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इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1 फॉर्म फाइल करने की प्रक्रिया को बेहद आसान और डिजिटल बना दिया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आयकर विभाग ने एक विस्तृत वीडियो गाइड जारी किया है. इस गाइड का मुख्य उद्देश्य टैक्सपेयर्स को बिना किसी बाहरी मदद या गलती के, घर बैठे अपना ITR-1 (सहज) फॉर्म ऑनलाइन भरने में सक्षम बनाना है.
विभाग ने साफ किया है कि यदि आप एक वेतनभोगी (Salary) कर्मचारी हैं, पेंशन पाते हैं, या आपके पास अन्य सामान्य स्रोतों से आय आती है, तो यह आसान डिजिटल प्रक्रिया आपके लिए फाइलिंग के सफर को बहुत ही सुगम बना देगी.
ITR-1 फॉर्म को 'सहज' भी कहा जाता है. आयकर विभाग के वीडियो के मुताबिक, इस फॉर्म का इस्तेमाल निम्नलिखित आय स्रोतों को रिपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है:
सैलरी या पेंशन: नौकरी से मिलने वाला वेतन या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन.
हाउस प्रॉपर्टी: दो घरों की संपत्तियों (Two House Properties) से होने वाली आमदनी.
फैमिली पेंशन: परिवार को मिलने वाली पेंशन की राशि.
कृषि से आय: खेती-किसानी से होने वाली आमदनी, जो 5,000 रुपये तक हो.
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG): सेक्शन 112A के तहत आने वाला लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन, जो 1.25 लाख रुपये तक का हो.
अन्य स्रोत (Other Sources): बचत खाते का ब्याज (Savings Account Interest), फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य डिपॉजिट का ब्याज और इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाला ब्याज आदि.
इनकम टैक्स रिटर्न भरने के स्टेप ये रहे:
स्टेप 1: इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करें
सबसे पहले https://incometax.gov.in पर जाएं और अपने यूजर आईडी व पासवर्ड की मदद से लॉगिन करें.

स्टेप 2: File Income Tax Return विकल्प चुनें
लॉगिन के बाद e-File मेन्यू में जाएं और Income Tax Returns > File Income Tax Return पर क्लिक करें.

स्टेप 3: असेसमेंट ईयर चुनें
अब Assessment Year 2026-27 चुनें और फाइलिंग मोड के रूप में Online सिलेक्ट करें.

स्टेप 4: नई या अधूरी फाइलिंग चुनें
अगर आपने पहले से कोई ड्राफ्ट सेव किया है तो Resume Filing चुन सकते हैं. नई फाइलिंग के लिए Start New Filing पर क्लिक करें.

स्टेप 5: अपना स्टेटस चुनें
यहां अपना टैक्सपेयर स्टेटस चुनें, जैसे Individual.

स्टेप 6: ITR-1 (Sahaj) फॉर्म चुनें
ड्रॉपडाउन मेन्यू से ITR-1 (Sahaj) का चयन करें और आगे बढ़ें.

स्टेप 7: सही ITR चुनने में मदद लें (यदि जरूरत हो)
अगर आपको यह नहीं पता कि कौन-सा ITR फॉर्म आपके लिए सही है, तो Help me decide which ITR Form to file विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.

स्टेप 8: पात्रता से जुड़े सवालों के जवाब दें
सिस्टम द्वारा पूछे गए बेसिक सवालों का सही-सही जवाब दें ताकि आपकी पात्रता तय हो सके.

स्टेप 9: आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करें
PAN, Aadhaar, बैंक अकाउंट और अन्य जरूरी जानकारियों की पुष्टि करें.

स्टेप 10: प्री-फिल्ड जानकारी की जांच करें
AIS, Form 26AS और अन्य स्रोतों से पहले से भरी गई जानकारी को ध्यान से चेक करें. कोई गलती हो तो उसे सुधारें.

स्टेप 11: आय और कटौतियों की जानकारी भरें
Salary, House Property, Other Sources की Income और Chapter VI-A के तहत मिलने वाली Deductions की जानकारी दर्ज करें.

स्टेप 12: टैक्स कैलकुलेशन की समीक्षा करें
सिस्टम द्वारा की गई टैक्स गणना को ध्यान से देखें. अगर टैक्स देना है तो Pay Now पर क्लिक करें.

यदि रिफंड बन रहा है तो अगले चरण पर जाएं.

स्टेप 13: डिक्लेरेशन कनफर्म करें
अब आपको डिक्लेरेशन कनफर्म करना होगा और वैलिडेशन के लिए प्रोसीड करना होगा. अगर टैक्स भुगतान का डेटा ऑटो-पॉपुलेट नहीं हुआ है तो उसे मैन्युअली दर्ज करें.

स्टेप 14: Internal Validation करें
सभी जानकारियां भरने के बाद Proceed to Validation पर क्लिक करें. सिस्टम फॉर्म की जांच करेगा.

स्टेप 15: Verification के लिए आगे बढ़ें
Validation सफल होने पर Proceed to Verification पर क्लिक करें.

स्टेप 16: रिटर्न को ई-वेरिफाई करें
अपनी पसंद के अनुसार e-Verification का तरीका चुनें, जैसे:
इसके बाद प्रक्रिया पूरी कर दें.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) क्या है?
यह एक फॉर्म है जिसमें आप सरकार को अपनी सालाना कमाई और टैक्स का ब्योरा देते हैं.
Q2 फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर में क्या अंतर है?
जिस साल आप पैसे कमाते हैं वह फाइनेंशियल ईयर है और उसके अगले साल को असेसमेंट ईयर कहते हैं.
Q3 फॉर्म 16 क्या होता है?
यह आपकी कंपनी द्वारा दिया जाने वाला सर्टिफिकेट है, जिसमें आपकी सैलरी और कटे हुए टैक्स (TDS) की जानकारी होती.
Q4 एआईएस (AIS) देखना क्यों जरूरी है?
इसमें आपके पैन कार्ड से जुड़े सभी बड़े लेन-देन (जैसे बैंक ब्याज, शेयर) दर्ज होते हैं, जिससे टैक्स चोरी की गलती नहीं होती.
Q5 ITR भरने के बाद ई-वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है?
बिना ई-वेरिफिकेशन (जैसे आधार OTP) के आपका रिटर्न अधूरा माना जाता है और इनकम टैक्स विभाग उसे रिजेक्ट कर देता है.
Q6 टैक्स रिफंड कब मिलता है?
जब आपका कटा हुआ टैक्स (TDS) आपकी असल टैक्स देनदारी से ज्यादा होता है, तो बाकी पैसा विभाग आपके खाते में वापस भेज देता है.