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जब भी बजट आता है, तो उसमें अधिकतर लोगों को इस बात का इंतजार रहता है कि इस बार इनकम टैक्स में क्या बदलेगा. हर नौकरी पेशा किसी ना किसी राहत की उम्मीद करता है. आज हम जिस इनकम टैक्स की बात करते हैं, असल में वह 150 साल से भी ज्यादा पुराना है, बस इसका स्वरूप धीरे-धीरे बदलता चला गया है.
भारत में इनकम टैक्स की शुरुआत 1860 में हुई थी. यानी अंग्रेजों के जमाने में पहली बार इनकम टैक्स लागू हुआ था. सर जेम्स विल्सन ने इसे लागू किया था. यह टैक्स अमीरों पर लगाया गया था, जिससे वह नाराज थे. पहले ही साल इस टैक्स के जरिए सरकार ने 30 लाख रुपये की कमाई की थी.
इसके बाद 1865 में यह एक्ट खत्म हो गया, लेकिन 1867 में इसे फिर से एक अलग अंदाज में लाया गया. उस वक्त का टैक्स इनकम टैक्स और लाइसेंस टैक्स का मिक्स था. 1886-87 में सरकार ने टैक्स से 1.36 करोड़ रुपये कमाए. अगर 1914-15 की बात करें तो उस वक्त सिर्फ 3.32 लाख करदाता था, जिन्होंने कुल मिलाकर 3.05 करोड़ रुपये का टैक्स दिया था.
1916 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हो गया, जिसके चलते रिसोर्स की बहुत कमी हो गई. इसकी वजह से 1917 में पहली बार सुपरटैक्स लागू किया गया, ताकि इस कमी को पूरा किया जा सके. 1918-19 में कुल टैक्स कलेक्शन बढ़कर 11 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. 1939-40 सरकार का इनकम टैक्स कलेक्शन बढ़कर 19.82 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. 1945-46 में यह 57.12 करोड़ रुपये हो गया.
15 अगस्त 1947 में देश आजाद होने के बाद बहुत सारी चीजें बदलीं. आइए समझते हैं साल-दर-साल टैक्स सिस्टम में क्या-क्या बदला.
1947: देश में Business Profits Tax लागू किया गया. यह 1 अप्रैल 1946 से 31 मार्च 1949 तक प्रभावी माना गया. इसका मकसद युद्ध के बाद कंपनियों की एक्स्ट्रा कमाई पर टैक्स लगाना था.
1951: सरकार को Vardhachari Commission की रिपोर्ट से पता चला कि टैक्स चोरी हो रही है और इनकम टैक्स सिस्टम में कुछ खामियां हैं. इसी साल Voluntary Disclosure Scheme लाई गई, ताकि लोग खुद से ही अपनी छुपी आय घोषित कर सकें.
1952: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में Directorate of Inspection बनाई गई. इसके साथ ही Income Tax Inspector को आधिकारिक टैक्स अथॉरिटी घोषित किया गया.
1957: इसी साल Wealth Tax Act, 1957 लागू हुआ और अमीरों की संपत्ति पर टैक्स लगाने की शुरुआत हुई.
1958: Gift Tax Act, 1958 लागू किया गया, यानी गिफ्ट में मिलने वाली संपत्ति पर टैक्स लगाया गया.
1961: Income Tax Act, 1961 बना, जो आज भी भारत का मुख्य टैक्स कानून है. यह 1 अप्रैल 1962 से लागू हुआ.
1963-1964: CBDT (Central Board of Direct Taxes) का गठन किया गया. पहली बार विभाग का ही अधिकारी CBDT का चेयरमैन बना.
1965: फिर से Voluntary Disclosure Scheme लागू की गई.
1970: टैक्स रिकवरी का काम Tax Recovery Officers को सौंपा गया.
1971: Summary Assessment Scheme लाई गई, जिससे टैक्स असेसमेंट तेज हुआ.
1972: Permanent Account Number (PAN) सिस्टम शुरू किया गया. बड़े कारोबारियों पर नजर रखने के लिए एक स्पेशल सेल बनाई गई.
1980: Hotel Receipt Tax Act लागू हुआ.
1982: इनकम टैक्स विभाग में कंप्यूटरीकरण की शुरुआत हुई.
1984: Taxation Laws Amendment Act 1984 लाया गया, जिससे तमाम आसान हुईं.
1988: Benami Transactions Prohibition Act, 1988 आया. Direct Tax Law को सिक्किम तक बढ़ाया गया.
1992: Presumptive Taxation Scheme लाई गई. इसका मकसद था कि छोटे टैक्सपेयर्स को भी टैक्स नेट में लाया जाए.
1994: नया PAN सिस्टम लागू हुआ. Regional Computer Centres बने.
1997: टैक्स दरें काफी घटाईं गईं. Minimum Alternate Tax (MAT) और VDS 1997 लागू हुई.
1998: 1.10.1998 के बाद दिए गए गिफ्ट पर Gift Tax खत्म किया गया. कर विवाद समाधान स्कीम लाई गई.
2002: पूरे देश में Computerised Return Processing शुरू हुई. Income Tax Department की National Website (www.incometaxindia.gov.in) लॉन्च हुई.
2004: Fringe Benefit Tax (FBT) और Securities Transaction Tax (STT) लागू हुआ.
2006: E-Filing Project शुरू हुआ. Income Tax Ombudsman नियुक्त किए गए.
2014: नई Income Tax Website लॉन्च हुई. Swiss Bank खातों की जांच के लिए SIT बनाई गई. इस वक्त इनकम टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये की गई थी. उसके बाद से अब तक टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये ही है.
2017: इसी साल से उन लोगों पर फीस लगाना शुरू किया गया, जो लोग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की लास्ट डेट के बाद आईटीआर भरते हैं. साथ ही ₹2.5–5 लाख के स्लैब पर टैक्स 10% से घटाकर 5% कर दिया गया. बता दें कि सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स छूट की सीमा 3 लाख रुपये और सुपर सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये है. इसके बाद से उस टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया, जो अब पुरानी टैक्स व्यवस्था के नाम से जानी जाती है.

2018: नौकरीपेशा लोगों के लिए 40 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को शुरू किया गया. इसके अलावा बाकी सभी टैक्स स्लैब वही रहे.
2019: Faceless Assessment Scheme की नींव रखी गई. PAN और Aadhaar इंटरचेंजेबल बने. Document Identification Number (DIN) की शुरुआत की गई. इकनम टैक्स के स्लैब तो वैसे ही रहे, लेकिन 5 लाख रुपये तक की सैलरी होने पर कोई टैक्स नहीं लगने की सुविधा दी गई. यह सुविधा 87ए के रिबेट के तहत मिली. इसी साल स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया.
2020: Faceless Assessment & Appeal Scheme पूरी तरह लागू हुई. Vivad se Vishwas Scheme लाई गई. इसी साल 2020-21 के बजट में न्यू इनकम टैक्स रिजीम की शुरुआत की गई. यहां देखिए क्या थे टैक्स स्लैब.

2021: नया E-Filing Portal लॉन्च हुआ. Settlement Commission बंद की गई. देश की आजादी को 75 साल होने पर 2021-22 के बजट में 75 साल से ऊपर के उन बुजुर्गों को आईटीआर फाइलिंग से छूट दी गई, जिनकी कमाई सिर्फ पेंशन या ब्याज से हो रही थी. इसके अलावा टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया.
2022: Updated Return की सुविधा दी गई. बाकी टैक्स स्लैब को जस का तस रखा गया.
2023: इस साल के बजट में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम में 87ए के तहत रिबेट के साथ इनकम टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया.
2024: सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया, जो पहले 50 हजार रुपये थी.
2025: सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम में 87ए के तहत रिबेट के साथ इनकम टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया. साथ ही बेसिक इनकम टैक्स छूट की सीमा को भी 3 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया.

भारत का इनकम टैक्स सिस्टम 1860 में अमीरों पर लगाए गए टैक्स से शुरू होकर आज टेक्नोलॉजी-ड्रिवन, फेसलेस और आसान सिस्टम बन चुका है. समय के साथ टैक्स स्लैब, छूट और नियम बदले, जिससे टैक्स कंप्लायंस बढ़ा और आम करदाता को भी राहत मिली.
A. 1860 में, ब्रिटिश शासन के दौरान.
A. Income Tax Act, 1961 और PAN सिस्टम की शुरुआत.
A. 1972 में.
A. बजट 2020-21 में.
A. नई टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये (रिबेट के साथ).