Explainer: जानिए क्या होता है Marginal Tax Relief? ₹12 लाख से ऊपर कमाने वालों को मिलता है फायदा! सटीक कैल्कुलेशन

नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स रिबेट के कारण टैक्स नहीं देना पड़ता. लेकिन अगर आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा हो जाती है, तो अचानक भारी टैक्स न लग जाए, इसके लिए Marginal Tax Relief का प्रावधान है. यह सुनिश्चित करता है कि अतिरिक्त आय से ज्यादा टैक्स न देना पड़े और आपकी टेक-होम इनकम कम न हो जाए.
Explainer: जानिए क्या होता है Marginal Tax Relief? ₹12 लाख से ऊपर कमाने वालों को मिलता है फायदा! सटीक कैल्कुलेशन

अगर आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा हो जाती है, तो अचानक भारी टैक्स न लग जाए, इसके लिए Marginal Tax Relief का प्रावधान है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

ITR Filing का दौर शुरू हो गया है. अब कर्माचरियों को उनके फॉर्म-16 भी मिलने शुरू हो जाएंगे और 15 जून तक सभी कर्मचारियों के हाथ में उनके फॉर्म-16 होंगे. इस बार से 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री कर दी गई है, बशर्ते आपकी कुल टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये से कम हो.

ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त अक्सर कुछ लोग ये सोचते हैं कि अगर उनकी इनकम 12 लाख से 1 रुपये भी ज्यादा हुई तो 87ए की रिबेट का फायदा नहीं मिलेगा, जिसकी वजह से उन पर भारी टैक्स लगेगा. तो क्या 12 लाख रुपये से एक रुपया भी ज्यादा टैक्सेबल इनकम हुई तो आपको सारे पैसों पर यानी करीब 60,00 रुपये का टैक्स देना होगा. मतलब सिर्फ 1 रुपये ज्यादा कमाने की वजह से 60,000 रुपये का टैक्स?

खैर, घबराने की जरूरत नहीं है. इनकम टैक्स विभाग भी इस बात को समझता है. यही वजह है कि वह ऐसे मामलों में मार्जिनल टैक्स रिलीफ (Marginal Tax Relief) देता है. आइए समझते हैं क्या है ये और कैसे काम करता है.

Marginal Tax Relief क्या है?

Marginal Tax Relief एक ऐसा टैक्स बेनिफिट है जो नई टैक्स व्यवस्था (Section 115BAC) में उन Resident Individuals को मिलता है जिनकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से थोड़ी अधिक होती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ₹12 लाख की सीमा पार करते ही टैक्स का बोझ अतिरिक्त आय से ज्यादा न हो जाए. इसलिए टैक्स को सीमित कर दिया जाता है ताकि टैक्सदाता की अतिरिक्त कमाई का फायदा बना रहे.

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आगे बढ़ने से पहले टैक्सेबल इनकम को समझ लें

जब बात इनकम टैक्स कैलकुलेट करनी की होती है तो वह आपकी कमाई पर नहीं, बल्कि आपकी टैक्सेबल इनकम पर कैलकुलेट होता है. तो भले ही आपने कितना भी पैसा कमाया हो, लेकिन अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये या उससे कम है तो आप पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

एक उदाहरण से समझते हैं

मान लीजिए आपने 15 लाख रुपये कमाए, जिसमें 2 लाख रुपये आपको रीइम्बर्समेंट के रूप में मिले और 50 हजार रुपये आपने कॉरपोरेट एनपीएस में डाले. बता दें कि नई टैक्स व्यवस्था में कॉरपोरेट एनपीएस पर टैक्स छूट मिलती है. अब आपकी टैक्सेबल इनकम बची (15 लाख- 2.5 लाख) 12.5 लाख रुपये. इसमें से आप स्टैंडर्ड डिडक्शन के 75 हजार रुपये घटाएंगे. तो आपकी फाइनल टैक्सेबल इनकम हो जाती है 11.75 लाख रुपये. ये 12 लाख से कम है तो पूरी तरह टैक्स फ्री होगी.

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अब जानिए आखिर सरकार को Marginal Relief की जरूरत क्यों पड़ी?

कल्पना कीजिए कि दो लोग हैं. पहला व्यक्ति A, जिसकी कमाई ₹12,00,000 है. दूसरा है व्यक्ति B, जिसकी कमाई ₹12,10,000 है. नई टैक्स व्यवस्था में व्यक्ति A की टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है, क्योंकि उसे 87ए की रिबेट मिल जाती है. लेकिन व्यक्ति B की कमाई सिर्फ ₹10,000 ज्यादा है.

अगर Marginal Relief न हो तो उस पर करीब ₹61,500 का टैक्स बनता है. यानी:

  • अतिरिक्त आय = ₹10,000
  • टैक्स = ₹61,500

ऐसे में व्यक्ति B की नेट कमाई व्यक्ति A से कम हो जाएगी, जबकि उसने पैसे ज्यादा कमाए, पर टैक्स बहुत ज्यादा कट गया. यही टैक्स क्लिफ (Tax Cliff) समस्या है, जिसे Marginal Relief खत्म करती है.

Marginal Relief कैसे काम करती है?

नियम बहुत सरल है.

"टैक्स आपकी अतिरिक्त आय से ज्यादा नहीं हो सकता."

दूसरे शब्दों में, ₹12 लाख से जितनी आय ज्यादा होगी, अधिकतम उतना ही टैक्स देना पड़ेगा, जब तक Marginal Relief लागू रहता है.

₹12.10 लाख की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स कैसे निकलेगा?

मान लीजिए आपकी कुल आय ₹12,10,000 है.

Step 1: सामान्य स्लैब के हिसाब से टैक्स निकालें

आय का हिस्साटैक्स दरटैक्स
पहले ₹4 लाखNil₹0
अगले ₹4 लाख5%₹20,000
अगले ₹4 लाख10%₹40,000
बचे ₹10,00015%₹1,500
कुल टैक्स -₹61,500

अगर Marginal Relief न होती तो टैक्स ₹61,500 देना पड़ता.

एक नजर न्यू इनकम टैक्स व्यवस्था की ब्याज दरों पर

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Step 2: अतिरिक्त कमाई निकालें

₹12,10,000 – ₹12,00,000

= ₹10,000

Step 3: तुलना करें

विवरणराशि
स्लैब के अनुसार टैक्स₹61,500
अतिरिक्त कमाई₹10,000

टैक्स अतिरिक्त आय से ज्यादा है, इसलिए राहत मिलेगी.

Step 4: Marginal Relief निकालें

₹61,500 – ₹10,000

= ₹51,500

यही Marginal Relief है.

Step 5: अंतिम टैक्स

₹61,500 – ₹51,500

= ₹10,000

यानी ₹12.10 लाख आय वाले व्यक्ति को सिर्फ ₹10,000 टैक्स देना होगा, ना कि 61,500 रुपये का.

Marginal Relief एक नजर में

पॉइंटजानकारी
किस पर लागू होती है?Resident Individuals
किस व्यवस्था में?New Tax Regime (115BAC)
रिबेट सीमा₹12 लाख
उद्देश्यटैक्स क्लिफ से बचाना
अधिकतम रिबेट₹60,000
राहत लगभग कब तक?₹12.75 लाख तक

अलग-अलग आय पर कितना टैक्स देना होगा?

कुल आयMarginal Relief के बिना टैक्सवास्तविक टैक्स
₹12,10,000₹61,500₹10,000
₹12,50,000₹67,500₹50,000
₹12,70,000₹70,500₹70,000
₹12,75,000₹71,250₹71,250

यहां ₹12.75 लाख के आसपास जाकर राहत खत्म हो जाती है.

₹12.75 लाख के बाद क्या होता है?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है.

Marginal Relief हमेशा नहीं मिलती.

जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ती है, अतिरिक्त आय और टैक्स का अंतर कम होता जाता है.

एक समय ऐसा आता है जब:

टैक्स ≤ अतिरिक्त आय

तब राहत की जरूरत नहीं रह जाती.

यही कारण है कि आपकी टैक्सेबल इनकम लगभग ₹12.75 लाख के आसपास पहुंचने के बाद आपको मिलने वाली Marginal Relief समाप्त हो जाती है.

यदि आपकी सालाना आय:

  • ₹11.5 लाख से ₹12 लाख के बीच है, तो रिबेट महत्वपूर्ण है.
  • ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर है, तो Marginal Relief आपकी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकती है.
  • ₹12.75 लाख से ऊपर है, तो सामान्य टैक्स स्लैब का असर ज्यादा दिखेगा.

इसलिए सिर्फ आय ₹12 लाख पार होने से घबराने की जरूरत नहीं है.

अगर यह राहत न होती तो:

  • ₹10,000 अतिरिक्त कमाई पर ₹61,500 टैक्स देना पड़ सकता था. व्यक्ति की टेक-होम इनकम घट सकती थी.
  • इसलिए सरकार ने सुनिश्चित किया है कि अतिरिक्त आय का लाभ टैक्सदाता के पास ही रहे.

Conclusion

Marginal Tax Relief नई टैक्स व्यवस्था की सबसे कम समझी जाने वाली लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सुविधा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ₹12 लाख की रिबेट सीमा पार करते ही टैक्सदाता को अचानक भारी टैक्स का झटका न लगे. यदि आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी अधिक है, तो यह राहत आपकी टेक-होम इनकम को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 Marginal Relief क्या होती है?

Marginal Relief एक टैक्स राहत है, जो यह सुनिश्चित करती है कि ₹12 लाख की रिबेट सीमा पार करने के बाद किसी व्यक्ति को उसकी अतिरिक्त आय से ज्यादा टैक्स न देना पड़े. इसका मकसद टैक्स क्लिफ (Tax Cliff) की समस्या को रोकना है.

Q2 Marginal Relief किसे मिलती है?

यह राहत नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत केवल Resident Individuals को मिलती है, जिनकी कुल आय ₹12 लाख से थोड़ी अधिक होती है.

Q3 अगर मेरी आय ₹12.10 लाख है तो कितना टैक्स लगेगा?

सामान्य स्लैब के हिसाब से टैक्स लगभग ₹61,500 बनता है, लेकिन Marginal Relief के बाद आपको सिर्फ ₹10,000 टैक्स देना होगा.

Q4 ₹12.50 लाख की आय पर कितना टैक्स देना होगा?

₹12.50 लाख की आय पर सामान्य टैक्स लगभग ₹67,500 बनता है, लेकिन Marginal Relief के कारण वास्तविक टैक्स ₹50,000 ही देना होगा.

Q5 Marginal Relief कब तक मिलती है?

यह राहत लगभग ₹12.75 लाख की कुल आय तक उपलब्ध रहती है. इसके बाद सामान्य टैक्स नियम लागू होने लगते हैं.

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