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टैक्स का नाम सुनते ही अक्सर लोग घबरा जाते हैं और अगर रिटर्न भरते वक्त कोई गलती हो जाए, तो डर और बढ़ जाता है. लेकिन आयकर (Income Tax) विभाग आपको अपनी गलतियां सुधारने के दो अलग-अलग रास्ते देता है- 'रिवाइज्ड आईटीआर' और 'अपडेटेड आईटीआर'. सुनने में ये दोनों एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके नियम, फायदे और नुकसान बिल्कुल अलग हैं.
31 दिसंबर 2025 की तारीख नजदीक आ रही है. यह उन लोगों के लिए आखिरी मौका है जिन्होंने अपना ओरिजिनल रिटर्न तो भर दिया था, लेकिन अब उसमें कोई सुधार करना चाहते हैं. अगर आप इस डेडलाइन को चूक जाते हैं, तो आपके पास सिर्फ 'अपडेटेड' रिटर्न का ही रास्ता बचेगा, जो आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है.
रिवाइज्ड रिटर्न (धारा 139(5)) उन लोगों के लिए है, जिन्होंने समय पर अपना रिटर्न भरा है, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि कोई जानकारी छूट गई है या गलत दर्ज हो गई है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सुधार करने पर आपको कोई अतिरिक्त पेनल्टी नहीं देनी पड़ती. आप अपनी आय, निवेश या टैक्स छूट के दावों को बदल सकते हैं. एसेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है.
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दूसरी तरफ 'अपडेटेड रिटर्न' (धारा 139(8A)) उन लोगों के लिए एक वरदान की तरह है जो अपना ओरिजिनल या बिलेटेड (देरी से भरा जाने वाला) रिटर्न भरना ही भूल गए थे. यह आपको एसेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद 24 से 48 महीनों तक का समय देता है. लेकिन यहां एक पेंच है- आप अपडेटेड रिटर्न तभी भर सकते हैं जब आपकी 'टैक्स देनदारी' बढ़ रही हो. यानी आप इसे रिफंड लेने या घाटा (Loss) दिखाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते.
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1- पात्रता: रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए आपका ओरिजिनल रिटर्न भरा होना अनिवार्य है. वहीं, अपडेटेड रिटर्न आप तब भी भर सकते हैं जब आपने पहले कोई रिटर्न न भरा हो.
2- टैक्स का बोझ: रिवाइज्ड रिटर्न में आप टैक्स कम भी दिखा सकते हैं (अगर गलती से ज्यादा दिखाया था). लेकिन अपडेटेड रिटर्न में आपको हमेशा अतिरिक्त टैक्स ही देना होगा; आप अपना टैक्स कम नहीं कर सकते.
3- पेनल्टी का खेल: रिवाइज्ड रिटर्न पर कोई पेनल्टी नहीं लगती. लेकिन अपडेटेड रिटर्न भरने पर आपको बकाया टैक्स का 25% से 50% तक अतिरिक्त शुल्क (Additional Tax) देना पड़ता है.
4- समय सीमा: रिवाइज्ड रिटर्न के लिए आपके पास एसेसमेंट ईयर के दिसंबर तक का समय होता है. अपडेटेड रिटर्न आप संबंधित एसेसमेंट ईयर के अंत से 4 साल बाद तक भर सकते हैं.
5- रिफंड और लॉस: रिवाइज्ड रिटर्न के जरिए आप अपना रुका हुआ रिफंड मांग सकते हैं या बिजनेस लॉस को आगे ले जा सकते हैं. अपडेटेड रिटर्न में रिफंड मांगने या लॉस को कैरी फॉरवर्ड करने की इजाजत नहीं होती.
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समझदारी इसी में है कि अगर आपके आईटीआर में कोई भी कमी है, तो उसे 31 दिसंबर 2025 से पहले 'रिवाइज्ड रिटर्न' के जरिए ठीक कर लें. इससे आप न सिर्फ भारी पेनल्टी से बचेंगे, बल्कि विभाग की किसी भी तरह की जांच (Scrutiny) से भी सुरक्षित रहेंगे. अपडेटेड रिटर्न उन लोगों के लिए अंतिम विकल्प है जिनके पास और कोई रास्ता नहीं बचा है. नए साल का जश्न बिना किसी टैक्स की चिंता के मनाने के लिए, इस हफ्ते अपनी फाइल दोबारा जरूर चेक करें.
A- एसेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है.
A- नहीं, रिवाइज्ड आईटीआर भरने के लिए पहले ओरिजिनल या बिलेटेड रिटर्न भरा होना जरूरी है.
A- अपडेटेड रिटर्न में आपको बकाया टैक्स पर 25% से 50% तक अतिरिक्त टैक्स (Additional Tax) देना पड़ता है.
A- नहीं, अपडेटेड रिटर्न का इस्तेमाल रिफंड दावा करने या टैक्स देनदारी कम करने के लिए नहीं किया जा सकता.
A- इसे संबंधित एसेसमेंट ईयर के खत्म होने के बाद 24 महीनों (कुछ मामलों में 48 महीनों तक) के भीतर भरा जा सकता है.
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