इग्नोर मत कर देना! ITR भरते वक्त ज्यादातर लोग यहीं फंसते हैं, अपना अच्छा-खास मुनाफा गंवा देते हैं TAX में!

अगर आपको भी कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो आपको इनकम टैक्स से जुड़े उसके नियम पता होने चाहिए. साथ ही आपको ये भी पता होना चाहिए कि आपको कौन सा आईटीआर फॉर्म भरना है. बता दें कि शेयर बाजार से हुई कमाई कैपिटल गेन ही होती है.
इग्नोर मत कर देना! ITR भरते वक्त ज्यादातर लोग यहीं फंसते हैं, अपना अच्छा-खास मुनाफा गंवा देते हैं TAX में!

Income Tax: इस साल से लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (Long/Short term capital gain) के नियमों में कुछ बदलाव हुआ है, जिनकी घोषणा बजट (Budget) में की गई थी. साथ है कैपिटल गेन टैक्स के नियमों (Capital Gain tax rules) में भी बदलाव हुआ है. यह बदलाव 23 जुलाई 2024 से हुए हैं. ऐसे में अब कैपिटल गेन की गणना 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद में दो तरीके से की जाती है.

अगर आपको भी कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो आपको इनकम टैक्स से जुड़े उसके नियम पता होने चाहिए. साथ ही आपको ये भी पता होना चाहिए कि आपको कौन सा आईटीआर फॉर्म भरना है. बता दें कि शेयर बाजार से हुई कमाई कैपिटल गेन ही होती है. आइए जानते हैं कैपिटल गेन के बारे में सब कुछ.

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क्या होता है लॉन्ग और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन?

लिस्टेड फाइनेंशियल एसेट्स के लिए होल्डिंग पीरियड 12 महीने से ज्यादा होने पर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाएगा. वहीं दूसरी ओर अगर होल्डिंग पीरियड 12 महीने से कम है, तो उससे हुए फायदे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाएगा. वहीं अनलिस्टेड और नॉन फाइनेंशियल एसेट्स के लिए LTCG की अवधि 2 साल कर दी गई है. इसके अलावा अनलिस्टेड बॉन्ड्स, डिबेंचर, डेट म्यूचुअल फंड्स और मार्केट लिंक्ड डिबेंचर पर कैपिटल गेन इन्वेस्टर के इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक लगता है.

क्या हैं लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के नियम

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के नए नियम 23 जुलाई 2024 से लागू हो चुके हैं. यानी आपको आईटीआर फाइल करते वक्त 23 जुलाई से पहले और बाद के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का कैलकुलेशन अलग-अलग करना होगा. नए नियम के अनुसार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5 फीसदी हो गया है, जो पहले 10 फीसदी था. साथ ही LTCG की छूट की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया गया है.

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी जान लें

अगर आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन हुआ है तो उस पर 23 जुलाई से पहले आपको 15 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होगा, जबकि 23 जुलाई के बाद से आपको 20 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होगा. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत कोई भी टैक्स छूट नहीं है. यानी भले ही आपको 100 रुपये का मुनाफा हो या 1 लाख का, सभी पर आपको फ्लैट 20 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होगा.

घरों के मामले में कैलकुलेशन थोड़ा अलग है

एलटीसीजी पर इनकम टैक्स के नए नियम के अनुसार अगर आप अपना घर बेचकर उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कमाते हैं, तो उस पर टैक्स की दर पहले की तुलना में कम लगेगी. पहले यह रेट 20 फीसदी हुआ करता था, जिसे अब सरकार ने घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया है. हालांकि, नए नियम में एक शर्त ये है कि इसके तहत टैक्स कैलकुलेशन करते वक्त आप इंडेक्सेशन का फायदा नहीं ले सकते हैं.

यहां एक अच्छी बात ये है कि सरकार ने लोगों को नए और पुराने दोनों तरह के टैक्स सिस्टम में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया है. यानी अगर आपको इंडेक्सेशन के साथ 12.5 फीसदी की दर से कम कैपिटल गेन टैक्स लग रहा है, तो इसे चुन लें, वरना 20 फीसदी वाला टैक्स चुन लें. देखा जाए तो अब एलटीसीजी टैक्सेशन में भी इनकम टैक्स (Income Tax) की तरह नया और पुराना टैक्स सिस्टम बन गया है.

इंडेक्सेशन क्या होता है?

इंडेक्सेशन एक सूचकांक होता है, जिसमें असेट्स की कीमत को महंगाई के हिसाब से समायोजित किया जाता है. इस इंडेक्स को हर साल अपडेट किया जाता है. मान लीजिए आपने कोई प्रॉपर्टी 1970 में खरीदी है तो अगर आप उसको 2024 में बेचते हैं तो उसकी वैल्यू इस बीच के इन 54 सालों की महंगाई को जोड़ते हुए निकाली जाएगी. इस तरह आपके घर की वैल्यू आज के वक्त में जो निकलेगी, उसमें महंगाई को भी जोड़ा जाएगा.

किसे भरना चाहिए कौन सा आईटीआर फॉर्म?

अगर आपको कैपिटल गेन हुआ है तो उसका टैक्स के लिए आपको आईटीआर-2 फॉर्म भरना होता है. हालांकि, अगर आप एक नौकरीपेशा हैं और आपको 1.25 लाख रुपये से कम का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है, तो अब आप इसे आटीआर-1 में ही दिखा सकते हैं.

बता दें आईटीआर-2 फॉर्म खासकर उन लोगों के लिए है जिन्हें सैलरी या पेंशन से इनकम होती है या जिनकी एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी हैं. अगर आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी जैसी किसी चीज को बेचकर कैपिटल गेन कमाया है, तो भी आपको ITR-2 फॉर्म भरना होता है. अगर आपकी सालाना इनकम ₹50 लाख से ज्यादा है या आपके पास विदेश में संपत्ति है, तो ITR-1 की जगह ITR-2 फॉर्म भरना जरूरी है.

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