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देश में टैक्स चोरी के लिए अब एक नया तरीका सामने आया है और वो Registered Unrecognized Political Parties (RUPP). इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि कई RUPP पार्टियां असल में टैक्स चोरी का माध्यम बन चुकी हैं. न तो ये चुनाव लड़ रही हैं, न ही इनका कोई राजनीतिक जनाधार है, फिर भी इन पार्टियों के जरिए अरबों रुपये के डोनेशन पर टैक्स छूट ली जा रही है. पढ़ें Zee Business की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.
इनकम टैक्स विभाग और Election Commission of India (ECI) ने 2021 से 2024 के बीच देशभर में मौजूद Registered Unrecognized Political Parties की जांच की. रिपोर्ट में पाया गया कि बड़ी संख्या में पार्टियां सिर्फ कागज़ों पर मौजूद हैं. इन पार्टियों का न तो कोई वास्तविक कार्यालय है और न ही कोई सक्रिय राजनीतिक गतिविधि. कई पार्टियां ऐसे टैक्स प्रैक्टिशनर चला रहे हैं जो इनका इस्तेमाल टैक्स प्लानिंग और डोनेशन रूटिंग के लिए कर रहे हैं.
इनकम टैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 6.24 लाख PAN कार्ड ऐसे पाए गए जिन्होंने इन RUPP पार्टियों में डोनेशन देकर टैक्स एक्सेम्प्शन का फायदा लिया. यह आंकड़ा 2021 की तुलना में लगभग 200% बढ़ गया है. 2021 से 2024 के बीच RUPP पार्टियों के जरिए टैक्स छूट की राशि बढ़कर ₹3,414 करोड़ तक पहुंच गई.
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू ये है कि कुल RUPP पार्टियों में से 86% पार्टियों ने कभी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल ही नहीं किया. यानी कि जिन संस्थाओं ने टैक्स छूट के लिए डोनेशन दिखाए, उन्होंने खुद टैक्स कंप्लायंस नहीं निभाया. ऐसी कई पार्टियां सालों से निष्क्रिय हैं, लेकिन अब भी उनके नाम पर टैक्स छूट का खेल जारी है.
इनकम टैक्स विभाग ने जब नोटिस भेजे, तो 50,824 टैक्सपेयर्स ने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न अपडेट की. कई मामलों में डोनेशन के रूप में दिखाई गई रकम को गलत बताया गया या वापस लिया गया.
रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ है कि कई Registered Unrecognized Political Parties ऐसे व्यक्तियों द्वारा संचालित की जा रही हैं जो खुद टैक्स प्रैक्टिशनर हैं. इनका मकसद राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि डोनेशन के जरिए टैक्स बचत के फर्जी रास्ते तैयार करना है. विभाग ने अब ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है.
जांच में पाया गया कि देशभर की करीब 2,764 RUPP पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने आज तक किसी भी चुनाव में भाग नहीं लिया. फिर भी इन पार्टियों के नाम पर हर साल करोड़ों का फंड आता है. अब इनकम टैक्स और ECI ने तय किया है कि जो पार्टी राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं है, उसकी रजिस्ट्रेशन कैंसिल की जाएगी.