Budget 2026: क्या शेयर बाजार की कमाई पर टैक्स का बोझ होगा कम? निवेशकों ने सरकार से की ये मांग

Budget 2026: मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने सुझाव दिया कि सरकार को ट्रांजैक्शन टैक्सों में और बढ़ोतरी करने से बचना चाहिए.
Budget 2026: क्या शेयर बाजार की कमाई पर टैक्स का बोझ होगा कम? निवेशकों ने सरकार से की ये मांग

STT-ट्रांजैक्शन टैक्स न बढ़ाने की अपील.

Budget 2026: 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 बजट पेश होगा. वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण वित वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगी. बजट से पहले कई मार्केट एक्सपर्ट्स ने अपनी मांगे सरकार के सामने रखी है. मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने आम बजट से पहले सरकार से कैपिटल मार्केट टैक्सेशन को आसान बनाने का आग्रह किया है, जिसमें लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर छूट सीमा को ज्यादा बढ़ाने की मांग शामिल है.

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को ट्रांजैक्शन टैक्सों में और बढ़ोतरी करने से बचना चाहिए. आम बजट 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाएगा. बता दें कि NSE और BSE रविवार (1 फरवरी) को लाइव ट्रेडिंग करेंगे, जब यूनियन बजट पेश किया जाएगा.

LTCG टैक्स-फ्री एग्जेम्पशन लिमिट बढ़ाने की मांग

मार्केट स्टेकहोल्डर्स ने रिटेल और लॉन्ग-टर्म निवेशकों को ज्यादा राहत देने के लिए इक्विटी निवेश से होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स-फ्री एग्जेम्पशन लिमिट को बढ़ाने की मांग की है. जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी LTCG के लिए टैक्स-फ्री एग्जेम्पशन लिमिट को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना चाहिए.

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लॉन्ग-टर्म की परिभाषा स्टैंडराइज्ड करने की मांग

फर्म ने जटिलता को कम करने और टैक्स क्लैरिटी में सुधार के लिए इक्विटी (Equity), डेट (Debt), सोना (Gold) और रियल एस्टेट (Real Estate) सहित सभी एसेट क्लास में लॉन्ग-टर्म’ की परिभाषा को 12 महीने के रूप में स्टैंडराइज्ड करने की भी मांग की है. इसके अलावा, इसने कैपिटल लॉस को अन्य मदों के तहत होने वाली आय के साथ समायोजित करने की मंजूरी देने की मांग भी की है.

STT-ट्रांजैक्शन टैक्स न बढ़ाने की अपील

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने ट्रांजैक्शन से संबंधित टैक्सों में किसी भी तरह की और बढ़ोतरी के खिलाफ चेतावनी दी है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्ट और चीफ एग्जक्यूटिव ऑफिसर धीरज रेली ने कहा कि स्टेकहोल्डर्स ने सट्टा कारोबार के बजाय लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए कैश इक्विटी ट्रेडर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को डेरिवेटिव की तुलना में कम रखने का प्रस्ताव दिया है.

उन्होंने शेयर बायबैक के केवल प्रॉफिट वाले हिस्से पर टैक्स लगाने और घरेलू निवेशकों के लिए डिविडेंड टैक्स की दरों को नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) पर लागू होने वाले टैक्स के अनुरूप बनाने का भी सुझाव दिया.

कैपिटल गेन्स टैक्स घटाकर 10% करने का सुझाव

FYERS के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तेजस खोडे ने कहा कि सरकार को STT को और नहीं बढ़ाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दोनों को घटाकर 10% करने से रिटेल निवेशकों की भागीदारी में काफी बढ़ोतरी होगी.

सोना-चांदी पर पर नहीं बढ़ेगी इंपोर्ट ड्यूटी

खोडे ने यह भी उम्मीद जताई कि सोने (Gold) और चांदी (Silver) पर इंपोर्ट ड्यूटी और नहीं बढ़ाई जाएगी, क्योंकि ये एसेट इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव और रुपये की गिरावट के खिलाफ महत्वपूर्ण हेजिंग इंस्ट्रूमेंट बने हुए हैं.

खबर से जुड़े FAQs

1. अभी LTCG पर कितनी टैक्स-फ्री छूट है?
इक्विटी LTCG पर 1.25 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है.

2. बजट में क्या बदलाव होने की उम्मीद है?
LTCG टैक्स फ्री लिमिट 2 लाख रुपये तक बढ़ सकती है.

3. STT न बढ़ाने की मांग क्यों है?
ज्यादा STT से ट्रेडिंग महंगी बनाता है.

4. क्या सोने-चांदी पर टैक्स बढ़ सकता है?
एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि इंपोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ेगी.

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(Input- PTI)