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Income Tax: आज के समय में कई सैलरीड लोग नौकरी के साथ-साथ फ्रीलांसिंग, कंसल्टिंग, यूट्यूब/कंटेंट, ऑनलाइन बिजनेस या पार्ट-टाइम जॉब से अतिरिक्त कमाई करते हैं. बहुत से लोग टैक्स का कैलकुलेशन करते वक्त नौकरी के अलावा बाकी तरीकों से हुई कमाई को गिनते ही नहीं. यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है. इनकम टैक्स कैलकुलेशन में हर तरह की कमाई को शामिल करना जरूरी होता है.
अब यहां एक बड़ा सवाल ये है कि क्या पार्ट-टाइम इनकम पर अलग से टैक्स लगता है? सवाल ये भी है कि ऐसी कमाई के लिए ITR कैसे भरना होगा? आइए जानते हैं ये सारी चीजें डिटेल में.
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इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार आपकी सभी कमाई को जोड़कर टैक्स लगाया जाता है. चाहे वह सैलरी हो या पार्ट-टाइम इनकम.
इसका मतलब:
Salary + Part-Time Income = Total Taxable Income (डिडक्शन के बाद)
एक केस से समझते हैं
सालाना सैलरी: ₹12.75 लाख
पार्ट-टाइम इनकम (Other Sources/ Freelancing): ₹5 लाख
कुल ग्रॉस इनकम:
₹12.75 लाख + ₹5 लाख = ₹17.75 लाख
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यह इस बात पर निर्भर करता है कि कमाई कैसे हो रही है:
| इनकम टाइप | टैक्स हेड |
|---|---|
| पार्ट-टाइम जॉब | Income from Other Sources |
| फ्रीलांसिंग | Business/Profession (PGBP) |
| कमीशन/गिग वर्क | Other Sources / Business Income |
आपके केस में (Income from Other Sources) मानते हुए कैलकुलेशन किया जा रहा है.
नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में:
Standard Deduction = ₹75,000 (Salary पर)
80C, 80D जैसे अधिकतर deductions नहीं मिलते
टैक्स सीधे कम स्लैब रेट पर लगता है
Step 1: Gross Income का कैलकुलेशन
Salary = ₹12,75,000
Part-Time Income = ₹5,00,000
Total Income = ₹17,75,000
Step 2: Standard Deduction
Standard Deduction (₹75,000) केवल सैलरी पर लागू
₹17,75,000 – ₹75,000 = ₹17,00,000 (Taxable Income)
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| Income Slab (₹) | Tax Rate |
|---|---|
| 0 – 4 लाख | 0% |
| 4 – 8 लाख | 5% |
| 8 – 12 लाख | 10% |
| 12 – 16 लाख | 15% |
| 16 – 20 लाख | 20% |
| 20 – 24 लाख | 25% |
| 15 लाख से ऊपर | 30% |
Slab-wise Calculation:
0 – 4L = 0
4 – 8L @5% = ₹20,000
8 – 12L @10% = ₹40,000
12 – 16L @15% = ₹60,000
16 – 17L @20% = ₹20,000
Total Tax = ₹1,40,000
4% Cess ≈ ₹5,600
Total Tax Liability ≈ ₹1,45,600 (लगभग)
(नोट: Employer की तरफ से काटा गया TDS इसमें एडजस्ट होगा.)
Case 1: Part-Time Income = Other Sources
ITR-2 (Salary + Other Sources)
Case 2: Freelancing/Professional Income
ITR-3 (Business/Profession Income)
यानी:
पार्ट-टाइम जॉब/गिग → ITR-2
फ्रीलांस/बिजनेस → ITR-3
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नियम है कि अगर कुल टैक्स देनदारी ₹10,000 से ज्यादा है, तो Advance Tax देना अनिवार्य है. पार्ट टाइम इनकम के टैक्स कैलकुलेशन में अक्सर लोग यहीं सबसे बड़ी गलती कर देते हैं. लोग अक्सर एडवांस टैक्स नहीं देते और आईटीआर फाइल करते वक्त पता चलता है कि उन पर भारी ब्याज और जुर्माना लग चुका है, क्योंकि उनका एडवांस टैक्स बकाया है.
इस केस में 12.75 लाख रुपये तो सैलरी है, जिस पर एंप्लॉयर की टीडीएस काट लेगा. हालांकि, बचे हुए 5 लाख रुपये पर आपकी टैक्स देनदारी 15-20 फीसदी वाले स्लैब में आएगी. इस पर आपको करीब 80 हजार रुपये का टैक्स चुकाना होगा, जो 10 हजार रुपये से बहुत ज्यादा है. ऐसे में आपको एडवांस टैक्स भी भरना होगा, क्योंकि पार्ट टाइम कमाई पर आपका कोई टीडीएस अमूमन नहीं कटेगा.
एडवांस टैक्स भी इनकम टैक्स का ही एक रूप है, लेकिन इसे वित्त वर्ष खत्म होने का इंतजार किए बिना पहले ही आयकर विभाग को जमा करना होता है. इसे एकमुश्त साल के अंत में नहीं चुकाया जाता, बल्कि तय किस्तों में पहले से ही जमा किया जाता है. यानी टैक्सपेयर्स अपनी अनुमानित आय के आधार पर एडवांस में ही टैक्स भरते हैं.
एडवांस टैक्स उन सभी लोगों पर लागू होता है जिनकी कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा होती है. इसमें नौकरीपेशा व्यक्ति, फ्रीलांसर, व्यापारी और अन्य स्रोतों से कमाई करने वाले लोग शामिल होते हैं. हालांकि, 60 साल से अधिक उम्र के ऐसे वरिष्ठ नागरिक जो किसी प्रकार का बिजनेस नहीं करते, उन्हें एडवांस टैक्स से छूट दी गई है.
एडवांस टैक्स सामान्य टैक्स की तरह साल में एक बार नहीं भरा जाता, बल्कि इसे अलग-अलग किस्तों में जमा करना होता है. यह भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है और इसकी तारीखें आयकर विभाग तय करता है. वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए इसकी तय तिथियां 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च हैं.
भले ही एडवांस टैक्स किस्तों में जमा किया जाता है, लेकिन इसकी गणना पूरे साल की संभावित आय के आधार पर की जाती है. पहले अपनी कुल आय का अनुमान लगाकर उसमें से डिडक्शन घटाए जाते हैं और फिर बची हुई आय पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स निकाला जाता है. इसके बाद 15 जून तक कुल टैक्स का कम से कम 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75% और 15 मार्च तक 100% एडवांस टैक्स जमा करना होता है.
| तारीख | भुगतान प्रतिशत |
|---|---|
| 15 जून | 15% |
| 15 सितंबर | 45% |
| 15 दिसंबर | 75% |
| 15 मार्च | 100% |
नौकरीपेशा लोगों के मामले में कई बार नौकरी बदलने की सूरत में अक्सर कंपनियों की तरफ से टीडीएस सही से नहीं कट पाता और एडवांस टैक्स की लाएबिलिटी बन जाती है. ऐसे में आपको चेक करना होगा और एडवांस टैक्स जमा करना होगा, वरना आप पर एक चार्ज भी लगेगा और सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज भी चुकाना पड़ेगा.
1. Employer सिर्फ Salary पर TDS काटता है
साइड इनकम का टैक्स आपको खुद मैनेज करना होगा.
2. Form 16 में पार्ट-टाइम इनकम नहीं दिखती
इसे ITR में अलग से जोड़ना अनिवार्य है.
3. इनकम छुपाना जोखिम भरा
AIS (Annual Information Statement) में कई इनकम ट्रैक हो जाती हैं.
नौकरी के साथ पार्ट-टाइम कमाई होने पर टैक्स अलग से नहीं, बल्कि कुल इनकम जोड़कर लगाया जाता है. आपके उदाहरण (₹12.75 लाख सैलरी + ₹5 लाख साइड इनकम) में नए टैक्स रिजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद लगभग ₹17 लाख टैक्सेबल इनकम बनेगी और करीब ₹2.18 लाख टैक्स देनदारी बन सकती है. ऐसे केस में ITR-2 (Other Sources) या ITR-3 (Freelancing) भरना होगा और यदि TDS पर्याप्त नहीं है, तो एडवांस टैक्स देना भी अनिवार्य हो जाता है.
Q1. क्या पार्ट-टाइम इनकम पर अलग से टैक्स लगता है?
नहीं, सैलरी और साइड इनकम को जोड़कर कुल इनकम पर टैक्स लगता है.
Q2. सैलरी + पार्ट-टाइम इनकम में कौन सा ITR फॉर्म भरना चाहिए?
Other Sources होने पर ITR-2 और फ्रीलांस/बिजनेस इनकम होने पर ITR-3.
Q3. क्या पार्ट-टाइम इनकम पर एडवांस टैक्स देना जरूरी है?
अगर कुल टैक्स देनदारी ₹10,000 से ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स अनिवार्य है.
Q4. क्या Employer साइड इनकम पर TDS काटता है?
नहीं, आमतौर पर TDS सिर्फ सैलरी पर कटता है, साइड इनकम का टैक्स खुद मैनेज करना होता है.
Q5. पार्ट-टाइम इनकम ITR में नहीं दिखाने पर क्या होगा?
गलत फाइलिंग मानी जाएगी और पेनाल्टी, ब्याज या नोटिस आ सकता है.
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