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Income Tax: भारत के टैक्स इतिहास में 1 अप्रैल 2026 एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ है. इस दिन से दशकों पुराना 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' विदा हो गया है और उसकी जगह 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' पूरी तरह लागू हो गया है. लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे बड़ा कनफ्यूजन उन नौकरीपेशा लोगों को है, जिनकी मार्च महीने की सैलरी आखिरी तारीख के बजाय अप्रैल महीने की पहली तारीख को आई है.
अगर आपकी मार्च 2026 की मेहनत की कमाई 1 अप्रैल 2026 को आपके खाते में आती है, तो यह सिर्फ एक दिन की देरी नहीं है, बल्कि यह आपके टैक्स के पूरे कानून को बदल देने वाली घटना है. टैक्स इस आधार पर नहीं लगता कि आपने पैसा कब कमाया, बल्कि इस आधार पर लगेगा कि पैसा आपके हाथ में 'कब' आया.
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टैक्स विभाग का नियम बहुत सीधा है. इनकम टैक्स के लिए 'पेमेंट डेट' यानी भुगतान की तारीख ही सबसे महत्वपूर्ण होती है. इसे 'पे-एज-यू-अर्न' (Pay-as-you-earn) सिद्धांत कहा जाता है.
केस 1: अगर आपकी मार्च 2026 की सैलरी 31 मार्च 2026 या उससे पहले खाते में आ गई, तो आप पर पुराना 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' लागू होगा. आईटीआर भरते वक्त आप यह कमाई वित्त वर्ष 2025-26 में दिखाएंगे.
केस 2: अगर वही सैलरी 1 अप्रैल 2026 को या उसके बाद आती है, तो आप पर नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' लागू हो जाएगा. आईटीआर भरते वक्त आप यह कमाई वित्त वर्ष 2026-27 में दिखाएंगे.
इसका मतलब यह हुआ कि काम आपने पुराने साल में किया, लेकिन उस पर टैक्स के नियम नए साल वाले लगेंगे. यह उन लोगों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है जो पुराने कानून के हिसाब से अपनी टैक्स प्लानिंग कर चुके थे.
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अब तक सैलरी पर टीडीएस (TDS) काटने के लिए धारा 192(1) का इस्तेमाल होता था. लेकिन 1 अप्रैल 2026 के बाद इसकी जगह धारा 392(1) ने ले ली है. यह नई धारा ही अब तय करेगी कि आपकी इनहैंड सैलरी कितनी होगी.
इस धारा के तहत एम्प्लॉयर (कंपनी) की यह जिम्मेदारी है कि जब वह सैलरी का भुगतान करे, तभी टैक्स काट ले. यह कटौती उस 'टैक्स ईयर' की दरों पर आधारित होगी, जिसमें भुगतान किया जा रहा है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अब 'प्रिवियस ईयर' (Previous Year) और 'असेसमेंट ईयर' (Assessment Year) जैसे भारी-भरकम शब्दों को खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ एक ही शब्द होगा- 'टैक्स ईयर' (Tax Year), जो वित्त वर्ष को ही कहा जाएगा.
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मान लीजिए आपकी मासिक सैलरी 1,00,000 रुपये है.
| आधार (Criteria) | 31 मार्च 2026 को भुगतान | 1 अप्रैल 2026 को भुगतान |
| लागू कानून | इनकम टैक्स एक्ट, 1961 | इनकम टैक्स एक्ट, 2025 |
| टीडीएस सेक्शन | धारा 192 | धारा 392(1) |
| टैक्स गणना आधार | वित्त वर्ष 2025-26 में | वित्त वर्ष 2026-27 में |
| असर (Impact) | वित्त वर्ष 2025-26 की कुल कमाई कम दिखेगी | वित्त वर्ष 2026-27 में कमाई ज्यादा दिखेगी |
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इनकम टैक्स एक्ट 2025 का आना भारत की टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. हालांकि, ट्रांजिशन यानी बदलाव के इस दौर में थोड़ी सावधानी जरूरी है. अगर आपकी सैलरी अप्रैल में क्रेडिट हुई है, तो वह आपकी वित्त वर्ष 2026-27 की कमाई मानी जाएगी.
1- क्या मार्च का काम करने पर भी नए कानून से टैक्स लगेगा?
हां, अगर सैलरी का भुगतान 1 अप्रैल या उसके बाद होता है, तो नया कानून ही लागू होगा.
2- धारा 392(1) क्या है?
यह नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 की वह धारा है जो सैलरी पर टीडीएस काटने का नियम तय करती है.
3- क्या मेरी पुरानी टैक्स बचत (जैसे LIC, PPF) बेकार हो जाएगी?
नहीं, लेकिन उन्हें अब नए कानून के सेक्शन और नियमों के तहत क्लेम करना होगा.
4- 'टैक्स ईयर' का क्या मतलब है?
नए कानून में असेसमेंट ईयर को खत्म कर अब सीधे 'टैक्स ईयर' कहा जाएगा, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होगा.
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