Job करते हैं.. ITR Filing की जल्दबाजी बिल्कुल मत करना, 15 जून तक तो रुक ही जाओ.. वरना कहीं IT Notice ना आ जाए!

आयकर विभाग की तरफ से सभी ITR फॉर्म जारी हो चुके हैं, लेकिन फिर भी नौकरीपेशा लोगों को 15 जून तक इंतजार करना चाहिए. इसका मुख्य कारण यह है कि नियोक्ताओं, बैंकों और म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास टीडीएस (TDS) और वित्तीय लेनदेन (SFT) का डेटा सरकार को सौंपने के लिए 31 मई तक का समय होता है. ऐसे में अगर आप पहले ही आईटीआर फाइल करेंगे तो कुछ मिसमैच हो सकता है.
Job करते हैं.. ITR Filing की जल्दबाजी बिल्कुल मत करना, 15 जून तक तो रुक ही जाओ.. वरना कहीं IT Notice ना आ जाए!

आयकर विभाग की तरफ से सभी ITR फॉर्म जारी हो चुके हैं, अब लोग धीरे-धीरे आईटीआर फाइलिंग शुरू कर रहे हैं. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर AY 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर FY 2025-26) के लिए ITR-1 से लेकर ITR-7 तक के सभी इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म और अपडेटेड रिटर्न फॉर्म (ITR-U) जारी कर दिए हैं. विभाग ने ITR-1 और ITR-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी लाइव कर दी है, जिससे लोग ऑफलाइन भी रिटर्न की तैयारी कर सकते हैं.

फॉर्म जारी होते ही कई करदाता जल्द से जल्द अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी जल्दबाजी करना आपके लिए भारी पड़ सकता है. खासकर नौकरीपेशा (Salaried) लोगों को 15 जून तक तो बिल्कुल रुकना चाहिए. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इसके पीछे का तकनीकी कारण क्या है.

फॉर्म 16 और AIS के अपडेट होने का गणित

एक नौकरीपेशा करदाता को अपना टैक्स रिटर्न भरने के लिए फॉर्म 16, फॉर्म 16A, फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जरूरत होती है. इन दस्तावेजों में आपके वेतन, कटे हुए टैक्स (TDS/TCS), सेविंग्स अकाउंट के ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड के लेनदेन और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड होता है.

नियम के मुताबिक, आपकी कंपनी (Employer), बैंक, ब्रोकर और म्यूचुअल फंड हाउस के पास आपके इस पूरे वित्तीय लेनदेन का डेटा सरकार को भेजने के लिए 31 मई तक की समय सीमा होती है. कंपनियों की तरफ से डेटा भेजने के बाद, उसे आपके एआईएस (AIS) और फॉर्म 26AS में पूरी तरह दिखने में 7 से 10 दिन और लग जाते हैं.

जल्दी फाइल करने पर क्यों आ सकता है नोटिस?

अगर आप 15 जून से पहले ही अपना रिटर्न भर देते हैं, तो हो सकता है कि आपका नया और पूरा डेटा आपके टैक्स फॉर्म में न दिख रहा हो. ऐसे में जब बाद में आपकी कंपनी या बैंक टीडीएस का डेटा अपडेट करेगा, तो आपके द्वारा भरे गए रिटर्न और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर (Mismatch) आ जाएगा. इस अंतर के कारण विभाग आपको डेटा मिसमैच का नोटिस भेज सकता है. हालांकि, आपके पास 31 दिसंबर 2026 तक रिवाइज्ड या विलंबित (Delayed) रिटर्न भरने का मौका रहता है, लेकिन इस सुधार प्रक्रिया में बेवजह की मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है.

15 जून से पहले कौन फाइल कर सकता है?

यह नियम केवल उन लोगों पर लागू नहीं होता जिनकी आय का जरिया सैलरी नहीं है. ऐसे लोग जिनका कोई टीडीएस नहीं कटता, जिन्हें कोई फॉर्म 16 नहीं मिलना है, या जिनकी आय केवल रेंटल इनकम और फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज से होती है (जहां टैक्स डिडक्ट नहीं हुआ है), वे अपना रिटर्न पहले फाइल कर सकते हैं. लेकिन यहां भी शर्त यह है कि उन्होंने साल भर में कोई ऐसा शेयर या एसेट न बेचा हो जिसका रिकॉर्ड एआईएस (AIS) में आना बाकी हो.

क्या है फॉर्म-16 जारी करने का नियम?

इनकम टैक्स कानून के नियमों के अनुसार डिडक्टर की तरफ से टीडीएस रिटर्न फाइल करने के बाद 15 दिन के अंदर फॉर्म-16 जारी करना होता है. यहां आपको बता दें कि डिडक्टर के लिए टीडीएस फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मई होती है. इस तरह तमाम कंपनियों की तरफ से उनके कर्मचारियों को 1 जून से 15 जून के बीच फॉर्म-16 मिल जाते हैं. अगर इसके बाद भी आपको फॉर्म-16 ना मिले तो आप इसके लिए अपने एचआर से बात जरूर करें.

रिटर्न भरने से पहले इन 10 बातों की कर लें जांच

टैक्स फाइल करने से पहले इन तैयारियों को पूरा कर लें:

  1. अपने AIS, फॉर्म 26AS, फॉर्म 16 और बैंक स्टेटमेंट के आंकड़ों का आपस में मिलान (Reconcile) कर लें.
  2. कटे हुए सभी TDS क्रेडिट को ध्यान से वेरीफाई करें.
  3. शेयर या म्यूचुअल फंड से हुए फायदे (Capital Gains) का ब्रोकर की रिपोर्ट से मिलान करें.
  4. पिछले सालों के बचे हुए नुकसान (Carry-Forward Losses) की जांच करें.
  5. चैप्टर VI-A के तहत क्लेम की जाने वाली सभी टैक्स कटौतियों (जैसे 80C, 80D) को दोबारा देख लें.
  6. टैक्स फ्री आय (Exempt Income) की जानकारी को सही तरीके से दर्ज करें.
  7. यदि विदेश में कोई संपत्ति (Foreign Asset) है, तो उसका पूरा ब्योरा तैयार रखें.
  8. रिफंड पाने के लिए अपने बैंक अकाउंट के विवरण को वैलिडेट (सत्यापित) कर लें.
  9. कारोबारियों के लिए टर्नओवर और जीएसटी (GST) के आंकड़ों का मिलान जरूरी है.
  10. भविष्य में किसी भी पूछताछ के लिए सभी सहायक दस्तावेजों को सुरक्षित फाइल में संभाल कर रखें.

Conclusion

आयकर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है. इसलिए अंतिम समय के सर्वर डाउन होने और तकनीकी दिक्कतों से बचने का सबसे सही तरीका यही है कि आप 15 जून से 15 जुलाई के बीच अपना रिटर्न फाइल करें. सही फॉर्म का चुनाव करें और जल्दबाजी में गलत जानकारी देकर खुद के लिए परेशानी न खड़ी करें. यदि टैक्स के नियम समझने में कोई दिक्कत आ रही हो, तो किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की मदद लेना सबसे सुरक्षित रहता है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) क्या होता है?

यह एक सरकारी फॉर्म है जिसमें आप बैंक और सरकार को अपनी साल भर की कमाई, खर्चों और चुकाए गए टैक्स का पूरा ब्योरा देते हैं.

Q2 सामान्य नौकरीपेशा लोगों के लिए कौन सा ITR फॉर्म सही होता है?

सैलरी (वेतन) और एक घर से आय वाले आम करदाताओं के लिए ITR-1 (सहज) फॉर्म सबसे सही और आसान होता है.

Q3 फॉर्म 16 (Form 16) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

यह आपकी कंपनी द्वारा दिया जाने वाला एक सर्टिफिकेट है, जिसमें आपकी कुल सैलरी और उस पर काटे गए टीडीएस (TDS) का पूरा ब्योरा होता है.

Q4 एआईएस (AIS) का टैक्स रिटर्न में क्या काम होता है?

एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में आपके पूरे साल के वित्तीय लेनदेन (जैसे- शेयर खरीदना, एफडी का ब्याज, गाड़ी खरीदना) का सरकारी रिकॉर्ड होता है.

Q5 टीडीएस (TDS) क्या होता है?

इसका मतलब है 'टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स'. जब आपकी कंपनी सैलरी देती है या बैंक एफडी का ब्याज देता है, तो वे उसमें से पहले ही थोड़ा टैक्स काटकर सरकार को जमा कर देते हैं.

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