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इनकम टैक्स सिस्टम में फर्जीवाड़े पर अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज यानी CBDT ने बड़ा एक्शन मोड ऑन कर दिया है. CBDT ने डेटा-ड्रिवन अप्रोच के जरिए ऐसे टैक्सपेयर्स और बिचौलियों को चिन्हित किया है, जो इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त फर्जी कटौती और छूट का दावा कर रहे थे. खास तौर पर राजनीतिक दलों और ट्रस्टों को दान के नाम पर की जा रही गड़बड़ियों को लेकर टैक्स स्कैनर और ज्यादा सख्त हो गया है.
CBDT की जांच में सामने आया कि देशभर में कुछ इंटरमीडियरीज ने एजेंट्स का नेटवर्क बना रखा था. ये लोग कमीशन के बदले ऐसे रिटर्न फाइल कर रहे थे, जिनमें गलत क्लेम दिखाए जाते थे. इनमें सबसे ज्यादा मामले सेक्शन 80G और 80GGC के तहत दान की कटौती से जुड़े पाए गए. कई टैक्सपेयर्स ने रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज यानी RUPPs और कुछ चैरिटेबल ट्रस्टों को दान दिखाकर अपना टैक्स कम कर लिया और यहां तक कि फर्जी रिफंड भी ले लिया.
जांच में यह भी दिखा कि कई RUPPs सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं. न तो वे अपने रजिस्टर्ड पते पर ऑपरेट कर रही थीं और न ही किसी तरह की राजनीतिक एक्टिविटी में शामिल थीं. इन संस्थाओं का इस्तेमाल फंड रूटिंग, हवाला ट्रांजैक्शन और क्रॉस बॉर्डर रेमिटेंस के लिए किया जा रहा था. बदले में टैक्सपेयर्स को दान की फर्जी रसीदें दी जाती थीं, जिनके आधार पर कटौती क्लेम की जाती थी.
CBDT ने जब इनपुट के आधार पर कुछ RUPPs और ट्रस्टों पर फॉलो-अप सर्च किए, तो कई आपत्तिजनक सबूत मिले. इसमें व्यक्तियों द्वारा किए गए फर्जी दान और कंपनियों द्वारा दिखाए गए फर्जी CSR खर्च भी शामिल थे. इस पूरे एक्शन के बाद CBDT ने अपने डेटा एनालिटिक्स सिस्टम को और मजबूत किया, ताकि ऐसे संदिग्ध पैटर्न शुरुआती स्तर पर ही पकड़े जा सकें.
इसी डेटा एनालिसिस के दौरान टैक्स विभाग ने एक खास रिस्क पैटर्न पहचाना. यह पैटर्न उन टैक्सपेयर्स से जुड़ा है, जिन्होंने सेक्शन 80G या 80GGC के तहत ऐसी संस्थाओं को दान दिखाया है, जिनकी साख संदिग्ध है या जिनके बारे में जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. CBDT का मानना है कि ऐसे मामलों में दान की वास्तविकता पर सवाल उठता है.
इस स्थिति में सीधे नोटिस और पेनल्टी लगाने के बजाय CBDT ने एक टैक्सपेयर-फ्रेंडली रास्ता चुना है. इसके तहत ‘NUDGE’ कैंपेन लॉन्च किया गया है. इस कैंपेन का मकसद टैक्सपेयर्स को हल्का सा “धक्का” देना है, ताकि वे खुद आगे आकर अपनी गलती सुधार सकें. NUDGE के जरिए टैक्सपेयर्स को बताया जा रहा है कि अगर उनके रिटर्न में कोई गलत क्लेम है, तो वे समय रहते उसे वापस ले लें या अपडेटेड ITR फाइल कर दें.
CBDT के मुताबिक, इस मुहिम का असर भी दिखने लगा है. असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न रिवाइज किए हैं. इतना ही नहीं, पिछले सालों के लिए भी कई लोगों ने अपडेटेड ITR दाखिल की है. इससे साफ है कि टैक्सपेयर्स अब जोखिम समझ रहे हैं और आगे किसी बड़ी कार्रवाई से बचना चाहते हैं.
CBDT ने 12 दिसंबर 2025 से ऐसे टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल एडवाइजरी भेजना शुरू किया है, जिनके रिटर्न में संदिग्ध दान क्लेम पाए गए हैं. इन मैसेजेस में साफ तौर पर कहा जा रहा है कि टैक्सपेयर्स अपने रिटर्न की जांच करें और जरूरत हो तो उसे अपडेट करें.
टैक्स विभाग ने सभी टैक्सपेयर्स को सलाह दी है कि वे अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही और अपडेट रखें. ऐसा इसलिए जरूरी है, ताकि विभाग की कोई भी जरूरी सूचना या अलर्ट मिस न हो जाए. CBDT का कहना है कि सही जानकारी न होने की वजह से कई बार टैक्सपेयर्स अनजाने में परेशानी में पड़ जाते हैं.
अगर किसी टैक्सपेयर को कटौती के नियमों या अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को लेकर जानकारी चाहिए, तो वे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जा सकते हैं. कुल मिलाकर, CBDT का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब फर्जी दान और गलत टैक्स कटौती के दिन लद गए हैं. डेटा, टेक्नोलॉजी और NUDGE जैसे सॉफ्ट एक्शन के जरिए टैक्स सिस्टम को ज्यादा साफ और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है.
CBDT की NUDGE मुहिम क्या है?
यह एक टैक्सपेयर-फ्रेंडली पहल है, जिसमें टैक्सपेयर्स को अपनी गलतियों को खुद सुधारने का मौका दिया जाता है.
किन कटौतियों पर सबसे ज्यादा फोकस है?
मुख्य तौर पर सेक्शन 80G और 80GGC के तहत दान की कटौतियों पर.
SMS और ईमेल अलर्ट कब से भेजे जा रहे हैं?
12 दिसंबर 2025 से ऐसे टैक्सपेयर्स को अलर्ट भेजे जा रहे हैं, जिनके रिटर्न में संदिग्ध क्लेम हैं.
अगर गलती हो गई है तो क्या करें?
टैक्सपेयर अपने रिटर्न को रिवाइज या अपडेटेड ITR फाइल करके गलती सुधार सकते हैं.
ज्यादा जानकारी कहां मिलेगी?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट incometax.gov.in पर.