैलरी स्ट्रक्चर में इसे शामिल करवाएं. ₹200 प्रति मील की यह नई लिमिट आपकी टैक्स देनदारी को काफी हद तक कम कर सकती है, फिर चाहे आपने कोई भी टैक्स रिजीम चुनी हो. यह न केवल आपके खाने का खर्च बचाएगा, बल्कि आपकी जेब में ज्यादा पैसे भी छोड़ेगा.
1- क्या मैं मील कार्ड से घर का राशन खरीद सकता हूं?
आयकर नियमों के अनुसार, ये वाउचर केवल 'ईटिंग जॉइंट्स' पर इस्तेमाल होने चाहिए, हालांकि कई ग्रोसरी स्टोर्स इसे स्वीकार करते हैं, लेकिन नियम इसे भोजन के लिए ही बताते हैं.
2- क्या ₹200 से ऊपर के खर्च पर टैक्स लगेगा?
हां, अगर एक मील की वैल्यू ₹200 से ज्यादा है, तो ऊपर की राशि आपकी सैलरी में 'परक्विजिट' के तौर पर जुड़ेगी और उस पर टैक्स लगेगा.
3- क्या चाय-नाश्ते पर भी यही लिमिट है?
नहीं, ऑफिस में काम के दौरान मिलने वाली चाय, कॉफी या हल्के नाश्ते पर कोई टैक्स नहीं लगता और इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है.
4- अगर कंपनी कार्ड की जगह नकद पैसे दे तो?
अगर कंपनी मील वाउचर के बजाय आपकी सैलरी में 'मील अलाउंस' के नाम पर कैश देती है, तो वह पूरी तरह से टैक्सेबल होगा. फायदा सिर्फ वाउचर या डिजिटल कार्ड (जैसे Sodexo) पर ही मिलता है.
5- क्या यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों कर्मचारियों के लिए है?
हां, यह नियम सभी वेतनभोगी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है.
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