&format=webp&quality=medium)
आयकर कानून के तहत कोई व्यक्ति ₹20,000 या उससे अधिक का लोन या डिपॉजिट नकद में स्वीकार नहीं कर सकता. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारत में बड़े नकद लेनदेन (Cash Transactions) पर लंबे समय से निगरानी रखी जा रही है. सरकार का मकसद काले धन, बेनामी लेनदेन और बिना रिकॉर्ड वाले पैसों के इस्तेमाल को रोकना है.
इसी वजह से Income Tax कानून में ऐसे नियम बनाए गए हैं जो सिर्फ बिजनेस ट्रांजैक्शन ही नहीं बल्कि दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार के बीच होने वाले बड़े नकद उधार पर भी लागू हो सकते हैं. कई लोगों को लगता है कि दोस्त या परिवार से लिया गया पैसा टैक्स नियमों से बाहर होता है. लेकिन हकीकत इससे अलग है.
आयकर कानून के तहत कोई व्यक्ति ₹20,000 या उससे अधिक का लोन या डिपॉजिट नकद में स्वीकार नहीं कर सकता. इसका मतलब है कि अगर आपने किसी दोस्त से ₹20,000 या उससे अधिक की रकम कैश में ली है, तो यह नियमों के दायरे में आ सकता है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना उधार ली गई राशि के बराबर तक हो सकता है.
उदाहरण
| कैश में लिया गया लोन | संभावित पेनल्टी |
| ₹25,000 | ₹25,000 |
| ₹50,000 | ₹50,000 |
| ₹1 लाख | ₹1 लाख |
| ₹2 लाख | ₹2 लाख |
यानी अगर किसी व्यक्ति ने ₹1 लाख नकद उधार लिया और यह मामला नियमों के उल्लंघन में पाया गया, तो उस पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
नहीं. यही सबसे बड़ी गलतफहमी है. कानून आमतौर पर यह नहीं देखता कि पैसा दोस्त से आया है, रिश्तेदार से या किसी कारोबारी सहयोगी से. अगर लेनदेन निर्धारित सीमा से ऊपर है और नकद में हुआ है, तो जांच हो सकती है.
जब बड़ी नकद रकम का लेनदेन सामने आता है तो विभाग दोनों पक्षों से सवाल पूछ सकता है.
उधार लेने वाले से
उधार देने वाले से

कई लोग इन दोनों सीमाओं को एक जैसा समझ लेते हैं.
| नियम | लागू किस पर होता है | सीमा |
| Section 269SS | लोन और डिपॉजिट | ₹20,000 |
| Section 269ST | सामान्य नकद प्राप्तियां | ₹2 लाख |
₹20,000 वाला नियम खासतौर पर लोन और डिपॉजिट से जुड़ा है. ₹2 लाख वाला नियम ज्यादा व्यापक है और किसी भी प्रकार की बड़ी नकद प्राप्ति पर लागू हो सकता है.
कई लोग सोचते हैं कि कैश ट्रांजैक्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है. जानकारी कई स्रोतों से सामने आ सकती है:
अगर एक व्यक्ति अपने रिकॉर्ड में लोन दिखाए और दूसरा व्यक्ति उसका स्रोत साबित न कर पाए, तो विभाग सवाल उठा सकता है.
| बिंदु | जानकारी |
| कैश लोन सीमा | ₹20,000 |
| लागू कानून | Section 269SS |
| संभावित जुर्माना | लोन राशि के बराबर |
| दोस्त/रिश्तेदार पर लागू? | हां |
| सुरक्षित तरीका | बैंक ट्रांसफर, चेक, UPI, NEFT, RTGS |
अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए तो:
कई बार लोग मेडिकल खर्च, नौकरी जाने या अचानक जरूरत पड़ने पर दोस्तों से नकद उधार लेते हैं. ऐसी स्थिति से बचने के लिए पहले से Emergency Fund बनाना बेहतर माना जाता है. 3-6-9 Rule के अनुसार व्यक्ति अपनी जरूरत और जिम्मेदारियों के हिसाब से 3, 6 या 9 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार कर सकता है.
Step 1: कैश की जगह बैंकिंग चैनल चुनें.
Step 2: UPI, NEFT, RTGS या Account Transfer का उपयोग करें.
Step 3: लेनदेन का स्क्रीनशॉट और रिकॉर्ड सुरक्षित रखें.
Step 4: जरूरत हो तो लिखित समझौता बनाएं.
Step 5: भुगतान और पुनर्भुगतान दोनों बैंकिंग माध्यम से करें.
बड़ी नकद रकम का लेनदेन आज पहले की तुलना में ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. इसलिए दोस्ती, रिश्तेदारी या व्यक्तिगत भरोसे के आधार पर किए गए कैश ट्रांजैक्शन भी भविष्य में सवालों का कारण बन सकते हैं.
दोस्त या रिश्तेदार से उधार लेना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन तरीका गलत होने पर परेशानी खड़ी हो सकती है. यदि रकम ₹20,000 या उससे अधिक है, तो कैश की बजाय बैंक ट्रांसफर का रास्ता चुनना समझदारी है. इससे न केवल रिकॉर्ड साफ रहता है बल्कि भविष्य में आयकर विभाग के सवालों से भी बचाव हो सकता है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 न्यू टैक्स रिजीम के तहत कितने रुपये की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है?
न्यू टैक्स रिजीम में 4 लाख रुपये तक की बेसिक सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है.
Q2 नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख क्या होती है?
बिना किसी जुर्माने के इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख हर साल 31 जुलाई होती है.
Q3 क्या फॉर्म 16 के बिना भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया जा सकता है?
हां, आप अपनी सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और एआईएस (AIS) की मदद से बिना फॉर्म 16 के भी रिटर्न भर सकते हैं.
Q4 अगर मैं 31 जुलाई की आखिरी तारीख चूक जाऊं तो क्या होगा?
तय तारीख के बाद रिटर्न भरने पर आपको 5,000 रुपये तक की लेट फीस (जुर्माना) देनी पड़ सकती है.
Q5 फॉर्म 26AS क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
यह एक तरह का टैक्स पासबुक है जिसमें आपकी कमाई पर कटे हुए कुल टीडीएस (TDS) की पूरी जानकारी होती है.