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कई लोग इनकम टैक्स (Income Tax) बचाने के चक्कर में झूठा डिडक्शन (False Deduction) दिखा देते हैं. उन्हें लगता है कि मामूली सा क्लेम करने से विभाग पकड़ नहीं पाएगा और हजारों रुपये की बचत हो जाएगी. लेकिन हकीकत में यह कदम उन्हें बड़ी मुश्किल में डाल सकता है. इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में एक जागरूकता ब्रॉशर जारी किया है, जिसमें साफ लिखा गया है कि गलत क्लेम करने वालों पर भारी टैक्स, ब्याज, पेनाल्टी और यहां तक कि जेल तक की सजा हो सकती है.
उदाहरण के तौर पर अगर आप 20% टैक्स ब्रैकेट (Tax Bracket) में हैं और आपने 1 लाख रुपये का गलत डिडक्शन क्लेम किया, तो सीधे 20 हजार की टैक्स बचत हो सकती है. लेकिन अगर यह पकड़ में आ गया तो आपको 3 गुना से भी ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ सकता है.
आइए एक साधारण उदाहरण से समझते हैं कि मामूली सी बचत का लालच कैसे महंगा साबित हो सकता है. अगर आप फर्जी क्लेम से ₹20,000 तक टैक्स की बचत करते हैं तो-
कुल मिलाकर ₹20,000 बचाने की कोशिश में आपके 70-75 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च हो सकते हैं.
| सेक्शन | उल्लंघन | सजा |
|---|---|---|
| 270A | गलत आय दिखाना | 200% तक पेनाल्टी |
| 276C | टैक्स चोरी ₹25 लाख से ज्यादा | 6 महीने से 7 साल जेल + जुर्माना |
| 277 | झूठी जानकारी देना | 3 महीने से 2 साल जेल + जुर्माना |
अब विभाग सिर्फ कागजी दस्तावेजों पर निर्भर नहीं है. बैंकिंग ट्रांजैक्शन, निवेश, पैन-आधार लिंक, एआईएस (AIS Report) और फॉर्म 26AS के जरिए हर आय और खर्च की जानकारी सिस्टम में है. एआई (AI) और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) की मदद से विभाग तुरंत पता लगा लेता है कि किसने गलत क्लेम किया है.
थोड़े से टैक्स बचाने के लिए गलत डिडक्शन क्लेम करना किसी भी टैक्सपेयर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. विभाग अब हर क्लेम की बारीकी से जांच करता है और सख्त कार्रवाई करता है. बेहतर यही है कि ईमानदारी से सही डिडक्शन क्लेम करें और अगर गलती हो गई हो तो समय रहते रिवाइज्ड या अपडेटेड रिटर्न फाइल कर लें.
हां, विभाग टेक्नोलॉजी से जांच करता है और नोटिस भेज सकता है.
200% तक पेनाल्टी लग सकती है.
हां, गंभीर मामलों में जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं.
31 दिसंबर 2025 तक.
यह अपडेटेड रिटर्न है जिसे 4 साल तक फाइल किया जा सकता है.
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