सैलरी भले ही ₹4 लाख से भी कम हो, पर एफडी पर TDS कटेगा! जानिए FD पर Tax बचाने का क्या है नियम, भरना होगा ये फॉर्म

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से होने वाली ब्याज की कमाई पर टैक्स आपकी सालाना आय के टैक्स स्लैब के अनुसार लगता है. बैंक केवल एक एडवांस टैक्स के रूप में 10% टीडीएस (TDS) काटते हैं, लेकिन अगर आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो आपको बचा हुआ टैक्स खुद चुकाना पड़ता है.
सैलरी भले ही ₹4 लाख से भी कम हो, पर एफडी पर TDS कटेगा! जानिए FD पर Tax बचाने का क्या है नियम, भरना होगा ये फॉर्म

अक्सर लोग सोचते हैं कि बैंक ने 10% टीडीएस काट लिया तो टैक्स का काम खत्म हो गया, लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

Income Tax: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना ऊपर से बहुत आसान और सुरक्षित लगता है- आप बैंक में पैसा जमा करते हैं, उस पर तय ब्याज मिलता है और समय पूरा होने पर आपको आपका पैसा मिल जाता है. लेकिन कई बार जब मैच्योरिटी का पैसा खाते में आता है, तो वह उम्मीद से कम होता है, जिसे देखकर निवेशक हैरान रह जाते हैं. ऐसा बैंक द्वारा काटे गए टीडीएस (TDS-टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) के कारण होता है.

मान लीजिए आपकी सैलरी 4 लाख रुपये से भी कम है यानी आप टैक्स छूट के दायरे में आते हैं. आपने 7.5% सालाना ब्याज पर ₹10 लाख की एफडी कराई. साल के अंत में आपको ₹75,000 ब्याज मिलना चाहिए था, लेकिन खाते में केवल ₹67,500 ही क्रेडिट हुए. बाकी के ₹7,500 बैंक ने टीडीएस के रूप में काट लिए. यह 10% की कटौती अंतिम टैक्स नहीं है, बल्कि आपके टैक्स का केवल एक एडवांस हिस्सा है. यानी इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी सैलरी कितनी है, एफडी पर मिला ब्याज तय करेगा कि उस पर टीडीएस कटेगा या नहीं. आइए एफडी पर टैक्स के नियमों को आसान भाषा में समझते हैं.

स्लैब के हिसाब से लगता है पूरा टैक्स

अगर आपको एफडी से ₹75,000 का ब्याज मिलता है, तो इस स्थिति में बैंक ने भले ही आपका ₹7,500 (10%) टीडीएस काटा हो, लेकिन अगर आप पुराने रिजीम या ऊंचे ब्रैकेट में हैं और आपकी कुल देनदारी 30% वाले स्लैब में बनती है, तो आपको बचा हुआ टैक्स (सेस के साथ) खुद आईटीआर (ITR) भरते समय सरकार को चुकाना होगा. यह कमाई अन्य स्रोत से कमाई वाले कॉलम में दिखाई जाती है. अतिरिक्त टैक्स ना भरने पर आयकर विभाग से बकाया टैक्स का नोटिस आ सकता है.

हर साल कटता है टैक्स

कई निवेशक सोचते हैं कि जब 5 साल बाद एफडी मैच्योर होगी, तब एक साथ टैक्स देंगे. लेकिन नियम के मुताबिक, एफडी का ब्याज हर साल आपके खाते में जुड़ता (Accrue) रहता है. बैंक हर साल के अंत में आपके उस साल के ब्याज की जानकारी आयकर विभाग को रिपोर्ट कर देता है, इसलिए आपको हर साल मिलने वाले ब्याज पर सालाना आधार पर ही टैक्स देना होता है.

टीडीएस (TDS) काटने की सीमा क्या है?

बैंक आपकी एफडी पर टीडीएस तभी काटते हैं जब एक वित्तीय वर्ष में आपका कुल ब्याज एक निश्चित सीमा को पार करता है:

आम नागरिकों के लिए: अगर एक बैंक से साल भर में मिलने वाला कुल ब्याज ₹40,000 से अधिक हो.

वरिष्ठ नागरिकों के लिए (60 वर्ष या उससे ऊपर): अगर साल भर का कुल ब्याज ₹50,000 से अधिक हो.

एक ही बैंक की सभी एफडी जोड़ी जाती हैं

यह एक आम गलतफहमी है कि ₹40,000 की लिमिट हर एफडी पर अलग से लागू होती है. हकीकत यह है कि एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में रखी आपकी सभी एफडी के ब्याज को आपस में जोड़ा जाता है. उदाहरण के लिए, अगर आपकी एक ही बैंक में ₹15,000-₹15,000 की 3 अलग एफडी हैं, तो कुल ब्याज ₹45,000 हो गया. यह लिमिट से ज्यादा है, इसलिए बैंक पूरी राशि पर टीडीएस काटेगा.

पैन (PAN) कार्ड लिंक न होने पर डबल नुकसान

अगर आपका पैन कार्ड बैंक खाते से सही तरीके से लिंक है, तो बैंक केवल 10% की दर से टीडीएस काटेगा. लेकिन अगर बैंक के पास आपका पैन कार्ड नहीं है या वह इनएक्टिव है, तो बैंक सीधे 20% की दर से भारी टीडीएस काट लेता है, जिससे आपकी मिलने वाली राशि बहुत कम हो जाती है.

डाकघर की एफडी पर क्या हैं नियम?

पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट (POTD) पर भी बैंकों की तरह ही टैक्स के नियम लागू होते हैं. 1 साल, 2 साल और 3 साल की पोस्ट ऑफिस एफडी का ब्याज आपके टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह कर योग्य होता है. हालांकि, 5 साल की पोस्ट ऑफिस एफडी पर आपको पुरानी टैक्स व्यवस्था में आयकर की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ मिलता है. टीडीएस काटने की सीमा यहां भी बैंकों की तरह ₹40,000 और ₹50,000 ही है.

बिना टैक्स चुकाए टीडीएस (TDS) से बचने का कानूनी तरीका

अगर आपकी कुल सालाना कमाई (एफडी ब्याज मिलाकर) इतनी कम है कि आप पर कोई टैक्स नहीं बनता, तो आप बैंक को टीडीएस काटने से रोक सकते हैं. इसके लिए आपको वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बैंक में एक डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करना होता है:

फॉर्म 15G (Form 15G): यह फॉर्म 60 साल से कम उम्र के उन नागरिकों के लिए है जिनकी कुल सालाना आय टैक्स छूट की बेसिक सीमा से कम है.

फॉर्म 15H (Form 15H): यह फॉर्म केवल वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से ऊपर) के लिए होता है, जिनका उस साल का कुल टैक्स शून्य (Nil) बनने वाला हो. यह फॉर्म जमा करने के बाद बैंक आपकी एफडी पर टीडीएस काटना बंद कर देते हैं.

एक जरूरी टिप

अगर आप हर साल फॉर्म 15G या 15H जमा करके टीडीएस बचाते हैं, तो ध्यान रखें कि यह फॉर्म आपको हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में (यानी अप्रैल या मई के महीने में) ही जमा कर देना चाहिए, क्योंकि अगर बैंक ने एक बार ब्याज जारी करके टीडीएस काट लिया, तो बैंक उसे वापस नहीं कर सकता, फिर उसे वापस पाने के लिए आपको अगले साल आईटीआर (ITR) ही फाइल करना होगा.

Conclusion

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते समय केवल ब्याज दर देखना काफी नहीं है, बल्कि उससे मिलने वाले 'टैक्स के बाद के रिटर्न' (Post-Tax Return) को समझना जरूरी है. यदि आप ऊंचे टैक्स स्लैब में आते हैं, तो टैक्स के बाद एफडी का वास्तविक मुनाफा थोड़ा कम हो जाता है. अंतिम समय की कानूनी उलझनों और नोटिस से बचने के लिए हमेशा अपने फॉर्म 26AS और एआईएस (AIS) में बैंक द्वारा रिपोर्ट किए गए ब्याज का मिलान कर लें और सही समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करें.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या बैंक द्वारा काटा गया 10% टीडीएस (TDS) ही आखिरी टैक्स है?

नहीं, टीडीएस केवल एडवांस टैक्स है. अंतिम टैक्स आपकी कुल सालाना कमाई के टैक्स स्लैब के हिसाब से तय होता है.

Q2 बैंक एफडी पर किस सीमा (Limit) के बाद टीडीएस काटते हैं?

सालाना ब्याज आम नागरिकों के लिए ₹40,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 से अधिक होने पर टीडीएस कटता है.

Q3 बैंक में पैन (PAN) कार्ड लिंक न होने पर क्या नुकसान होता है?

पैन कार्ड लिंक न होने पर बैंक 10% के बजाय सीधे 20% की दर से भारी टीडीएस काट लेता है.

Q4 5 साल की टैक्स सेवर एफडी (Tax Saver FD) क्या होती है?

इसमें 5 साल का लॉक-इन होता है और निवेश की गई मूल रकम पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है.

Q5 फॉर्म 15G (Form 15G) और फॉर्म 15H (Form 15H) क्या हैं?

अगर आपकी कुल सालाना आमदनी पर कोई टैक्स नहीं बनता, तो बैंक को टीडीएस काटने से रोकने के लिए यह फॉर्म जमा किया जाता है. (15G आम नागरिकों के लिए, 15H वरिष्ठ नागरिकों के लिए).

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