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Budget 2026 Expectation: भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स सिस्टम बदलते वक्त एक चीज सबसे पहले गई थी- मेडिकल रीइंबर्समेंट. अब, Budget 2026 से पहले उसी मेडिकल खर्च को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज है. फर्क बस इतना है कि इस बार मामला पुराने सिस्टम की वापसी का नहीं, बल्कि न्यू टैक्स रिजीम में हेल्थ खर्च को मान्यता देने का है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार मेडिकल रीइंबर्समेंट को जस का तस वापस लाने के बजाय, हेल्थ खर्च को लेकर एक नया, सीमित और टार्गेटेड सेक्शन जोड़ने पर विचार कर सकती है.
सवाल ये है- जब स्टैंडर्ड डिडक्शन पहले से है तो फिर नई छूट क्यों? मेडिकल रीइंबर्समेंट बंद क्यों किया गया था? पहले सिस्टम को समझना जरूरी है.
2018 तक नौकरीपेशा लोगों को मिलता था-
लेकिन इसमें दिक्कतें थीं:
इसी को खत्म करके सरकार ने ₹40,000 (बाद में ₹50,000) का स्टैंडर्ड डिडक्शन शुरू किया. मतलब- “कागज़ मत दिखाओ, सीधा टैक्स में छूट लो.” इसलिए मेडिकल रीइंबर्समेंट हटाना एक रिफॉर्म था.
क्योंकि स्टैंडर्ड डिडक्शन आज की हेल्थ रियलिटी को कवर नहीं करता.
भारत की हेल्थ हकीकत:
यही वजह है कि नीति-निर्माताओं के सामने सवाल है- क्या हेल्थ खर्च को सिर्फ “पर्सनल खर्च” मानते रहना सही है?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार तीन बातों पर मंथन कर रही है.
1. मेडिकल रीइंबर्समेंट की सीधी वापसी नहीं
पुराना मॉडल (बिल दिखाओ, पैसा लो) वापस नहीं आएगा, क्योंकि-
2. न्यू टैक्स रिजीम में अलग “Health Expense Deduction”
संभावना है कि:
3. गंभीर बीमारियों पर ज्यादा राहत
हेल्थ इंश्योरेंस (Section 80D) अकेला क्यों काफी नहीं?
आज की स्थिति: (सिर्फ ओल्ड टैक्स रिजीम में शामिल)
समस्या यह है कि:
इसीलिए हेल्थ सेक्टर की मांग रही है कि:
यह सिर्फ टैक्स राहत नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म हेल्थ स्ट्रैटेजी है.
सरकार के बड़े लक्ष्य:
अगर हेल्थ खर्च पर टैक्स राहत मिलती है:
फायदे:
नुकसान/जोखिम:
इसीलिए सरकार बीच का रास्ता तलाश रही है.
Budget 2026 में मेडिकल रीइंबर्समेंट की पुरानी स्कीम की वापसी संभव नहीं, लेकिन हेल्थ खर्च को टैक्स सिस्टम में जगह देना अब टालना मुश्किल होता जा रहा है. अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम में सीमित, टार्गेटेड, डिजिटल-फ्रेंडली हेल्थ डिडक्शन लाती है, तो यह सिर्फ टैक्स रिफॉर्म नहीं बल्कि सोशल रिफॉर्म होगा. अब निगाहें 1 फरवरी पर हैं.
Q1. क्या न्यू टैक्स रिजीम में कोई नई छूट मिल सकती है?
A. हां, सरकार जरूरत के हिसाब से नए सेक्शन जोड़ सकती है.
Q2. स्टैंडर्ड डिडक्शन क्या खत्म हो सकता है?
A. संभावना कम है, क्योंकि यह सिस्टम को सरल बनाता है.
Q3. हेल्थ इंश्योरेंस के बिना भी टैक्स राहत मिल सकती है?
A. अगर नया हेल्थ खर्च सेक्शन आया, तो हाँ.
Q4. क्या बजट में हर साल टैक्स नियम बदलते हैं?
A. नहीं, लेकिन बजट नीति की दिशा तय करता है.
Q5. क्या हेल्थ पर टैक्स छूट से इलाज सस्ता होगा?
A. सीधे नहीं, लेकिन जेब पर बोझ जरूर कम होगा.