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इनकम टैक्स (Income Tax) भरने का समय जब भी पास आता है, तो हर किसी के मन में बस एक ही सवाल होता है कि क्या इस बार कुछ बदला है? असेसमेंट ईयर 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) के लिए सरकार ने जो नए नियम और फॉर्म नोटिफाई किए हैं, उनमें वाकई कुछ ऐसे बदलाव हैं जो आपकी मुश्किलों को कम करेंगे. 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट पूरी तरह प्रभावी हो गया है, जिसने टैक्स फाइलिंग के पुराने तरीकों को काफी हद तक बदल दिया है.
सबसे बड़ी खुशखबरी उन लोगों के लिए है जो सैलरी के साथ-साथ थोड़ा-बहुत शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. अब तक नियम यह था कि अगर आपको शेयर बाजार से एक रुपये का भी कैपिटल गेन (मुनाफा) होता था, तो आपको मुश्किल भरा ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था. लेकिन अब सरकार ने छोटे निवेशकों के लिए ITR-1 (सहज) के दरवाजे खोल दिए हैं.
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अभी तक के नियमों के अनुसार, ITR-1 सिर्फ उन लोगों के लिए था, जिनकी कमाई सैलरी, एक घर और ब्याज से होती थी. अगर आपने कोई शेयर बेचा और उस पर मुनाफा हुआ, तो आपको तुरंत ITR-2 पर शिफ्ट होना पड़ता था. लेकिन इस बार से इसमें एक बड़ा 'ट्विस्ट' आया है.
अब अगर आपने लिस्टेड इक्विटी शेयर या इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कमाया है और यह मुनाफा ₹1.25 लाख तक है, तो आप निश्चिंत होकर ITR-1 भर सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों को फायदा होगा, जिन्हें छोटे-मोटे मुनाफे के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट के चक्कर लगाने पड़ते थे.
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एक और बड़ा बदलाव जो इस साल देखने को मिल रहा है, वह है हाउस प्रॉपर्टी से जुड़ी आय. पुराने नियमों में अगर आपके पास दो घर हैं और दोनों से किराया आ रहा है, तो आप ITR-1 के हकदार नहीं थे. आपको ITR-2 का इस्तेमाल करना होता था.
नए अपडेट के बाद, अगर आपकी आय दो हाउस प्रॉपर्टी से है, तब भी आप ITR-1 का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद निवेश के तौर पर दूसरा घर खरीदा है और उससे किराया कमा रहे हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि आपकी कुल सालाना कमाई ₹50 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
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बजट 2024-25 में टैक्स की दरों को लेकर जो घोषणाएं की गई थीं, वह अब इस साल के रिटर्न में पूरी तरह लागू होंगी. पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर अलग-अलग रेट्स (10% और 12.5%) हुआ करते थे, जिससे काफी कन्फ्यूजन रहता था.
अब सरकार ने इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स पर LTCG की दर 12.5% तय कर दी है. इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा. वहीं, कुछ मामलों में जहां इंडेक्सेशन लागू होता है, वहां दर 20% रहेगी. जब आप इस साल अपना रिटर्न फाइल करेंगे, तो आपको इन्हीं नई दरों के हिसाब से अपनी गणना करनी होगी.
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भले ही ITR-1 के दायरे को बढ़ाया गया है, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी हैं जहां आपको ITR-2 ही भरना पड़ेगा. इसे अनदेखा करना आपके रिटर्न को 'डिफेक्टिव' (खामियों वाला) बना सकता है.
आय की सीमा: अगर आपकी कुल सालाना आय ₹50 लाख से ₹1 भी ऊपर है.
मुनाफे की सीमा: अगर शेयर बाजार से आपका लॉन्ग टर्म मुनाफा ₹1.25 लाख से ज्यादा है.
शॉर्ट टर्म मुनाफा: अगर आपने शेयर बेचकर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कमाया है, तो ITR-1 आपके काम नहीं आएगा.
विदेशी संपत्ति: अगर आपके पास विदेश में कोई संपत्ति है या विदेशी बैंक में खाता है.
डायरेक्टरशिप: अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं या आपके पास अनलिस्टेड शेयर हैं.
खेती से आय: अगर आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5000 से अधिक है.
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टैक्स फाइल करते समय अक्सर लोग जल्दबाजी में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बाद में बहुत भारी पड़ती हैं. आइए जानते हैं वह कौन सी बातें हैं, जिनका आपको खास ख्याल रखना है:
1- गलत फॉर्म का चुनाव: सिर्फ आसानी के चक्कर में ITR-1 न चुनें. अगर आपकी आय के स्रोत इस फॉर्म की शर्तों को पूरा नहीं करते, तो आपका रिटर्न रद्द हो सकता है.
2- सिर्फ फॉर्म-16 पर भरोसा: लोग अक्सर सोचते हैं कि जो कंपनी ने फॉर्म-16 में लिख दिया, वही अंतिम है. जबकि आपको बैंक ब्याज, एफडी का ब्याज और डिविडेंड को अलग से जोड़ना होता है.
3- आय छुपाना: अपनी साइड इनकम या फ्रीलांसिंग से हुई कमाई को न छुपाएं. सेक्शन 270A के तहत आय छुपाने पर 200% तक की पेनल्टी लग सकती है.
4- बैंक अकाउंट का सत्यापन: अपने बैंक खाते को 'Pre-validate' जरूर करें. अगर आपका खाता वैलिडेट नहीं है, तो आपका रिफंड अटक सकता है.
5- गलत कटौती (Deductions) का दावा: किसी भी सेक्शन के तहत वही छूट मांगें, जिनके आपके पास सबूत हों. झूठे दावे करना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है.
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असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी बनाया गया है. सरकार का मकसद साफ है- ईमानदार टैक्सपेयर्स को आसानी हो और टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम कसी जाए. ITR-1 में हुए बदलाव छोटे निवेशकों और दो घर वालों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं हैं. बस जरूरत है तो थोड़ी सावधानी की और AIS के साथ तालमेल बिठाने की. याद रखें, अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 है, लेकिन आखिरी वक्त की भीड़ से बचने के लिए समय रहते अपनी तैयारी शुरू कर दें.
1- क्या मैं 2026 में 1.50 लाख के शेयर मुनाफे पर ITR-1 भर सकता हूं?
नहीं, ITR-1 के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की अधिकतम सीमा 1.25 लाख रुपये तय की गई है.
2- क्या किराए से होने वाली आय पर ITR-1 भरा जा सकता है?
हां, अब आप दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली किराए की आय को ITR-1 में दिखा सकते हैं.
3- आय छुपाने पर कम से कम कितनी पेनल्टी लगती है?
आय छुपाने या गलत जानकारी देने पर टैक्स चोरी की राशि का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लग सकता है.
4- क्या ITR-1 भरने के लिए AIS देखना अनिवार्य है?
कानूनी रूप से अनिवार्य न सही, लेकिन डेटा के मिलान और नोटिस से बचने के लिए AIS देखना बेहद जरूरी है.
5- क्या फ्रीलांसिंग से हुई कमाई को ITR-1 में दिखा सकते हैं?
नहीं, फ्रीलांसिंग या किसी भी बिजनेस/प्रोफेशन से हुई कमाई के लिए आपको ITR-3 या ITR-4 का उपयोग करना होगा.
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