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ITR Filing: इनकम टैक्स (Income Tax) बचाने के लिए कई लोग होशियारी दिखाते हैं और फर्जी डिडक्शन या एग्जेम्प्शन दिखा देते हैं. बहुत सारे सीए भी ऐसा करते हैं. उन्हें लगता है कि आयकर विभाग को क्या ही पता चलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है. आयकर विभाग को सब दिखता है और इसी का नतीजा है कि आयकर विभाग ने ऐसे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर एक बड़ी कार्रवाई की है.
आयकर विभाग ने ऐसे फर्जीवाड़े पकड़ने के लिए एआई का भी इस्तेमाल किया है. इस जांच में इनकम टैक्स विभाग ने थर्ड पार्टी से मिले फाइनेंशियल डेटा, तमाम जानकारी और एडवांस्ड AI टूल्स की मदद से फर्जी क्लेम की पहचान की. इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश में एक साथ छापेमारी की गई. अब सवाल ये है कि आखिर एआई से फर्जीवाड़े पकड़े कैसे जाते हैं.
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आम तौर पर जब कभी तमाम जानकारियों और फॉर्म के मिलान किए जाते हैं तो बारीक गलतियां छूट जाती हैं. बस इसी का फायदा सीए उठा रहे थे. लेकिन एआई कोई इंसान नहीं, बल्कि एक तरह की मशीन है, जिसने हर छोटी-बड़ी गलती सामने ला दी. जैसे ही मिलान किए गए, तुरंत पता चल गया कि किस-किस ने फर्जीवाड़ा किया है.
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आयकर विभाग को ये फर्जीवाड़े पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिले हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुरानी टैक्स व्यवस्था में बहुत सारी चीजों पर टैक्स छूट मिलती है. ऐसे कई सारे डिडक्शन हैं, जिनका फायदा उठाया जा सकता है. इन्हीं का फायदा उठाते हुए फर्जीवाड़ों को अंजाम दिया जा रहा है.
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कई लोग फर्जी रेंट रिसीप्ट दिखाकर एचआरए के तहत कुछ अमाउंट क्लेम करते हैं. उस अमाउंट को आयकर विभाग शख्स के मकान मालिक के पैन नंबर पर भेजे गए अमाउंट से मिलाता है. अगर दोनों में अंतर पाया जाता है तो आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेज दिया जाता है. पिछले कुछ सालों में आयकर विभाग को ऐसे कई मामले देखने को मिले, जिसमें कई-कई लोगों ने एक ही पैन नंबर का इस्तेमाल किया है.
जांच में यह भी सामने आया कि कई मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs), सरकारी विभागों, पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (PSUs), शिक्षण संस्थानों और बिजनेस से जुड़े लोग इन फर्जी स्कीम्स का हिस्सा थे. इन्हें ज्यादा रिफंड का लालच देकर कमीशन के बदले फर्जी रिटर्न भरवाया गया. विभाग ने यह भी कहा कि कई ITR भरने वाले बिचौलिये फर्जी ईमेल आईडी बनाकर थोक में रिटर्न भरते हैं और बाद में उन ईमेल्स को छोड़ देते हैं, जिससे टैक्स विभाग के नोटिस उन तक पहुंच ही नहीं पाते.
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इनकम टैक्स विभाग अब इन फर्जी क्लेम्स के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. इसमें पेनल्टी से लेकर कानूनी कार्यवाही तक हो सकती है. फिलहाल कई जगहों पर जांच जारी है. इस दौरान डिजिटल रिकॉर्ड समेत कई अहम सबूत मिले हैं, जो इन फर्जीवाड़ों के पीछे के नेटवर्क को बेनकाब करने में मदद करेंगे.
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विभाग ने बताया कि बीते 4 महीनों में करीब 40,000 टैक्सपेयर्स ने अपने रिटर्न अपडेट किए हैं और करीब ₹1045 करोड़ के फर्जी क्लेम खुद ही वापस ले लिए हैं. हालांकि, अब भी कई लोग इन गलत सलाह देने वाले एजेंट्स के झांसे में फंसे हुए हैं. इनकम टैक्स विभाग ने लोगों से अपील की है कि वह ईमानदारी से अपनी आय और सही कॉन्टैक्ट डिटेल्स दें और किसी भी अनाधिकृत सलाहकार के बहकावे में न आएं जो अधिक रिफंड का झांसा देकर फंसाते हैं.