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पैसा कमाना आसान है, लेकिन उसे बचाना और सही जगह इन्वेस्ट करके ग्रो करना असली चैलेंज है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
पैसा कमाना फिर भी आसान है, लेकिन उसे बचाना और सही जगह इन्वेस्ट करके ग्रो करना असली चैलेंज है.ज़ी बिज़नेस के खास पॉडकास्ट शो'Paison Ki Pathshala' में CA ईशा जायसवाल ने उन लोगों के लिए खास टिप्स दिए हैं, जिन्होंने अभी-अभी अपनी पहली जॉब शुरू की है. अगर आपकी सैलरी 10,000 रुपये है, तो निवेश की शुरुआत कैसे करें और 'इमरजेंसी फंड' का क्या गणित है, इसे विस्तार से डिकोड किया गया है.
जी हां CA Isha Jaiswal ने बताया है कि पैसा कमाना आसान हो सकता है, लेकिन उसे बचाना और सही जगह निवेश करके बढ़ाना असली चुनौती है. आज समझेंगे कि अगर आपकी पहली नौकरी लगी है और उसकी सैलरी ₹10,000 है, तो उसे निवेश की शुरुआत कैसे करनी चाहिए और इमजेंसी फंड क्या है और इसका फॉर्मूला क्या है?
CA ईशा जायसवाल के मुताबिक, अगर कोई प्रोफेशनल 10,000 रुपये महीना कमा रहा है, तो उसकी पहली प्राथमिकता 'इमरजेंसी फंड' होनी चाहिए.
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CA Isha Jaiswal के मुताबिक, ₹10,000 कमाने वाले व्यक्ति की पहली प्राथमिकता Emergency Fund होना चाहिए.असल में उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को कम से कम ₹500 हर महीने इमरजेंसी फंड के लिए अलग रखना चाहिए. क्योंकि कभी भी घर में कोई परेशानी आ सकती है या अचानक नौकरी चली जाए, तो ऐसे समय में यही फंड काम आता है.
उन्होंने कहा कि Emergency Fund बनाने के बाद दूसरी प्राथमिकता SIP होनी चाहिए.असल में SIP की शुरुआत ₹500 से भी की जा सकती है. जी हां रेगुलर रूप से छोटी रकम इन्वेस्ट करने की आदत लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकती है.
सीए ईशा जायसवाल ने बताया कि इंश्योरेंस जरूरी है, लेकिन इसकी प्राथमिकता Emergency Fund और SIP के बाद आती है.तो जैसे-जैसे आय बढ़ती है, वैसे-वैसे एक छोटा टर्म इंश्योरेंस लिया जा सकता है. इसके बाद बाकी रकम को घर के खर्च, EMI, किराए और अन्य जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए.
Emergency Fund की सही राशि समझाने के लिए CA Isha Jaiswal ने 3-6-9 का फॉर्मूला बताया. तो फिर इसके लिए सबसे पहले अपने पूरे महीने के खर्च का हिसाब निकालना जरूरी है.
अगर किसी इंसान की शादी नहीं हुई है, तो फिर कोई डिपेंडेंट नहीं है और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी नहीं है, तो उसे अपने 3 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाकर रखना चाहिए.
अगर किसी व्यक्ति पर EMI चल रही है या उसके ऊपर परिवार और अन्य लोगों की जिम्मेदारी है, तो उसे कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना चाहिए.
जी हां अगर कोई इंसान बिजनेस करता है, फ्रीलांसर है या फिर उसकी इनकम रेगुलर नहीं है, तो फिर उसे 9 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना चाहिए.असल में क्योंकि ऐसे लोगों की कमाई हर महीने एक जैसी नहीं होती.
Emergency Fund को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा निकाला जा सके.जैसे सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड.इससे जरूरत के समय फंड को आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और नुकसान की संभावना भी कम रहती है.
ईशा जायसवाल ने सलाह दी है कि इमरजेंसी फंड हमेशा ऐसी जगह रखें जहां से उसे तुरंत निकाला जा सके (लिक्विड). इसके लिए सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड सबसे बेहतर हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर बिना किसी नुकसान के आप तुरंत पैसा एनकैश कर सकें.
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आपको बता दें कि यह है कि निवेश शुरू करने के लिए बड़ी सैलरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.असल में ₹10,000 की शुरुआती सैलरी से भी ₹500 के इमरजेंसी फंड और SIP के जरिए भविष्य की नींव रखी जा सकती है.तो बस अपनी लाइफस्टाइल और जिम्मेदारी के हिसाब से '3-6-9' के फार्मूले को अपनाकर आप खुद को फाइनेंशियल रूप से सुरक्षित कर सकते हैं.
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