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ITR Filing: आज के वक्त में मेडिकल खर्च कितना महंगा हो गया है, ये कोई दबी-छुपी बात नहीं है. कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि दोस्तों-रिश्तेदारों तक से मदद मांगनी पड़ जाती है. कुछ लोग तो क्राउडफंडिंग के जरिए भी लोगों से पैसे जुटाते हैं, ताकि अस्पताल के खर्चों से निपटा जा सके. अब सवाल ये उठता है कि क्या दूसरों से लिए गए इन पैसों पर भी आपको टैक्स चुकाना होगा? आइए समझते हैं इसे लेकर क्या कहता है इनकम टैक्स का नियम.
Income Tax Act की धारा 56(2)(x) के मुताबिक, अगर कोई रकम रिश्तेदार से बिना किसी लेन-देन के मिली है, तो वह टैक्स के दायरे में नहीं आती. वहीं दूसरी ओर, जो पैसे दोस्तों और जान-पहचान वालों से मिले हैं, उस पर मामला थोड़ा उलझा हुआ है. इस पर कुछ मामलों में टैक्स लग सकता है और कुछ में नहीं.
कुछ समय पहले ITAT (इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल) ने एक केस में फैसला सुनाया था कि अगर किसी ने क्राउडफंडिंग से पैसे जुटाए और उसे अपने निजी खाते में मिलाकर खर्च किया, तो यह राशि टैक्सेबल मानी जाएगी. हालांकि, इसका कारण ये बताया गया कि फंड्स को अलग नहीं रखा गया था और उन्हें पूरी तरह उसी उद्देश्य के लिए खर्च नहीं किया गया, जिसके लिए उन्हें जुटाया गया था.
अगर आप यह साबित कर सकें कि वह पैसा सिर्फ हॉस्पिटल और रिहैब खर्चों पर ही खर्च हुआ है, तो टैक्स से बचा सकता है. इसके लिए आपके पास पूरा रिकॉर्ड (बिल, ट्रांजैक्शन डिटेल्स, मैसेज आदि) मौजूद होना चाहिए. ऐसे में आप ये तर्क दे सकते हैं कि यह पैसा इमर्जेंसी में मेडिकल खर्च के लिए दिया गया था, ना कि यह आपकी इनकम है.
दोस्तों और परिचितों से मिली रकम पर टैक्स लग सकता है, लेकिन अगर आपके पास पूरा दस्तावेजी सबूत है कि यह पैसा सिर्फ इलाज के लिए लिया और खर्च किया गया, तो आप इसे टैक्स से बचा सकते हैं. तो गलती से भी दस्तावेजी सबूत खोएं ना और उन्हें संभाल कर रखें. हालांकि, यह मामला कानूनी रूप से विवादास्पद है, इसलिए सावधानी जरूरी है. टैक्स अधिकारियों को सही और पूरे कागजात देना बहुत जरूरी होगा. तो अगर आप दूसरों से पैसे ले रहे हैं, तो उससे जुड़े तमाम दस्तावेज संभाल कर रखें.