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इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़े मामलों में कई बार ऐसे सवाल सामने आते हैं, जिनका सीधा जवाब लोगों को समझ नहीं आता. खासकर तब जब टैक्स से जुड़े विवाद किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ हों जिसकी मौत हो चुकी हो. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि इनकम टैक्स विभाग की तरफ से भेजे गए नोटिस का जवाब कौन देगा और अगर कोई बकाया है तो उसकी वसूली कैसे की जाएगी.
बहुत से लोगों को लगता है कि व्यक्ति की मौत के बाद टैक्स की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता. वास्तव में इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में इस बारे में साफ नियम बने हुए हैं कि टैक्स का बकाया (Tax Arrear) और नोटिस (Tax Notice) दोनों का निपटारा कैसे होगा और कौन करेगा.
कानून के हिसाब से टैक्स की देनदारी व्यक्ति की मौत के बाद खत्म नहीं होती. अगर किसी के ऊपर टैक्स बकाया है तो इनकम टैक्स विभाग उसकी वसूली उसके कानूनी वारिसों से कर सकता है. हालांकि, यह वसूली केवल मृतक की छोड़ी हुई संपत्ति तक ही सीमित होती है. इसका मतलब यह है कि उत्तराधिकारी (Legal Heir) पर अपनी व्यक्तिगत कमाई से टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी नहीं होती.
अगर इनकम टैक्स विभाग मृतक के नाम नोटिस भेजता है तो उस नोटिस का जवाब उसके कानूनी वारिस देंगे. इसके लिए उन्हें इनकम टैक्स पोर्टल (Income Tax Portal) पर खुद को लीगल हीयर (Legal Heir) के तौर पर रजिस्टर करना होता है. उसके बाद वह पोर्टल पर मृतक के पैन (PAN) और उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके टैक्स रिटर्न (ITR) या नोटिस का जवाब भर सकते हैं.
विभाग बकाया वसूली मृतक की संपत्ति से ही करता है. मतलब यह कि अगर मृतक ने जमीन, मकान, बैंक बैलेंस या अन्य निवेश छोड़ा है तो टैक्स का पैसा उन्हीं से लिया जाएगा. अगर संपत्ति कम है तो विभाग केवल उतनी ही राशि की वसूली कर सकता है, जितनी संपत्ति उपलब्ध है.
कानून के अनुसार, टैक्स बकाया की वसूली के साथ उत्तराधिकारी पर अतिरिक्त पेनाल्टी नहीं लगाई जाती. ब्याज भी उतना ही लिया जाएगा जितना कि मृतक के जीवनकाल में लागू था. वारिसों से कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूला जाएगा.
नहीं. बकाया टैक्स माफ नहीं होता. इसे मृतक की संपत्ति से वसूला जाता है. लेकिन उत्तराधिकारी पर व्यक्तिगत रूप से टैक्स चुकाने का दबाव नहीं बनाया जाता.
टैक्स कानून (Tax Law) के हिसाब से किसी शख्स की मौत के बाद भी उसकी टैक्स जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं. विभाग नोटिस जारी कर सकता है और बकाया की वसूली मृतक की संपत्ति से करता है. उत्तराधिकारी को सिर्फ नोटिस का जवाब देना और कानूनी रूप से प्रतिनिधित्व करना होता है. इससे साफ है कि टैक्स के मामले में सावधानी और समय पर दस्तावेज पूरे करना बेहद जरूरी है.
नहीं, बकाया माफ नहीं होता, इसे संपत्ति से वसूला जाता है.
मृतक का कानूनी वारिस यानी लीगल हीयर.
नहीं, टैक्स केवल मृतक की संपत्ति से वसूला जाएगा.
हां, उतना ब्याज जितना मृतक के जीवनकाल तक लागू था.
हां, जरूरत पड़ने पर वारिस आईटीआर फाइल करेगा.
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