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Income Tax Last Date Extension: पिछले साल (Last Year) की तुलना में इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का आंकड़ा काफी कम है. 31 जुलाई 2024 तक 7.28 करोड़ लोगों ने रिटर्न फाइल कर दिया था. वहीं इस बार 7 सितंबर 2025 तक यह आंकड़ा सिर्फ 4.89 करोड़ पर ही है.
मतलब, पिछली बार की तुलना में इस बार करोड़ों लोग अभी तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाए हैं. जबकि डेडलाइन (Deadline) सिर्फ 15 सितंबर तक है. ऐसे में साफ है कि फाइलिंग की रफ्तार धीमी पड़ी है और लाखों करदाताओं (Taxpayers) पर पेनाल्टी (Penalty) का खतरा मंडरा रहा है. बता दें कि सरकार पहले ही एक बार आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन को 31 जुलाई 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर कर चुकी है. अब सवाल ये है कि क्या फिर से डेडलाइन बढ़ानी पड़ेगी?
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रिटर्न फाइलिंग की तुलना करने पर अंतर साफ नजर आता है. पिछली बार यानी 31 जुलाई 2024 तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का आंकड़ा 7.28 करोड़ तक पहुंच गया था. यही नहीं, उसी दिन यानी 31 जुलाई को ही 69.92 लाख लोगों ने रिटर्न फाइल किया था, जो एक दिन में रिकॉर्ड था. इस दौरान नए टैक्स रेजीम के तहत 5.27 करोड़ लोगों ने रिटर्न भरा और 58.57 लाख लोग ऐसे थे, जिन्होंने पहली बार आईटीआर फाइल किया.
इसके मुकाबले इस साल स्थिति बिल्कुल अलग दिख रही है. 7 सितंबर 2025 तक यानी आखिरी तारीख से एक हफ्ते पहले तक सिर्फ 4.89 करोड़ रिटर्न ही फाइल हो पाए हैं. हालांकि, इनमें से 4.63 करोड़ रिटर्न वेरिफाई भी हो चुके हैं और 3.35 करोड़ लोगों के रिफंड प्रोसेस हो चुके हैं. इससे साफ है कि इस बार फाइलिंग में देरी हो रही है.

कई कारण बताए जा रहे हैं जिनकी वजह से इस बार लोग समय पर रिटर्न फाइल नहीं कर पा रहे. इस साल तमाम आईटीआर फॉर्म में कई बदलाव किए गए हैं, इसी वजह से सरकार ने इस बार लास्ट डेट को 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर किया था. हालांकि, अभी भी बहुत सारे लोगों को कुछ दिक्कतें हो रही हैं. कई लोगों को फॉर्म 16 (Form 16) और अन्य डॉक्यूमेंट देर से मिले हैं. वहीं कुछ टेक्निकल गड़बड़ियों के कारण पोर्टल (Portal) पर भी दिक्कतें आईं हैं. ऐसे में बहुत सारे लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार फिर से डेडलाइन बढ़ा देगी.
सोशल मीडिया (Social Media) पर खूब मैसेज वायरल हो रहे हैं कि सरकार डेडलाइन (Deadline) बढ़ा सकती है. कई टैक्स प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री एसोसिएशन और सीए (CA) भी यही मांग कर रहे हैं. पिछले साल भी सरकार ने डेडलाइन 31 जुलाई से आगे नहीं बढ़ाई थी. लेकिन इस बार आंकड़े देखकर लगता है कि अगर करोड़ों लोग समय पर रिटर्न नहीं फाइल कर पाए तो सरकार को मजबूरन राहत देनी पड़ सकती है.
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी (ITR Filing Last Date) गई है. लेकिन अगर आप इस नई डेडलाइन (ITR Filing Deadline) से भी चूक जाते हैं, तो आपको भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. आइए जानते हैं ऐसा करने के 5 बड़े नुकसान.
अगर आप तय तारीख तक ITR फाइल नहीं करते हैं, तो आपको ₹5000 तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है. हालांकि, जिन टैक्सपेयर्स की टैक्सेबल इनकम ₹5 लाख से कम है, उनके लिए यह फीस अधिकतम ₹1000 है.
अगर आपका कोई टैक्स बकाया है, तो आपको उस पर 1% प्रति माह की दर से साधारण ब्याज चुकाना होगा. यह ब्याज ड्यू डेट के अगले दिन से लेकर आपके ITR फाइल करने की तारीख तक लगाया जाएगा.
अगर आपको बिजनेस या कैपिटल गेन्स से कोई घाटा (Loss) हुआ है, जिसे आप अगले सालों के मुनाफे से एडजस्ट करना चाहते हैं, तो यह मौका आपके हाथ से निकल जाएगा. ड्यू डेट के बाद ITR फाइल करने पर आप हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान के अलावा किसी और नुकसान को कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते.
अगर आपकी इनकम टैक्सेबल है और फिर भी आप ITR फाइल नहीं करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग इसे टैक्स छुपाने का मामला मान सकता है. ऐसे में विभाग आप पर उस टैक्स का 50% तक का जुर्माना लगा सकता है, जिसे आपने ITR न भरकर बचाने की कोशिश की.
यह सबसे गंभीर नतीजा है. इनकम टैक्स अथॉरिटी के पास डिफ़ॉल्ट करने वाले टैक्सपेयर्स के खिलाफ मुकदमा चलाने का भी अधिकार है. इसमें कम से कम 3 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. अगर टैक्स चोरी की रकम ₹25 लाख से ज्यादा है, तो जेल की सजा 6 महीने से लेकर 7 साल तक हो सकती है. हालांकि, अगर टैक्स चोरी की रकम ₹10,000 तक है तो मुकदमा नहीं चलाया जाता.
7 सितंबर तक 4.63 करोड़ रिटर्न वेरिफाई हो चुके हैं और 3.35 करोड़ रिफंड प्रोसेस भी कर दिए गए हैं. इसका मतलब है कि सीबीडीटी (CBDT) और इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) पूरी तेजी से काम कर रहे हैं. लेकिन चुनौती यह है कि लाखों लोग अभी भी फाइलिंग से बाहर हैं. अगर आने वाले दिनों में रोजाना 40-50 लाख रिटर्न भी फाइल हों, तो भी टारगेट पूरा करना मुश्किल होगा.
इस बार आईटीआर फाइलिंग (ITR Filing) पिछली बार की तुलना में काफी धीमी है. आंकड़े साफ दिखाते हैं कि अगर सरकार डेडलाइन (Deadline) नहीं बढ़ाती, तो करोड़ों लोग पेनाल्टी और जुर्माने की जद में आ सकते हैं. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि हालात को देखते हुए सरकार राहत देगी.
यह सालाना कमाई और टैक्स भुगतान का ब्यौरा होता है.
कानूनी पालन के साथ-साथ रिफंड और फाइनेंशियल प्रूफ के लिए जरूरी है.
जुर्माना लगेगा, लेट फीस और ब्याज देना पड़ेगा.
15 सितंबर 2025.
संभावना है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई.
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