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इनकम टैक्स (Income Tax) की दुनिया में 'री-असेसमेंट' का नाम सुनकर ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं. इसका मतलब है विभाग को लगता है कि आपने अपनी कुछ कमाई छिपाई है और वह आपके पुराने टैक्स रिटर्न को दोबारा खोलना चाहता है.
आयकर अधिनियम 2025 के आने से इस पूरी प्रक्रिया को अब और भी ज्यादा पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है. अब विभाग अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि 'रिस्क डेटा' और 'ऑडिट' के आधार पर ही नोटिस भेजेगा. आइए, इन 16 सवालों के जरिए समझते हैं कि नए कानून में आप पर क्या असर पड़ेगा.
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सवाल 1: नए Income-tax Act, 2025 में reassessment का framework क्या है?
जवाब: Sections 279–286 में provisions हैं, जो पुराने Act के Sections 147–153 को replace करते हैं. Framework अब ज्यादा structured है.
| विषय (Subject) | पुराना Act Section (1961) | नया Act Section (2025) |
|---|---|---|
| आय के पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) की शक्ति | 147 | 279 |
| Reassessment के लिए नोटिस जारी करना | 148 | 280 |
| नोटिस जारी करने से पहले की प्रक्रिया (Show Cause) | 148A | 281 |
| नोटिस जारी करने की समय-सीमा | 149 | 282 |
| अपील/कोर्ट के आदेश के अनुसार आकलन | 150 | 283 |
| नोटिस जारी करने के लिए स्वीकृति (Sanction) | 151 | 284 |
| अन्य प्रावधान (Tax rate, proceedings drop) | 152 | 285 |
| आकलन/पुनर्मूल्यांकन पूरा करने की समय-सीमा | 153 | 286 |
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सवाल 2: Reopening notice जारी करने की प्रक्रिया क्या है?
जवाब:
(i) AO के पास income escape की information हो
(ii) Sec 281(1) के तहत show-cause notice
(iii) Assessee का reply consider
(iv) Approval के साथ reasoned order
(v) Sec 280 का notice जारी
सवाल 3: Income escaping की “information” क्या मानी जाएगी?
जवाब: Risk data, audit objection, foreign info, govt schemes data, tribunal/court orders, survey info, panel directions, authority findings.
सवाल 4: क्या बिना Sec 280 notice के कोई असेसमेंट ऑफिसर reassessment कर सकता है?
जवाब: नहीं, notice mandatory है.
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सवाल 5: किन केस में Sec 281 (show-cause) की प्रक्रिया skip हो सकती है?
जवाब:
(i) Faceless info schemes
(ii) Approving panel directions
(iii) Court/Tribunal findings
(Approval फिर भी जरूरी)

सवाल 6: नया एक्ट किन करदाताओं पर लागू होगा?
जवाब: Tax Year 2026-27 और आगे. उससे पहले old Act लागू रहेगा.
सवाल 7: पुराने Act में नोटिस की समय सीमा क्या थी?
जवाब:
< ₹50 लाख- 3 साल
≥ ₹50 लाख- 5 साल
(+3 महीने Sec 148 notice के लिए)
| नोटिस का प्रकार | रकम (Escaped Income) | समय सीमा (AY के अंत से) |
|---|---|---|
| Section 148A (Show Cause Notice) | ₹50 लाख से कम | 3 साल |
| ₹50 लाख या ज्यादा | 5 साल | |
| Section 148 (Reassessment Notice) | ₹50 लाख से कम | 3 साल 3 महीने |
| ₹50 लाख या ज्यादा | 5 साल 3 महीने |
सवाल 8: नए Act में notice की time limit क्या है?
जवाब:
Sec 281- 4 साल / 6 साल (₹50L+)
Sec 280- 4 साल 3 महीने / 6 साल 3 महीने
(1 साल के अंदर notice नहीं)
| नोटिस का प्रकार | सामान्य समय सीमा | अगर आय ₹50 लाख या ज्यादा हो |
|---|---|---|
| Section 281 (Show Cause Notice) | 4 साल | 6 साल |
| Section 280 (Reassessment Notice) | 4 साल 3 महीने | 6 साल 3 महीने |

सवाल 9: Reassessment पूरा करने की समय सीमा क्या है?
जवाब: Notice देने के बाद 1 साल के अंदर ऑर्डर जारी करना होगा.
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सवाल 10: 01.04.2026 से पहले शुरू हुई प्रोसीडिंग्स का क्या होगा?
जवाब: पूरी तरह Old Act (1961) के तहत Continue होंगी.

सवाल 11: क्या 01.04.2026 के बाद भी पुराने असेसमेंट ईयर्स को old Act के तहत reopen किया जा सकता है?
जवाब: हां.
सवाल 12: अगर 148A(1) का नोटिस 01.04.2026 से पहले दिया गया है, लेकिन 148 का नोटिस बाद में देना है, तो क्या वो valid होगा?
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जवाब: हां, valid होगा. पूरा process पुराने Income Tax Act, 1961 के अनुसार ही चलेगा. लेकिन एक शर्त है- Section 149 की time limit का पालन जरूरी है.

सवाल 13: Approval किसका लगेगा (old cases में)?
जवाब: अतिरिक्त/ज्वाइंट कमीश्नर/डायरेक्टर.
सवाल 14: क्या 148 के तहत नोटिस के बाद रिटर्न 01.04.2026 के बाद file कर सकते हैं?
जवाब: हां, नोटिस के 3 महीने के अंदर.
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सवाल 15: क्या old और new Act की proceedings साथ चल सकती हैं?
जवाब: हां, अलग-अलग सालों के लिए parallel चल सकती हैं.
सवाल 16: Penalty किस Act के अनुसार लगेगी?
जवाब: 01.04.2026 से पहले के सालों के लिए penalty old Act (1961) से ही लगेगी.
नए री-असेसमेंट फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब ऑफिसर अपनी मर्जी से किसी का केस नहीं खोल पाएंगे. उन्हें ठोस 'डिजिटल सबूत' देने होंगे. लेकिन दूसरी तरफ, सरकार ने बड़े मामलों में समय सीमा बढ़ा दी है, जिसका मतलब है कि आपको अपने रिकॉर्ड्स अब और भी लंबे समय तक सुरक्षित रखने होंगे.
1- क्या 6 साल पुराने केस अब खुल सकते हैं?
हां, अगर छिपाई गई आय ₹50 लाख से ज्यादा है, तो नए कानून में विभाग 6 साल 3 महीने तक पीछे जा सकता है.
2- सेक्शन 280 और 281 में क्या अंतर है?
सेक्शन 281 आपको सफाई देने का मौका देता है (Show-cause), जबकि सेक्शन 280 वह अंतिम नोटिस है जिससे री-असेसमेंट शुरू होता है.
3- क्या री-असेसमेंट से बचने का कोई तरीका है?
सटीक रिटर्न भरना और 'अपडेटेड रिटर्न' (ITR-U) का इस्तेमाल करके पुरानी गलतियों को खुद सुधारना सबसे अच्छा तरीका है.
4- पेंडिंग केस का क्या होगा?
जो केस 1 अप्रैल 2026 से पहले शुरू हो चुके हैं, उन पर नए कानून का कोई असर नहीं पड़ेगा.
5- क्या विदेश से मिली जानकारी पर केस खुल सकता है?
हां, नए एक्ट में 'Foreign Information' को री-असेसमेंट का एक मुख्य आधार माना गया है.
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