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क्रिप्टो की दुनिया में इनकम टैक्स की एंट्री!
अगर आप भी क्रिप्टो की दुनिया में ट्रेडिंग करते हैं और आपको लगता है कि विदेशी एक्सचेंज पर ट्रेड करके आप टैक्स विभाग की नजरों से बच सकते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है.
भारत सरकार अब एक ऐसे ग्लोबल सिस्टम में शामिल होने जा रही है, जहां दुनिया भर के देश आपस में क्रिप्टो डेटा शेयर करेंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि 2027 से आपके क्रिप्टो पोर्टफोलियो की एक-एक फाइल इनकम टैक्स विभाग के पास होगी.
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह विदेशी प्लेटफार्मों पर होने वाली क्रिप्टो ट्रेडिंग पर कड़ी नजर रखने वाली है. इसके लिए 'क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क' (CARF) का सहारा लिया जा रहा है. यह एक ऐसा इंटरनेशनल सिस्टम है जिसे OECD (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) लीड कर रहा है.
भारत 1 अप्रैल, 2027 से इस सिस्टम के जरिए डेटा शेयर करना शुरू कर देगा. इसका मतलब यह है कि अगर कोई भारतीय यूजर किसी विदेशी एक्सचेंज पर भी ट्रेड कर रहा है, तो उस देश की अथॉरिटी भारत के टैक्स विभाग को ऑटोमेटिक तरीके से इसकी जानकारी दे देगी. अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए टेक्निकल फॉर्मेट तैयार किया जा रहा है और अगले कुछ महीनों में इसे जारी कर दिया जाएगा.
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भारत सरकार का 'क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क' इस तरह से काम करेगा कि अगर कोई भारतीय यूजर किसी विदेशी प्लेटफॉर्म पर जाकर ट्रेडिंग करता है, तो वह देश भारत के साथ खुद ही डेटा शेयर कर देगा. सरकार का मानना है कि बहुत सारे भारतीय यूजर विदेशी एक्सचेंज का इस्तेमाल टैक्स चोरी और गलत वित्तीय कामों के लिए कर रहे हैं. अब ग्लोबल तालमेल के जरिए ऐसे हर ट्रांजेक्शन को ट्रैक किया जाएगा.
सरकार को सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि भारतीय यूजर्स का एक बड़ा हिस्सा विदेशी क्रिप्टो प्लेटफार्मों का इस्तेमाल करता है. घरेलू स्तर पर इन पर निगरानी रखना मुश्किल होता है, जिससे टैक्स चोरी और अवैध धन के लेनदेन का खतरा बढ़ जाता है.
भारत का यह कदम 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स' (FATF) की सिफारिशों के मुताबिक भी है. FATF ने डिजिटल एसेट्स की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की सलाह दी थी. अब सरकार भारतीय और विदेशी दोनों तरह के एक्सचेंजों को जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है.
क्रिप्टो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इन नए नियमों से एक्सचेंजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पहले से ही क्रिप्टो प्रॉफिट पर 30 परसेंट टैक्स और हर ट्रांजेक्शन पर 1 परसेंट TDS लागू है. अब इन नए रिपोर्टिंग नियमों और जुर्माने के कारण डोमेस्टिक एक्सचेंजों के लिए ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाएगा.
सरकार अब इन एक्सचेंजों के साथ बातचीत करने की योजना बना रही है ताकि डेटा शेयरिंग में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर किया जा सके. कुल मिलाकर, 2027 के बाद क्रिप्टो ट्रेडिंग का पूरा खेल पूरी तरह पारदर्शी होने वाला है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में साफ कर दिया है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अगर कोई एक्सचेंज या प्लेटफॉर्म ट्रांजेक्शन की जानकारी देने में देरी करता है या गलती करता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगेगा.
200 रुपये रोजाना का जुर्माना: अगर रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की गई, तो 1 अप्रैल 2026 से हर दिन के हिसाब से पेनाल्टी देनी होगी.
50,000 रुपये का फ्लैट जुर्माना: अगर कोई गलत जानकारी दी गई या गलती को सुधारा नहीं गया, तो सीधे 50 हजार रुपये की चपत लगेगी. यह सब इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत किया जा रहा है ताकि लोग अपनी क्रिप्टो संपत्ति का सही खुलासा करें.