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अक्सर रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद कई बार रेक्टिफिकेशन (Rectification) के जरिए टैक्स डिमांड निकल आती है और देरी से भुगतान करने पर ब्याज (Interest) भी देना पड़ता है. इस बार भी ऐसा हुआ है, लेकिन सिस्टम एरर की वजह से. हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (CBDT) ने कुछ समय पहले ही नया सर्कुलर जारी कर ऐसे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है. इसके बावजूद बहुत सारे लोग कनफ्यूजन में हैं कि उन पर पेनाल्टी लगेगी या नहीं.
सरकार ने साफ किया है कि उन लोगों को 31 दिसंबर 2025 तक भुगतान करने में ब्याज से छूट मिलेगी, जिनके टैक्स का कैलकुलेशन गलत हुआ है. दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119 (Section 119 of Income Tax Act) के तहत यह पावर CBDT को मिली है कि वह जेनुइन हार्डशिप वाले मामलों में टैक्सपेयर्स को राहत दे सके.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने सर्कुलर में साफ कहा है कि जिन टैक्सपेयर्स पर रेक्टिफिकेशन ऑर्डर के बाद डिमांड निकली है और अगर वह 31 दिसंबर 2025 तक भुगतान कर देते हैं तो उन पर ब्याज नहीं लगाया जाएगा.

कई मामलों में टैक्सपेयर्स को सेक्शन 87A के तहत छूट मिल गई थी. लेकिन खास रेट वाली इनकम (Special Rate Income) पर यह छूट लागू नहीं होती थी. जैसे कई लोगों को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का फायदा भी डिडक्शन में मिल गया, जबकि ऐसा नहीं होता है. ऐसे मामलों में रेक्टिफिकेशन कर टैक्स डिमांड निकाला गया. देर से पेमेंट करने पर धारा 220(2) के तहत ब्याज लगने लगा. ऐसे में टैक्सपेयर्स की कठिनाई कम करने के लिए यह राहत दी गई है.
अब लोगों को टैक्स डिमांड का भुगतान 31 दिसंबर 2025 तक करना होगा. अगर तय तारीख तक पेमेंट नहीं हुआ तो ब्याज सामान्य नियमों के तहत लगेगा. इस फैसले से हजारों टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी. अगर आपके रेक्टिफिकेशन ऑर्डर से डिमांड बनी है और आप समय पर पेमेंट कर देते हैं तो लेट पेमेंट का इंटरेस्ट बच जाएगा. इसका सीधा असर आपकी जेब पर होगा और आर्थिक बोझ कम होगा.
CBDT का यह कदम टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने वाला है. जिन लोगों के खिलाफ रेक्टिफिकेशन के बाद टैक्स डिमांड निकला है, उन्हें अब ब्याज का अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2025 तक भुगतान कर दें. सरकार का यह फैसला टैक्स कलेक्शन को भी आसान बनाएगा और टैक्सपेयर्स के लिए भरोसेमंद वातावरण तैयार करेगा.
Central Board of Direct Taxes.
Section 220(2).
31 दिसंबर 2025 तक पेमेंट करने पर.
जो लोग तय समय तक पेमेंट नहीं करेंगे.
गलत छूट या कैलकुलेशन सुधारने पर.
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