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आज के वक्त में प्रॉपर्टी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में कई लोग अपने घरों को अच्छी कीमत मिलने पर बेचने की भी सोच रहे हैं. अक्सर लोग घर बेचने के बाद मिलने वाले सारे पैसों को अपना मुनाफा समझ लेते हैं. हालांकि, असली खेल तब शुरू होता है जब आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आता है. इस साल से इनकम टैक्स के नियम काफी बदल चुके हैं. अब 'इंडेक्सेशन' का पुराना तरीका हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं रहा और टैक्स स्लैब भी आसान हो गए हैं.
अब अगर आप यह नहीं जानते कि घर को बेचने से जुड़े नियम क्या हैं तो आपको इस स्टोरी से सारी जानकारी मिल जाएगी. भले ही आप पहली बार घर बेच रहे हों या अपने किसी पुराने निवेश को भुनाना चाहते हैं, टैक्स से जुड़े नियमों को जानना बहुत जरूरी है, वरना नुकसान हो सकता है. आइए जानते हैं घर की बिक्री पर टैक्स की पूरी कुंडली और इसे बचाने के कानूनी रास्ते.
होल्डिंग पीरियड वह अवधि है, जितने दिन घर आपके पास था. एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपने कोई घर 2020 में खरीदा था और उसे 2025 में बेचा, तो ऐसे में आपका होल्डिंग पीरियड 5 साल है, क्योंकि घर 5 साल आपके पास रहा.
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जब आप घर को 24 महीने यानी 2 साल अपने पास रखने के बाद बेचते हैं तो उससे हुए मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है. वहीं अगर आपने इससे पहले घर बेच दिया तो उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाएगा.
2026 के नए नियमों के हिसाब से देखें तो अब सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर को काफी आसान बना दिया है. हालांकि, पुराने प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक खास विकल्प अभी भी रखा है. अगर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है तो उस पर आपको सीधे 12.5 फीसदी टैक्स लगेगा. हालांकि, अगर आप इंडेक्सेशन का फायदा लेते हैं तो आप पर यह टैक्स बढ़कर 20 फीसदी हो जाएगा. 23 जुलाई 2024 को सरकार ने यह नियम बनाया था. 23 जुलाई 2024 से पहले जिन्होंने घर खरीदे हैं, सिर्फ वही इंडेक्सेशन का फायदा उठा सकते हैं, बाकी लोग नहीं.
बहुत से लोग इंडेक्सेशन को लेकर भी कनफ्यूज रहते हैं, तो आइए इसके बारे में भी समझ लेते हैं. इंडेक्सेशन का मतलब है कि आपके घर की खरीद की कीमत महंगाई के हिसाब से आज की वैल्यू पर लाई जाएगी. इसके बाद ये देखा जाएगा कि आपका घर कितने में बिका. उसके बाद जो दोनों के बीच का अंतर होगा, उस पर आपको 20 फीसदी का टैक्स देना होगा.
एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपने 10 साल पहले कोई घर 30 लाख का खरीदा था. अब अगर आप उसे आज 70 लाख का बेचते हैं तो बिना इंडेक्सेशन के कैलकुलेशन पर आपको 40 लाख का लॉन्ग टर्म गेन होगा. इस तरह आपको 40 लाख रुपये पर 12.5 फीसदी की दर से कुल 5 लाख रुपये का टैक्स लगेगा.
वहीं अगर आप इंडेक्सेशन के साथ आज घर की कीमत कैलकुलेट करेंगे तो वह करीब 50 लाख आएगी. इस तरह उसे 70 लाख में बेचने पर आपको कुल 20 लाख रुपये का मुनाफा होगा. इस पर आपको 20 फीसदी का टैक्स देना होगा, यानी आपको कुल 4 लाख रुपये का टैक्स चुकाना होगा.

यदि आप 2 साल से पहले घर बेच देते हैं, तो आपको होने वाले मुनाफे पर टैक्स किसी खास दर से नहीं लगेगा. ऐसे में जो कमाई होगी वह आपकी इनकम में जुड़ जाएगी और आप जिस भी स्लैब में आएंगे आपको उसके हिसाब से अपनी कमाई पर टैक्स चुकाना होगा, भले ही आपकी कमाई 30 फीसदी वाले टैक्स स्लैब तक क्यों ना पहुंच जाए.
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अगर आप अपने मुनाफे पर लगने वाले टैक्स से बचना चाहते हैं तो इनकम टैक्स की धारा 54 आपको सबसे बड़ी राहत देती है. आप एक घर बेचने के बाद उससे हुए मुनाफे को फिर से दूसरे घर में निवेश कर सकते हैं. ऐसे में आपका टैक्स माफ हो जाएगा. हालांकि, इसकी एक शर्त भी है. नया घर आप पुराने घर को बेचने से 1 साल पहले खरीद चुके हों या बेचने के 2 साल के अंदर-अंजर खरीद लें. अगर घर खुद बनवा रहे हैं, तो आपको 3 साल का समय मिलता है.
अगर आपका लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन 2 करोड़ रुपये से कम है, तो आप अपनी पूरी जिंदगी में एक बार इस पैसे से दो घर खरीद सकते हैं और दोनों पर टैक्स छूट पा सकते हैं. बता दें कि धारा 54 के तहत अधिकतम छूट की सीमा 10 करोड़ रुपये तय की गई है.
अगर आप नया घर नहीं खरीदना चाहते, तो आप धारा 54EC के तहत निवेश कर सकते हैं. आप NHAI, REC, PFC या IRFC जैसे संस्थानों के 'कैपिटल गेन बॉन्ड' खरीद सकते हैं. हालांकि, इसके तहत एक वित्त वर्ष में अधिकतम 50 लाख रुपये ही इन बॉन्ड्स में लगा सकते हैं. वहीं इन बॉन्ड्स को आपको 5 साल तक रखना होगा. अगर उससे पहले बेचे या गिरवी रखे, तो टैक्स छूट वापस ले ली जाएगी.
घर बेचना जितना बड़ा वित्तीय फैसला है, टैक्स की योजना बनाना उससे भी बड़ा काम है. 2026 में 12.5% की नई दर ने गणना को आसान तो बनाया है, लेकिन इंडेक्सेशन का विकल्प खोना हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं है. इसलिए, घर बेचने से पहले यह जरूर देखें कि आप उसे इंडेक्सेशन के साथ बेचना चाहते हैं या नए घर में निवेश कर पूरा टैक्स बचाना चाहते हैं. यदि उलझन हो, तो एक टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है ताकि आपकी मेहनत की कमाई बेवजह टैक्स में न चली जाए.
नहीं, घर बेचने के मुनाफे पर टैक्स छूट केवल नया घर खरीदने (Sec 54) या विशेष बॉन्ड (Sec 54EC) लेने पर ही मिलती है.
ऐसी स्थिति में आपको मिली हुई पुरानी टैक्स छूट वापस ले ली जाएगी और वह आपकी आय में जुड़ जाएगी.
नहीं, 2026 के नियमों के अनुसार यह विकल्प केवल निवासी भारतीयों (Resident Indians) और HUF के लिए ही उपलब्ध है.
हां, लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस को किसी भी अन्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन के साथ 8 साल तक एडजस्ट (Set-off) किया जा सकता है.
हां, आप मुनाफे का कुछ हिस्सा घर में और कुछ हिस्सा (50 लाख तक) बॉन्ड में लगाकर दोनों धाराओं का फायदा उठा सकते हैं.
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