Income Tax Bill 2025 टैक्सपेयर्स के लिए कितना फायदेमंद? सेलेक्ट कमेटी ने पेश की रिपोर्ट, बैजयंत पांडा ने गिनाए फायदे

पुराने एक्ट में पांच लाख से ज्यादा शब्द थे, जो करीब 50 प्रतिशत तक कम हो गए हैं और लोगों के समझने में आसान हैं. इस बिल से हम नीतियों में बदलाव नहीं लाए हैं, क्योंकि वो अलग फोरम में होता है.
Income Tax Bill 2025 टैक्सपेयर्स के लिए कितना फायदेमंद? सेलेक्ट कमेटी ने पेश की रिपोर्ट, बैजयंत पांडा ने गिनाए फायदे

मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में आयकर बिल, 2025 पर सेलेक्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की. कमेटी के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने इसे सदन में पेश किया. मंगलवार को आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने इस बिल को टैक्सपेयर के लिए काफी फायदेमंद बताया.

भाजपा सांसद एवं फाइनेंस सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन बैजयंत पांडा ने कहा, "आयकर अधिनियम में संशोधन को लेकर सेलेक्ट कमेटी पिछले कई महीनों से इस पर काम कर रही थी. पीएम मोदी के नेतृत्व में कई सारे कानून बदलकर आधुनिक और सरल हुए हैं. इसी के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल घोषणा की थी कि आयकर अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है. आयकर अधिनियम को बदलने का काम हो रहा है. वर्तमान का आयकर अधिनियम बहुत उलझा हुआ है, जिसका सरलीकरण करके कुछ महीनों पहले संसद में पेश किया गया. हमने इसे लेकर 36 बैठकें कीं. हमने 334 सुझाव दिए हैं. बिल पास होने के बाद जो आयकर अधिनियम बनेगा, वो आम आदमी के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा."

उन्होंने बताया, "पुराने एक्ट में पांच लाख से ज्यादा शब्द थे, जो करीब 50 प्रतिशत तक कम हो गए हैं और लोगों के समझने में आसान हैं. इस बिल से हम नीतियों में बदलाव नहीं लाए हैं, क्योंकि वो अलग फोरम में होता है. इसमें एक्ट को सरल बनाने की कोशिश की गई है ताकि जो भी नई नीति बने उन्हें आसानी से लागू कराया जा सके. हमने बहुत से व्यक्तियों और संस्थाओं से सुझाव लिए, जिसमें बहुत सारे छोटे व्यापारी और एमएसएमई सेक्टर के लोग भी थे."

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समिति के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, "सभी ने एक टीम वर्क की तरह काम किया. करदाताओं के लिए यह कानून कैसे सरल बने, इस पर सभी का फोकस था. सभी ने बहुत परिश्रम किया. करीब चार महीने कमेटी ने अपना काम किया और समय बढ़ाने की मांग नहीं की, क्योंकि बहुत ही कम कमेटी होती हैं, जो समय पर अपनी रिपोर्ट दे पाती हैं. समय से रिपोर्ट पेश होने का यह फायदा है कि अगर बिल मौजूदा मानसून सत्र में पास हो जाता है, तो अगले वित्त वर्ष तक इस कानून को लागू कर दिया जाएगा."

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