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ITR Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की आखिरी तारीख 16 सितंबर थी, जो निकल चुकी है. जिन लोगों ने भी अपने रिटर्न भर दिए हैं, अब वह अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं. कुछ टैक्सपेयर्स को उनका रिफंड मिल चुका है, जबकि बहुत सारे लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं.
अब एक बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर इनकम टैक्स रिफंड जारी करने की प्रक्रिया क्या होता है? आखिर क्यों कुछ लोगों को रिफंड मिल गया, जबकि कुछ लोग अभी भी रिफंड का इंतजार कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दे चुकी हैं, आइए जानते हैं किसे इनकम टैक्स रिफंड पहले मिलता है और किसे बाद में.
पिछले साल संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा था कि 2013-14 में रिफंड प्रोसेस होने और जारी होने में औसतन 93 दिन लगते थे. वहीं अब हालात बदल गए हैं और औसतन सिर्फ 10 दिन में रिफंड मिल रहा है. लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि यह समय हर रिटर्न के लिए समान नहीं होता.
वित्त मंत्री ने उस वक्त यह भी साफ किया था कि हर रिटर्न का रिफंड 10 दिन में नहीं आता. औसतन समय जरूर 10 दिन है, लेकिन जटिलता के हिसाब से इसमें बदलाव होता है. उदाहरण के लिए ITR-1 का रिफंड प्रोसेस जल्दी हो जाता है, क्योंकि इसमें डेटा सरल होता है. वहीं ITR-2 और ITR-3 में ज्यादा जानकारी और गणनाएं होती हैं, इसलिए इनमें समय भी ज्यादा लगता है.
इनकम टैक्स विभाग की प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले ITR-1 का रिफंड प्रोसेस किया जाता है. उसके बाद ITR-2 और फिर ITR-3 की बारी आती है. यह क्रम इस बात पर आधारित है कि कौन-सा फॉर्म कितना आसान है.
इस साल ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें आईटीआर-1 फॉर्म भरने के बावजूद रिफंड नहीं मिला है. दरअसल, इस बार तमाम फॉर्म के कई बदलाव किए गए हैं. इसकी वजह से भी फॉर्म प्रोसेस होने में देरी हो रही है. आईटीआर-1 में इस बार एक तय सीमा तक कैपिटल गेन रिपोर्ट करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे फॉर्म थोड़ा बड़ा हो गया है. वहीं इनकम टैक्स लगातार ये भी चेक कर रहा है कि लोगों ने अपनी सही इनकम दिखाई या नहीं और उसके हिसाब से सही इनकम टैक्स भरा या नहीं, जिसकी वजह से भी रिफंड में देरी हो रही है.
आयकर विभाग (Income Tax Department) की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रिफंड प्रोसेस होने और बैंक खाते में आने में 4 से 5 हफ्ते का समय लग सकता है. इसका मतलब है कि सभी टैक्सपेयर्स को 10 दिन में रिफंड नहीं मिलेगा. ऐसे भी बहुत सारे लोग होंगे, जिन्हें 4-5 दिन में ही रिफंड मिल जाए, वहीं ऐसे भी बहुत से लोग होंगे, जिनका रिफंड मिलने में महीना बीत जाए.
अगर आपने आखिरी तारीख या उसके बिल्कुल पास जाकर रिटर्न फाइल किया है, तो संभावना है कि आपका रिफंड देर से आएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय बड़ी संख्या में लोग रिटर्न भरते हैं और सिस्टम पर लोड बढ़ जाता है. इस बार भी 7 सितंबर तक करीब 4.9 करोड़ लोगों ने आईटीआर भरा था. वहीं आखिरी के 8-9 दिन में 2.5-3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल कर दिया है. ऐसे में इतने सारे लोगों का रिटर्न चेक कर के रिफंड प्रोसेस करने में वक्त लगेगा.
आईटीआर रिफंड अब पहले के मुकाबले बहुत तेजी से प्रोसेस हो रहे हैं. औसतन 10 दिन का समय निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हर रिटर्न का मामला अलग होता है. जो लोग समय पर और सही तरीके से रिटर्न भरते हैं, उन्हें जल्द ही रिफंड मिल जाता है.
आयकर विभाग को अपनी आय और टैक्स का विवरण देना ITR फाइलिंग कहलाता है.
हर साल यह आमतौर पर 31 जुलाई होती है, लेकिन इस बार इसे 16 सितंबर तक के लिए बढ़ाया गया था.
जब आपने जरूरत से ज्यादा टैक्स भर दिया हो तो उसकी वापसी रिफंड कहलाती है.
आमतौर पर 4 से 5 हफ्ते का समय लगता है.
नहीं, सिर्फ उन्हें मिलता है जिन्होंने ज्यादा टैक्स जमा किया हो.
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