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गुजरात हाईकोर्ट ने CBDT को निर्देश दिया है कि जिन टैक्सपेयर्स (Taxpayers) को ऑडिट करवाना जरूरी है, उनके लिए ITR की डेडलाइन (Due Date) को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 नवंबर 2025 कर दिया जाए. कोर्ट ने कहा कि आयकर कानून (Income Tax Act, 1961) के तहत यह जरूरी है कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Tax Audit Report) और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing) की तारीख के बीच कम से कम एक महीने का अंतर हो.
मामला तब उठा जब CBDT ने हाल ही में ऑडिट रिपोर्ट की तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2025 कर दी, लेकिन ITR फाइल करने की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया. इस असमानता को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
जस्टिस भार्गव करिया की बेंच ने कहा कि टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और ITR फाइलिंग की प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. कोर्ट ने पूछा कि जब CBDT ने ऑडिट रिपोर्ट की तारीख बढ़ाई तो ITR की तारीख क्यों नहीं बढ़ाई गई. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह एक “कानूनी सुरक्षा” है ताकि टैक्सपेयर्स को पर्याप्त समय मिल सके.
इनकम टैक्स बार एसोसिएशन (Income Tax Bar Association) ने तर्क दिया कि सेक्शन 44AB की Explanation (ii) के तहत, ऑडिट रिपोर्ट की तारीख हमेशा ITR की तारीख से एक महीने पहले होनी चाहिए. जब CBDT ने ऑडिट रिपोर्ट की डेडलाइन 31 अक्टूबर कर दी, तो ITR की तारीख अपने आप 30 नवंबर हो जानी चाहिए.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिना एक महीने का गैप दिए ITR भरना तकनीकी गलतियों (Errors) और नॉन-कंप्लायंस (Non-compliance) की वजह बन सकता है, खासकर बड़ी कंपनियों के लिए.
कोर्ट ने CBDT से पूछा कि किस अधिकार से उसने एक तारीख तो बढ़ा दी और दूसरी को वैसा ही रखा. कोर्ट ने साफ कहा कि यह प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैधानिक (Statutory) मामला है, जिसे बदला नहीं जा सकता.
इस आदेश के बाद, जिन टैक्सपेयर्स को ऑडिट करवाना होता है, उन्हें अब 30 नवंबर 2025 तक का समय मिल जाएगा. यानी अब उन्हें अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स को सही तरीके से तैयार करने और ऑडिट के बाद ITR दाखिल करने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा. कई टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश न्यायसंगत है. इससे टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी और समय की कमी के कारण गलतियां कम होंगी.
कोर्ट ने CBDT को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द एक नया नोटिफिकेशन जारी करे, जिसमें ITR की नई डेडलाइन स्पष्ट रूप से 30 नवंबर 2025 बताई जाए.
गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला टैक्सपेयर्स के लिए राहत भरा कदम है. यह आदेश न केवल टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाएगा बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ाएगा. अब CBDT को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे से इस तरह की डेट में असमानता न हो.
ITR यानी इनकम टैक्स रिटर्न, जिसमें आप अपनी सालभर की आय की जानकारी देते हैं.
यह रिपोर्ट एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा तैयार की जाती है जो आपके फाइनेंशियल रिकॉर्ड की जांच करता है.
अब ऑडिट केस वालों के लिए 30 नवंबर 2025 तक ITR भरा जा सकेगा.
नहीं, सिर्फ कुछ तय लिमिट से ज्यादा टर्नओवर या प्रोफेशनल इनकम वालों को ही ऑडिट करवाना होता है.
CBDT यानी Central Board of Direct Taxes, जो आयकर विभाग की शीर्ष संस्था है.
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